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डॉ. ओएस गुप्ता स्मृति व्याख्यान माला का द्वितीय व्याख्यान गरिमामय वातावरण में संपन्न

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। गीता फाउंडेशन मेरठ एवं डॉ. ओ. एस. गुप्ता मेमोरियल कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. ओ. एस. गुप्ता स्मृति व्याख्यानमाला का द्वितीय व्याख्यान डी.एन. डिग्री कॉलेज, घंटाघर चौराहा में भव्यता और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का मुख्य विषय “आर्य समाज के क्रांतिकारियों का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान” था। समारोह में शिक्षा, सामाजिक चेतना, राष्ट्रीय एकता, गुरु-शिष्य परंपरा और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। शहर के अनेक शिक्षाविदों, पूर्व प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, समाजसेवियों, साहित्यकारों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

डॉ. वरद गुप्ता की उपस्थिति रही विशेष आकर्षण

कार्यक्रम में डॉ. वरद गुप्ता की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। वे स्वर्गीय डॉ. ओ. एस. गुप्ता के पुत्र हैं। पिता की स्मृति में आयोजित इस व्याख्यानमाला ने उनके शैक्षिक, सामाजिक एवं वैचारिक योगदान को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। डॉ. वरद गुप्ता की सहभागिता ने आयोजन को पारिवारिक आत्मीयता और भावनात्मक गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने डॉ. ओ. एस. गुप्ता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए शिक्षा और समाज के प्रति समर्पण की उनकी परंपरा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. ओ. एस. गुप्ता स्मृति व्याख्यानमाला का उद्देश्य केवल एक महान व्यक्तित्व की स्मृतियों को संजोना नहीं, बल्कि उनके विचारों, मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना भी है। इसी भावना के साथ आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रचेतना के संगम के रूप में सामने आया।

प्रो. ओ. पी. गर्ग का नागरिक अभिनंदन

समारोह का एक प्रमुख आकर्षण वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रोफेसर ओ. पी. गर्ग का नागरिक अभिनंदन रहा। विधि शिक्षा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान, शैक्षणिक उपलब्धियों और विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाली उनकी भूमिका का सम्मानपूर्वक स्मरण किया गया। उन्होंने अनेक विद्यार्थियों को विधि शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और शिक्षा जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। इस अवसर पर उनके छोटे भाई डॉ. एस. पी. गर्ग ने भावपूर्ण ढंग से अभिनंदन-पत्र का वाचन किया। उनके जीवन, उपलब्धियों और शैक्षणिक योगदान को प्रस्तुत करते समय समारोह में उपस्थित लोगों ने गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना व्यक्त की। उनके अनेक शिष्य और प्रशंसक भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

पूर्व कमिश्नर जगवीर सिंह शेरावत, पूर्व आईएएस डॉ. प्रभात राय तथा अन्य शिष्यों की उपस्थिति ने नागरिक अभिनंदन को विशेष महत्त्व प्रदान किया। यह अवसर इस बात का प्रतीक बना कि एक शिक्षक की वास्तविक उपलब्धि केवल उसकी व्यक्तिगत सफलता में नहीं, बल्कि उसके विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, ज्ञान और संस्कारों में भी दिखाई देती है।

डॉ. जगमती सागवान का प्रभावशाली व्याख्यान

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. जगमती सागवान, प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद्, ने “आर्य समाज के क्रांतिकारियों का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान” विषय पर अत्यंत सारगर्भित और ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में आर्य समाज की वैचारिक एवं सामाजिक भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आर्य समाज ने शिक्षा के प्रसार, सामाजिक कुरीतियों के विरोध, महिला शिक्षा, राष्ट्रीय चेतना और स्वाभिमान की भावना को प्रबल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आर्य समाज से प्रेरित अनेक क्रांतिकारियों ने अपने साहस, त्याग, विचारों और बलिदान से स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की।

डॉ. सागवान ने इस बात पर विशेष बल दिया कि स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल राजनीतिक घटनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि यह उन विचारों, आंदोलनों और सामाजिक सुधारों की कहानी भी है, जिन्होंने भारतीय समाज को जागृत किया। उन्होंने नई पीढ़ी से आह्वान किया कि वह देश के क्रांतिकारियों के जीवन, उनके आदर्शों और सामाजिक सुधार के प्रयासों का अध्ययन करे तथा उनके विचारों को वर्तमान सामाजिक जीवन में अपनाए। उनके व्याख्यान ने उपस्थित श्रोताओं को इतिहास के महत्वपूर्ण पक्षों से परिचित कराया और स्वतंत्रता संग्राम में सामाजिक एवं वैचारिक आंदोलनों की भूमिका पर गंभीरता से विचार करने का अवसर दिया।

डॉ. प्रभात राय ने किया गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता का भावपूर्ण स्मरणपूर्व

आईएएस डॉ. प्रभात राय ने अपने संबोधन में अपने गुरुओं, शिक्षकों और जीवन को दिशा देने वाले व्यक्तित्वों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के व्यक्तित्व निर्माण, वैचारिक विकास और जीवन की उपलब्धियों में गुरुजनों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा और संस्कार देने वाले सभी गुरुओं का स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उनके संबोधन में गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान, विनम्रता और आत्मीयता का भाव स्पष्ट दिखाई दिया। उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम न मानकर चरित्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों के विकास का आधार बताया।

