
नित्य संदेश। करवा चौथ के दिन चाँद देर से निकलता है। यह देरी खगोलशास्त्र की है, पर इस देरी में ही इस पर्व का सारा सौंदर्य छिपा है। साल के बाकी 364 दिन चाँद यूँ ही निकलता और ढल जाता है, पर कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के चाँद का इंतज़ार पूरे देश की छतों पर होता है। सवाल है, क्यों? आखिर एक उपग्रह का एक व्रत से ऐसा क्या नाता है कि उसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है?
चाँद क्यों है इस व्रत के केंद्र में?
भारतीय परम्परा में चाँद को मन का कारक माना गया है। कहा गया है – चंद्रमा मनसो जातः। मन चंचल है, प्रेम चंचल है, संबंध चंचल है। चाँद की शीतलता इस चंचलता को स्थिरता देती है। इसलिए प्रार्थना चाँद से की जाती है कि वह मन को शांत रखे। दूसरा कारण है चाँद का स्वरूप। चाँद अकेला नहीं चमकता, वह सूरज के प्रकाश से चमकता है। जैसे पति-पत्नी का संबंध है – एक-दूसरे के प्रकाश से ही दोनों का जीवन रोशन होता है। कोई अकेला पूर्ण नहीं। और तीसरा, सबसे व्यावहारिक कारण। चाँद लंबी आयु का प्रतीक है। वह हर महीने घटता है, मरता हुआ लगता है, पर फिर अमावस्या के अंधेरे के बाद फिर से पूर्ण होता है। यह पुनर्जन्म का, निरंतरता का प्रतीक है। इसीलिए उससे लंबी उम्र की कामना की जाती है।
छलनी का रहस्य
करवा चौथ की सबसे प्रसिद्ध तस्वीर है – छलनी में से चाँद और फिर पति का चेहरा देखना। यह केवल एक रस्म नहीं, एक गहरा दर्शन है। छलनी छानती है। वह बेकार को रोककर सार को आगे जाने देती है। छलनी से देखने का अर्थ है – मैं संसार के सारे दोष, सारी कड़वाहट, सारी शिकायतों को छान रही हूँ। जो शेष बचता है, वह केवल प्रेम है। पहले मैं उस शुद्ध प्रेम के प्रतीक चाँद को देखती हूँ, फिर उसी शुद्ध दृष्टि से तुम्हें। यह भारतीय स्त्री की अपनी कविता है। उसने त्याग को भी सौंदर्य में बदल दिया।
जब चाँद बाजार में बिकने लगा
आज चाँद का यह महत्व बाजार ने भी समझ लिया है। विज्ञापनों में करवा चौथ का चाँद बेचा जा रहा है। पर हमें याद रखना होगा कि चाँद आकाश में ही सुंदर लगता है, शोरूम में नहीं। व्रत का अर्थ अगर केवल महंगे लहंगे, हीरे के सेट और इंस्टाग्राम रील तक सिमट गया, तो हम चाँद की शीतलता खोकर केवल उसकी चमक के पीछे भाग रहे हैं। इस भागदौड़ में आज कई युवा दंपति इस परम्परा को नए अर्थ दे रहे हैं। पति भी व्रत रख रहे हैं, साथ में चाँद देख रहे हैं। यह बहुत शुभ संकेत है। जब प्रतीक्षा दोनों तरफ से हो, तो चाँद और भी सुंदर लगता है।
अंत में
करवा चौथ का चाँद हमें एक बात सिखाता है जो आज के समय में सबसे जरूरी है – प्रतीक्षा करना। आज सब कुछ तुरंत चाहिए। तुरंत जवाब, तुरंत प्यार, तुरंत परिणाम। पर प्रेम तुरंत नहीं होता। वह चाँद की तरह धीरे-धीरे बढ़ता है। उसके लिए उपवास करना पड़ता है, इंतज़ार करना पड़ता है। तो इस करवा चौथ जब चाँद निकले, तो उसे सिर्फ एक रस्म की तरह मत देखिए। उसे एक साक्षी की तरह देखिए। उससे कहिए कि हमारे रिश्तों में भी तुम्हारी तरह शीतलता बनी रहे, तुम्हारी तरह उजाला बना रहे, और तुम्हारी तरह हर अंधेरे के बाद फिर से पूर्ण होने की क्षमता बनी रहे।
लियाकत मंसूरी
संपादक


