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‘ठरलंय फॉरएवर !’ : प्रेमकथा का अनूठा रंगानुभव, युवा पीढ़ी की भाषा, मल्टीमीडिया तकनीक से नाटक बना अत्यंत प्रभावशाली

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। सानंद न्यास के पांच दर्शक समूहों के लिए रिश्तों की उलझनों को टटोलते नाटक ‘ठरलंय फॉरएवर’ का मंचन शनिवार शाम से प्रारंभ हुआ। नाटक की लेखिका-अक्षता आचार्य और दिग्दर्शक- ऋषी मनोहर हैं।

मराठी रंगमंच के सामने आज सबसे बड़ी चुनौतियों में एक है युवा दर्शकों को नाट्य गृह तक आकर्षित करना। इंटरनेट और ओटीटी के विस्तार ने मनोरंजन की दुनिया बदल दी है। ऐसे में ‘नवा गडी, नवा राज’ और ‘अमर फोटो स्टुडिओ’ की परंपरा में ‘ठरलंय फॉरएवर!’ नई पीढ़ी के भावविश्व से संवाद करने का प्रयास है।

सुजय जाधव, ऋषि मनोहर, कपिल रेडेकर, अक्षता आचार्य और ऋता दुर्गुळे के सहयोग से तैयार यह नाटक समकालीन प्रेमकथा को मल्टीमीडिया तकनीक और अंग्रेजी मिश्रित मराठी के सहारे मंच पर उतारता है। लेखिका और अबीर का दर्शकों से सीधा संवाद प्रस्तुति को सहज बनाता है। एलईडी तकनीक के जरिए समय और स्थान की रचना पारंपरिक नेपथ्य की सीमाओं को विस्तार देती है।

अबीर और मीरा की मुलाकात, साथ मिलकर फिल्म की कहानी लिखने का प्रयास, गलतफहमियां और दोस्ती में पनपती भावनाएं कथानक का आधार हैं। उनके द्वारा रचे जा रहे काल्पनिक पात्र कबीर और इरा की कहानी वास्तविक रिश्तों के समानांतर चलती है। प्रेम, विश्वास और भावनात्मक उलझनों का यह मेल रोचक है। कुछ प्रसंगों का अनुमान लगने के बावजूद प्रस्तुति दर्शकों की रुचि बनाए रखती है। अंग्रेजी मिश्रित मराठी नाटक की विशिष्ट पहचान है। यह महानगरीय युवाओं की बोलचाल और उनकी बदलती भाषाई आदतों को प्रतिबिंबित करती है। मराठी रंगमंच ने मालवणी, वरहाड़ी और आगरी जैसी बोलियों को अपनाया है; उसी क्रम में ‘मंग्लिश’ का प्रयोग भी नए दर्शक वर्ग तक पहुंचने की संभावना जगाता है। कपिल रेडेकर ने अबीर के भुलक्कड़ और बेतरतीब स्वभाव को सहजता से निभाया है। ऋता दुर्गुळे की मीरा चंचलता और संवेदनशीलता का सुंदर मेल है। दोनों की नोकझोंक प्रेमकथा को जीवंत बनाती है।

मरीन ड्राइव, अलीबाग और चौपाटी के दृश्य, गीत-संगीत तथा नृत्य प्रस्तुति को दृश्यात्मक आकर्षण देते हैं। सुमित पाटील का नेपथ्य, शुभंकर सौदणकर के वीएफएक्स और तेजस देवधर की प्रकाश व्यवस्था इस अनुभव को समृद्ध करते हैं। एलईडी और वीएफएक्स प्रभावशाली हैं, तकनीक कहानी को और सशक्त बनाती है। मंचन असली शक्ति कलाकारों का जीवंत अभिनय और दर्शकों से नाटक का तादात्म्य है। निश्चित ही ‘ठरलंय फॉरएवर !’ बदलते समय से संवाद करने वाला स्वागत योग्य प्रयोग है। दिग्दर्शक
ऋषि मनोहर द्वारा किया गया तकनीकी नवाचार इंदौर के रसिक प्रेक्षकों को बहुत पसंद आया है।

रविवार को 3 शो

सानंद न्यास के अध्यक्ष जयंत भिसे और मानद सचिव संजीव वावीकर ने बताया कि नाटक
ठरलंय फोरेवर के रविवार को 3 शो होंगे।
सुबह 10 बजे, दोपहर 4 बजे और रात्रि 7:30 बजे।

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