इस अवसर पर पूर्व कमिश्नर जगवीर सिंह शेरावत सहित उनके अनेक शिष्यों और शुभचिंतकों की उपस्थिति ने इस भाव को और अधिक अर्थपूर्ण बनाया। समारोह में उपस्थित लोगों ने गुरुजनों के सम्मान और उनके योगदान को याद करने की परंपरा को समाज के लिए आवश्यक बताया।

राष्ट्रीय कवि सत्यपाल सत्यम की कविता ने कार्यक्रम में चार चाँद लगाए

समारोह का साहित्यिक पक्ष भी अत्यंत प्रभावशाली रहा। राष्ट्रीय कवि सत्यपाल सत्यम ने अपनी ओजस्वी, विचारोत्तेजक और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत काव्य प्रस्तुति से पूरे कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। उनकी कविता ने श्रोताओं को केवल साहित्यिक आनंद ही नहीं दिया, बल्कि समाज में व्याप्त विभाजन, भेदभाव और संकीर्णताओं पर विचार करने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने अपनी कविता ‘कवि की प्रार्थना’ के माध्यम से मानवीय एकता, सामाजिक समरसता और संविधान के मूल्यों का संदेश दिया। उनकी कविता की पंक्ति—“धर्म और जातियाँ मिटाओ संविधान से”ने सभागार में उपस्थित लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस पंक्ति के माध्यम से उन्होंने समाज को जाति और धर्म के आधार पर होने वाले भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता, समानता और संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।

सत्यपाल सत्यम की काव्य प्रस्तुति ने कार्यक्रम के वैचारिक वातावरण को और अधिक सशक्त बनाया। उनकी प्रभावपूर्ण अभिव्यक्ति ने श्रोताओं में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया तथा साहित्य के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित किया। उनकी कविता ने यह संदेश दिया कि साहित्य और कविता का उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ समाज को जागरूक करना और मनुष्य को मनुष्य के निकट लाना भी है।

गौतम बंधु की उपस्थिति से बढ़ी

कार्यक्रम की गरिमाकार्यक्रम में गौतम बंधु की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। उनकी सहभागिता ने आयोजन के सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण को और समृद्ध किया। समारोह में उपस्थित साहित्य, शिक्षा, समाजसेवा और जनहित से जुड़े व्यक्तित्वों ने इस बात को रेखांकित किया कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने, विचारों का आदान-प्रदान करने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।राष्ट्रीय कवि सत्यपाल सत्यम की काव्य प्रस्तुति, डॉ. जगमती सागवान का ऐतिहासिक व्याख्यान तथा प्रो. ओ. पी. गर्ग का नागरिक अभिनंदन कार्यक्रम के तीन प्रमुख आकर्षण रहे। इन सभी गतिविधियों ने समारोह को ज्ञान, साहित्य, सम्मान और सामाजिक चेतना का संयुक्त मंच बना दिया।

अनेक गणमान्य व्यक्तियों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में पूर्व डीजीपी एस. एम. माथुर, पूर्व आईजी अजय मोहन शर्मा, पूर्व कमिश्नर जगवीर सिंह शेरावत, पूर्व आईएएस डॉ. प्रभात राय, डॉ. वरद गुप्ता, डॉ. एस. पी. गर्ग, प्रो. ओ. पी. गर्ग तथा आर्य समाज से जुड़े हरवीर सुमन सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। शहर के अनेक शिक्षाविदों, समाजसेवियों, साहित्यप्रेमियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। सभी ने शिक्षा, सामाजिक समरसता, राष्ट्रप्रेम, साहित्य और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े ऐसे आयोजनों को समाज के लिए उपयोगी बताया।

अजय कुमार ने किया प्रभावशाली संचालन

कार्यक्रम का सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली संचालन अजय कुमार ने किया। उन्होंने अतिथियों, वक्ताओं और उपस्थित जनसमूह का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की विभिन्न कड़ियों को सहजता और प्रभावपूर्ण ढंग से जोड़ा। उनके संचालन में कार्यक्रम का शैक्षणिक, साहित्यिक और सम्मान समारोह संबंधी पक्ष व्यवस्थित रूप से सामने आया। समारोह के माध्यम से शिक्षा के प्रति समर्पण, गुरुजनों के सम्मान, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान, आर्य समाज की ऐतिहासिक भूमिका और सामाजिक एकता के संदेश को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।

शिक्षा, साहित्य और राष्ट्रचेतना का प्रेरणादायी संगम

डॉ. ओ. एस. गुप्ता स्मृति व्याख्यानमाला का यह द्वितीय आयोजन अनेक दृष्टियों से यादगार रहा। एक ओर प्रो. ओ. पी. गर्ग का नागरिक अभिनंदन कर शिक्षा और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया, वहीं दूसरी ओर डॉ. जगमती सागवान के व्याख्यान ने स्वतंत्रता संग्राम में आर्य समाज के योगदान को रेखांकित किया।

डॉ. प्रभात राय के गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता-भाव और राष्ट्रीय कवि सत्यपाल सत्यम की कविता ने कार्यक्रम में मानवीय संवेदना, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों का संदेश जोड़ा। डॉ. वरद गुप्ता की उपस्थिति ने स्वर्गीय डॉ. ओ. एस. गुप्ता की स्मृति को विशेष आत्मीयता प्रदान की। गौतम बंधु सहित उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

यह समारोह इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि शिक्षा समाज को दिशा देती है, गुरु जीवन को संस्कार देते हैं, साहित्य चेतना जगाता है और क्रांतिकारियों का इतिहास राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध पैदा करता है। ऐसे आयोजन समाज में ज्ञान, संवेदना, एकता और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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