
अजय चौधरी
नित्य संदेश, मेरठ।मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी) में शनिवार को ‘ऑर्बिट्रॉन: स्पेस टेक्नोलॉजी हैकाथॉन’ का भव्य समापन हुआ। आईएसटीई स्टूडेंट चैप्टर, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और सेंटर फॉर स्पेस टेक्नोलॉजी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़े नवाचारों और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का पहला चरण 16 अक्टूबर को आयोजित हुआ था, जबकि ग्रैंड फिनाले 24 अक्टूबर को संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन कैंपस डायरेक्टर डॉ. संजय कुमार सिंह, डीन एकेडमिक्स प्रो. (डॉ.) संजीव कुमार सिंह, प्रो. (डॉ.) प्रदीप पंत, प्रो. (डॉ.) गौरव गोयल, डॉ. मुकेश रावत और डॉ. स्वाति शर्मा ने किया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवीन विचारों पर काम करने और वास्तविक तकनीकी समस्याओं के समाधान विकसित करने का अवसर प्रदान करना था।
88 टीमों ने कराया पंजीकरण, 30 का चयन
हैकाथॉन में कुल 88 टीमों ने पंजीकरण कराया। प्रथम चरण में मूल्यांकन के बाद 30 टीमों को अगले चरणों और ग्रैंड फिनाले के लिए चयनित किया गया। सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र दिए गए, जबकि प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली टीमों को पदक और उत्कृष्टता प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
उद्योग विशेषज्ञों ने परखी प्रतिभा
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में ओएनडीसी में जनरेटिव एआई एवं इनोवेशन के वाइस प्रेसिडेंट विदित भाटिया, टॉमर्स के संस्थापक एवं सीईओ विकास तोमर और आईबीएम इंडिया में स्ट्रेटजी एंड इनिशिएटिव्स के प्रोग्राम लीड डॉ. मणि मधुकर शामिल रहे। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट का मूल्यांकन किया और उन्हें तकनीकी सुधार, नवाचार तथा उद्योग जगत की अपेक्षाओं से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इससे प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीक और व्यावहारिक जरूरतों को समझने का अवसर मिला।
टीमवर्क और समस्या समाधान पर जोर
हैकाथॉन का समन्वय आईटी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. स्वाति शर्मा, स्पेस टेक्नोलॉजी के एसपीओसी डॉ. अनुराग एरॉन और डॉ. मुकेश रावत ने किया। आईएसटीई के फैकल्टी कोऑर्डिनेटर राहुल शिवहरे, आरती वर्मा और प्रेक्षा प्रताप ने भी आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों में टीमवर्क, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता को बढ़ावा मिला।
तकनीकी चुनौतियों से सीखने का अवसर : डॉ. संजय कुमार सिंह
कैंपस डायरेक्टर डॉ. संजय कुमार सिंह ने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन की तकनीकी चुनौतियों पर काम करने का अवसर देते हैं। एमआईईटी व्यावहारिक नवाचार, उद्योग जगत के साथ सहभागिता और अनुभव आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। ‘ऑर्बिट्रॉन’ जैसे आयोजन विद्यार्थियों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सहित उभरते तकनीकी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं।
इस अवसर पर एमआईईटी के चेयरमैन विष्णु शरण, वाइस चेयरमैन गौरव अग्रवाल और बरखा अग्रवाल ने प्रतिभागियों को बधाई दी।


