
कोदो और सांवा जैसे मोटे अनाज से तैयार कर रहीं उत्पाद, ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक पहुंच
लियाकत मंसूरी
नित्य संदेश, मेरठ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उप्र में उद्यमिता, नवाचार और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे मंचों के जरिए प्रदेश के उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और कारोबार के नए अवसर तलाशने का मौका मिल रहा है। इसी माहौल में मेरठ की मीनाक्षी वर्मा ने मोटे अनाज यानी मिलेट्स को सौंदर्य प्रसाधनों से जोड़कर नई पहल की है।
कंकरखेड़ा निवासी मीनाक्षी ने करीब 23 महीने तक शोध और प्रयोग करने के बाद ‘विमोरा नेचुरल साल्यूशन’ के तहत प्राकृतिक हेयर, स्किन और बॉडी केयर उत्पादों की रेंज तैयार की है। उनकी खासियत यह है कि उत्पादों के फार्मूलेशन में कोदो और बार्नयार्ड मिलेट यानी सांवा जैसे छोटे मिलेट्स का इस्तेमाल किया गया है। अब वह मिलेट्स के प्रसंस्करण से निकलने वाले अपशिष्ट का उपयोग कर पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग विकसित करने की तैयारी में भी जुटी हैं। मीनाक्षी का कहना है कि उनका उद्देश्य पारंपरिक अनाज के गुणों को आधुनिक कॉस्मेटिक उद्योग से जोड़ना है। इसके लिए उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मिलेट रिसर्च (आइआइएमआर) हैदराबाद से प्रशिक्षण लिया है। वह दो बार संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं। हालांकि, उत्पादों के फार्मूलेशन और गुणवत्ता की जांच के लिए अलग से प्रयोगशाला परीक्षण कराए गए हैं। उनके अनुसार, उत्पादों की जांच रिपोर्ट और प्रमाणपत्र भी उपलब्ध हैं।
तीन श्रेणियों में तैयार किए उत्पाद
विमोरा नेचुरल साल्यूशन के तहत हेयर केयर श्रेणी में शैंपू, कंडीशनर और हेयर सीरम उपलब्ध हैं। स्किन केयर रेंज में फेसवाश, फेस सीरम, डे क्रीम, सनस्क्रीन और नाइट क्रीम शामिल हैं। मीनाक्षी के अनुसार, नाइट क्रीम में अश्वगंधा और मिलेट का इस्तेमाल किया गया है। बॉडी केयर श्रेणी में डिटैन साबुन, एप्सम साल्ट के विभिन्न वेरिएंट और मुल्तानी मिट्टी आधारित उत्पाद भी शामिल हैं। इनके अलावा गुलाबी मुल्तानी मिट्टी और डेड सी मड जैसे विकल्प भी तैयार किए गए हैं।

पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू
मीनाक्षी का दावा है कि उत्पादों के फार्मूलेशन तैयार करते समय उनकी स्थिरता, शेल्फ लाइफ और संभावित त्वचा प्रतिक्रिया की जांच पर ध्यान दिया गया। वह स्पष्ट करती हैं कि फिलहाल कंपनी का उत्पादन थर्ड पार्टी मैन्युफैक्चरिंग के जरिए कराया जा रहा है, जबकि फार्मूलेशन उनके अपने हैं। इन्हें पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू करने की भी तैयारी है।
असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी छोड़ शुरू किया उद्यम
मीनाक्षी वर्ष 2023 तक भोपाल के एक मैनेजमेंट कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर और एडमिनिस्ट्रेशन हेड के रूप में काम कर रही थीं। बिजनेस कम्युनिकेशन विषय में करीब दस साल का अनुभव रखने वाली मीनाक्षी ने बताया कि वर्ष 2023 में मिलेट्स को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय अभियान से उन्हें इस क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा मिली। इसके बाद उन्होंने मिलेट्स के संभावित उपयोगों को समझने के लिए प्रशिक्षण लिया और कॉस्मेटिक उत्पादों पर शोध शुरू किया।
सामाजिक कार्यों से उन्हें मिली प्रेरणा
उनके मुताबिक, इस काम में काफी पूंजी शोध और विकास पर खर्च हुई है। फिलहाल उद्यम में उनका अपना निवेश लगा है। कंपनी एमएसएमई और स्टार्टअप इंडिया में पंजीकृत है तथा उसका ट्रेडमार्क भी लिया गया है। उनकी माता राधा रानी भी कंपनी की सह-संस्थापक हैं। मीनाक्षी बताती हैं कि महिलाओं के लिए किए गए उनकी माता के सामाजिक कार्यों से भी उन्हें प्रेरणा मिली।
ऑनलाइन कारोबार, आगे खाद्य उत्पादों की तैयारी
कंपनी के उत्पाद अपनी वेबसाइट के साथ अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो और सरकारी ई-कामर्स पोर्टल जीईएम पर उपलब्ध हैं। मीनाक्षी के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से ऑनलाइन आर्डर मिल रहे हैं। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हेल्थ एंड वेलनेस इंटरनेशनल एक्सपो में भी उन्होंने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए, जहां कारोबार के नए संपर्क बने। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में उन्होंने उत्पादों में इस्तेमाल किए गए पौधों का प्रदर्शन और वितरण भी किया। अब मीनाक्षी हर्बल और खाद्य उत्पादों की नई श्रेणी शुरू करने की योजना बना रही हैं। इसके साथ ही अपनी भूमि पर औषधीय पौधों की खेती कर कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहती हैं।
मिलेट्स के अपशिष्ट से पैकेजिंग बनाने का लक्ष्य
मीनाक्षी का अगला लक्ष्य मिलेट्स की बाहरी परत और अन्य कृषि अपशिष्ट को बेकार जाने से बचाना है। वह गन्ने के अवशेष और इमली के बीज जैसे प्राकृतिक पदार्थों के साथ मिलाकर ऐसी पैकेजिंग विकसित करने पर काम कर रही हैं, जिसका इस्तेमाल भविष्य में तरल और अर्धतरल उत्पादों के लिए किया जा सके। इस दिशा में अभी शोध और विकास का काम चल रहा है।
भोजन तक सीमित न रहे मिलेट्स का इस्तेमाल
उनका कहना है कि पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग के लिए बड़े न्यूनतम आर्डर और मशीनरी की लागत चुनौती हैं। इसके लिए सरकारी सहायता और निवेश की जरूरत है। मीनाक्षी की कोशिश है कि मिलेट्स का इस्तेमाल केवल भोजन तक सीमित न रहे, बल्कि सौंदर्य प्रसाधनों और टिकाऊ पैकेजिंग के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा हों।


