Homeमध्य प्रदेशभोपालरूहानी इश्क —डॉ. शबनम सुल्ताना

रूहानी इश्क —डॉ. शबनम सुल्ताना

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​तुझे क्या लगा मुझे रूहानी इश्क हुआ?
लफ्ज़ जो शरीक नहीं करता किसी को
लेकिन हर आह पर मरता है महबूब की
मुझे उस इश्क से इश्क हुआ
जो तुझे तेरे माँ-पापा से हुआ।
​उसने मुझे सरशार किया,
न देखा है तूने न जाना—
मुझे वो प्यार का प्याला मिला
जिसकी तड़प रही सबको,
मुझे बिन माँगे वो मिला।
​तू जिधर हाथ रखता है
उस पत्थर से मुझे मोहब्बत है,
सोच फिर ताबीर क्या है उस ख्वाब की
दिन-रात देखती मेरी आँखों को नींद से जो हुआ।
​बगावत पर उतारू है यह मेरा दिल,
जिसे हर बार तेरे नाम पर धड़कने से सुख मिला।

​— डॉ. शबनम सुल्ताना

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