
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ में प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के विधि विद्यार्थियों के बीच शैक्षणिक संवाद, सहपाठी शिक्षण और व्यावसायिक मार्गदर्शन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संयुक्त सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ और नवप्रवेशित विद्यार्थियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, रैगिंग मुक्त एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण विकसित करना तथा विद्यार्थियों को संस्थान के शैक्षणिक माहौल से सहज रूप से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम का आयोजन सुभारती विधि संस्थान के निदेशक न्यायमूर्ति राजेश चंद्र (पूर्व न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, उत्तर प्रदेश) के निर्देशन तथा संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की एंटी-रैगिंग समिति के शिक्षक सदस्य हर्षित और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य आशुतोष देशवाल ने संयुक्त सत्र की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ और कनिष्ठ विद्यार्थियों के बीच आपसी संवाद और सहयोग से विश्वास का वातावरण बनता है। इससे नवप्रवेशित विद्यार्थियों की झिझक दूर होती है और वे बिना किसी भय के अपनी शैक्षणिक यात्रा शुरू कर सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने एक-एक करके अपना परिचय दिया और वरिष्ठ विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के साथ संवाद किया। इस पहल से नवप्रवेशित विद्यार्थियों को अपने वरिष्ठ साथियों के अनुभवों से सीखने, सवाल पूछने और अपनी जिज्ञासाएं साझा करने का अवसर मिला। साथ ही, विद्यार्थियों के बीच आपसी सहयोग, मित्रता और सामूहिक अध्ययन की भावना को प्रोत्साहन मिला।
न्यायमूर्ति राजेश चंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि विधि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, नैतिकता और उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ने की सतत यात्रा है। उन्होंने विद्यार्थियों को आपसी संवाद, सहयोग और सामूहिक अध्ययन के माध्यम से एक जिम्मेदार एवं सक्षम विधि व्यवसायी बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को आपसी सम्मान और सहयोग के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
वहीं, प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई ने विद्यार्थियों को संयुक्त सत्र का अधिकतम लाभ उठाने और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि विधि के विद्यार्थियों के लिए जिज्ञासा, अनुशासन और उत्कृष्टता के साथ न्याय, निष्ठा एवं निष्पक्षता जैसे मूल्यों को अपनाना बेहद आवश्यक है। ये मूल्य उनके शैक्षणिक विकास के साथ-साथ भविष्य के व्यावसायिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी शंकाओं को खुलकर व्यक्त करना चाहिए और सीखने के प्रत्येक अवसर का सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
यह संयुक्त सत्र विद्यार्थियों के बीच सकारात्मक संबंध स्थापित करने, रैगिंग मुक्त शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा देने तथा उनके शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ


