मेरठ। यूपी एसएसएससी द्वारा आयोजित पीईटी-2026 परीक्षा को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। परीक्षा के दृष्टिगत अपर पुलिस महानिदेशक, मेरठ जोन ने आज एसपी सिटी और एसपी देहात की मौजूदगी में मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया।
ADG ने स्टेशन पर परीक्षार्थियों के सुगम आवागमन, सुरक्षा और सुविधा के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र तक आसानी से पहुंचाने के लिए लगाए गए क्यूआर कोड आधारित डिजिटल मार्गदर्शन, ई-रिक्शा, ऑटो, बसों की उपलब्धता, प्रतीक्षालय, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, प्रमुख चौराहों और परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने, यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने और लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए।
ADG ने साफ कहा कि किसी भी परीक्षार्थी को आने-जाने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए और सभी परीक्षार्थी समय पर अपने केंद्र पर पहुंचें। इसके लिए सभी अधिकारियों को पूरी सतर्कता और आपसी समन्वय के साथ ड्यूटी करने के निर्देश दिए गए हैं
मेरठ। जनपद में आज आयोजित पीईटी-2026 परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सम्पन्न कराने के लिए मेरठ पुलिस पूरी तरह अलर्ट रही।
एसपी सिटी ने इन केंद्रों का किया निरीक्षण – पुलिस अधीक्षक नगर द्वारा मेरठ कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज (GIC), सेंट थॉमस, खालसा इंटर कॉलेज एवं आर.जी. पी.जी. कॉलेज सहित कई प्रमुख परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
एसपी ग्रामीण भी रहे भ्रमण पर – वहीं दूसरी ओर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण द्वारा भी ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया गया।
दोनों अधिकारियों ने परीक्षा केंद्रों पर तैनात पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों को कड़ी सतर्कता बरतने, सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ रखने और सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी परीक्षार्थी को किसी प्रकार की असुविधा न हो और परीक्षा सकुशल सम्पन्न हो सके।
कोदो और सांवा जैसे मोटे अनाज से तैयार कर रहीं उत्पाद, ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक पहुंच
लियाकत मंसूरी
नित्य संदेश, मेरठ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उप्र में उद्यमिता, नवाचार और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे मंचों के जरिए प्रदेश के उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और कारोबार के नए अवसर तलाशने का मौका मिल रहा है। इसी माहौल में मेरठ की मीनाक्षी वर्मा ने मोटे अनाज यानी मिलेट्स को सौंदर्य प्रसाधनों से जोड़कर नई पहल की है।
कंकरखेड़ा निवासी मीनाक्षी ने करीब 23 महीने तक शोध और प्रयोग करने के बाद ‘विमोरा नेचुरल साल्यूशन’ के तहत प्राकृतिक हेयर, स्किन और बॉडी केयर उत्पादों की रेंज तैयार की है। उनकी खासियत यह है कि उत्पादों के फार्मूलेशन में कोदो और बार्नयार्ड मिलेट यानी सांवा जैसे छोटे मिलेट्स का इस्तेमाल किया गया है। अब वह मिलेट्स के प्रसंस्करण से निकलने वाले अपशिष्ट का उपयोग कर पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग विकसित करने की तैयारी में भी जुटी हैं। मीनाक्षी का कहना है कि उनका उद्देश्य पारंपरिक अनाज के गुणों को आधुनिक कॉस्मेटिक उद्योग से जोड़ना है। इसके लिए उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मिलेट रिसर्च (आइआइएमआर) हैदराबाद से प्रशिक्षण लिया है। वह दो बार संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं। हालांकि, उत्पादों के फार्मूलेशन और गुणवत्ता की जांच के लिए अलग से प्रयोगशाला परीक्षण कराए गए हैं। उनके अनुसार, उत्पादों की जांच रिपोर्ट और प्रमाणपत्र भी उपलब्ध हैं।
तीन श्रेणियों में तैयार किए उत्पाद
विमोरा नेचुरल साल्यूशन के तहत हेयर केयर श्रेणी में शैंपू, कंडीशनर और हेयर सीरम उपलब्ध हैं। स्किन केयर रेंज में फेसवाश, फेस सीरम, डे क्रीम, सनस्क्रीन और नाइट क्रीम शामिल हैं। मीनाक्षी के अनुसार, नाइट क्रीम में अश्वगंधा और मिलेट का इस्तेमाल किया गया है। बॉडी केयर श्रेणी में डिटैन साबुन, एप्सम साल्ट के विभिन्न वेरिएंट और मुल्तानी मिट्टी आधारित उत्पाद भी शामिल हैं। इनके अलावा गुलाबी मुल्तानी मिट्टी और डेड सी मड जैसे विकल्प भी तैयार किए गए हैं।
पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू
मीनाक्षी का दावा है कि उत्पादों के फार्मूलेशन तैयार करते समय उनकी स्थिरता, शेल्फ लाइफ और संभावित त्वचा प्रतिक्रिया की जांच पर ध्यान दिया गया। वह स्पष्ट करती हैं कि फिलहाल कंपनी का उत्पादन थर्ड पार्टी मैन्युफैक्चरिंग के जरिए कराया जा रहा है, जबकि फार्मूलेशन उनके अपने हैं। इन्हें पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू करने की भी तैयारी है।
असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी छोड़ शुरू किया उद्यम
मीनाक्षी वर्ष 2023 तक भोपाल के एक मैनेजमेंट कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर और एडमिनिस्ट्रेशन हेड के रूप में काम कर रही थीं। बिजनेस कम्युनिकेशन विषय में करीब दस साल का अनुभव रखने वाली मीनाक्षी ने बताया कि वर्ष 2023 में मिलेट्स को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय अभियान से उन्हें इस क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा मिली। इसके बाद उन्होंने मिलेट्स के संभावित उपयोगों को समझने के लिए प्रशिक्षण लिया और कॉस्मेटिक उत्पादों पर शोध शुरू किया।
सामाजिक कार्यों से उन्हें मिली प्रेरणा
उनके मुताबिक, इस काम में काफी पूंजी शोध और विकास पर खर्च हुई है। फिलहाल उद्यम में उनका अपना निवेश लगा है। कंपनी एमएसएमई और स्टार्टअप इंडिया में पंजीकृत है तथा उसका ट्रेडमार्क भी लिया गया है। उनकी माता राधा रानी भी कंपनी की सह-संस्थापक हैं। मीनाक्षी बताती हैं कि महिलाओं के लिए किए गए उनकी माता के सामाजिक कार्यों से भी उन्हें प्रेरणा मिली।
ऑनलाइन कारोबार, आगे खाद्य उत्पादों की तैयारी
कंपनी के उत्पाद अपनी वेबसाइट के साथ अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो और सरकारी ई-कामर्स पोर्टल जीईएम पर उपलब्ध हैं। मीनाक्षी के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से ऑनलाइन आर्डर मिल रहे हैं। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हेल्थ एंड वेलनेस इंटरनेशनल एक्सपो में भी उन्होंने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए, जहां कारोबार के नए संपर्क बने। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में उन्होंने उत्पादों में इस्तेमाल किए गए पौधों का प्रदर्शन और वितरण भी किया। अब मीनाक्षी हर्बल और खाद्य उत्पादों की नई श्रेणी शुरू करने की योजना बना रही हैं। इसके साथ ही अपनी भूमि पर औषधीय पौधों की खेती कर कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहती हैं।
मिलेट्स के अपशिष्ट से पैकेजिंग बनाने का लक्ष्य
मीनाक्षी का अगला लक्ष्य मिलेट्स की बाहरी परत और अन्य कृषि अपशिष्ट को बेकार जाने से बचाना है। वह गन्ने के अवशेष और इमली के बीज जैसे प्राकृतिक पदार्थों के साथ मिलाकर ऐसी पैकेजिंग विकसित करने पर काम कर रही हैं, जिसका इस्तेमाल भविष्य में तरल और अर्धतरल उत्पादों के लिए किया जा सके। इस दिशा में अभी शोध और विकास का काम चल रहा है।
भोजन तक सीमित न रहे मिलेट्स का इस्तेमाल
उनका कहना है कि पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग के लिए बड़े न्यूनतम आर्डर और मशीनरी की लागत चुनौती हैं। इसके लिए सरकारी सहायता और निवेश की जरूरत है। मीनाक्षी की कोशिश है कि मिलेट्स का इस्तेमाल केवल भोजन तक सीमित न रहे, बल्कि सौंदर्य प्रसाधनों और टिकाऊ पैकेजिंग के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा हों।
नित्य संदेश, परीक्षितगढ़। लीला कमेटी के तत्वावधान में परीक्षितगढ़-मेरठ मार्ग पर एक दिवसीय दशहरा मेले का आयोजन किया गया। मेले में रामलीला मंचन के अंतर्गत राम-रावण युद्ध की लीला का श्रद्धालुओं ने सराहना की।
मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि समाजसेवी विनय चौधरी एवं पूर्व चेयरमैन, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अमित मोहन टीपू ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और रामायण हमारी सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान हैं, हमें अपनी संस्कृति पर गर्व है। विनय चौधरी ने तिलक करते हुए कहा कि जीवन का आधार राम हैं तो शक्ति की पहचान हनुमान हैं।संयुक्त व्यापार मंडल अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद गर्ग ने रामचरित मानस के महत्व पर प्रकाश डाला।
कमेटी महासचिव श्यामदत्त शर्मा ने बताया कि बुधवार को मंच पर सभी कलाकारों व सहयोगियों को सम्मानित किया जाएगा।कलाकारों ने राम-रावण युद्ध का मंचन किया। रावण वध के साथ ही रावण के पुतले का दहन धूं-धूं कर किया गया। मंच संचालन अखिल विद्या सेवा ट्रस्ट अध्यक्ष विष्णु अवतार रुहेला ने किया, अध्यक्ष विद्या भूषण गर्ग ने अतिथियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख के.पी. खूंटी, महावीर गुप्ता, महेश चंद त्यागी, ब्रह्मजीत प्रजापति, भरत अग्रवाल, विकल गुर्जर, अभिषेक, राहुल शर्मा, सुंदर, गौरव तोमर, जी.डी. शर्मा, सुनील भूरे आदि मौजूद रहे।
दशहरा हमें केवल रावण के पुतले का दहन करना नहीं सिखाता, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि हमारे भीतर छिपी बुराइयों को पहचानकर उन्हें समाप्त करना ही सच्चे अर्थों में विजयादशमी मनाना है। रामायण में रावण के दस सिरों को प्रतीकात्मक रूप से मनुष्य के भीतर मौजूद दस बुराइयों से जोड़कर भी देखा जा सकता है। जब तक मनुष्य अपने भीतर की बुराइयों पर विजय प्राप्त नहीं करता, तब तक उसका वास्तविक विकास अधूरा रहता है।
अहंकार का रावण
स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ समझना।
अपनी गलती स्वीकार न करना।
दूसरों का अपमान करना।
समाधान: विनम्रता अपनाएँ, दूसरों की बात सुनें और अपनी गलतियों को स्वीकार करना सीखें।
क्रोध का रावण
छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना।
गुस्से में अपशब्द बोलना।
अपने क्रोध से दूसरों को दुख पहुँचाना।
समाधान: बोलने से पहले कुछ क्षण रुकें, गहरी साँस लें और समस्या का समाधान शांति से खोजें।
लालच का रावण
आवश्यकता से अधिक पाने की इच्छा रखना।
दूसरों के अधिकार छीनना।
धन और वस्तुओं को ही जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य मानना।
समाधान: संतोष का भाव विकसित करें, ईमानदारी से काम करें और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करें।
ईर्ष्या का रावण
दूसरों की सफलता से दुखी होना।
दूसरों की खुशियों को देखकर जलना।
किसी को आगे बढ़ते देखकर उसे रोकने का प्रयास करना।
समाधान: दूसरों की सफलता से प्रेरणा लें और अपनी क्षमताओं को विकसित करने पर ध्यान दें।
कामना और अनियंत्रित इच्छाओं का रावण
अपनी इच्छाओं को ही सबसे महत्त्वपूर्ण मानना।
दूसरों की भावनाओं और सहमति की उपेक्षा कर, अपनी इच्छा पूरी करने के लिए गलत रास्ता अपनाना बहुत गलत है।
समाधान: आत्मसंयम के साथ, दूसरों की गरिमा का सम्मान करें और अपनी इच्छाओं को नैतिकता के अनुसार दिशा दें।
झूठ का रावण
अपने स्वार्थ के लिए झूठ बोलना।
अपनी गलती छिपाने के लिए दूसरों को दोष देना।
लोगों के विश्वास को तोड़ना।
समाधान: सत्य बोलने का साहस रखें, अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करें और अपने व्यवहार में पारदर्शिता रखें।
घृणा का रावण
जाति, धर्म, भाषा, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव करना और दूसरों के प्रति नफरत रखना।
किसी व्यक्ति को उसकी पहचान के कारण कमतर समझना।
समाधान: समानता, करुणा और मानवीय गरिमा को महत्त्व दें। प्रत्येक व्यक्ति के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें।
स्वार्थ का रावण
केवल अपने लाभ के बारे में सोचना और दूसरों की परेशानियों के प्रति संवेदनहीन रहना।
अपने फायदे के लिए दूसरों का नुकसान करना।
समाधान: दूसरों की सहायता करें, अपनी जिम्मेदारियाँ निभाएँ और व्यक्तिगत लाभ के साथ सामूहिक हित का भी ध्यान रखें।
बदले की भावना का रावण
किसी की गलती को जीवनभर याद रखकर, हर अपमान का बदला लेने की इच्छा रखना भी रावण का ही एक सिर है।
पुराने विवादों को बार-बार बढ़ावा देना।
समाधान: क्षमा करना सीखें, लेकिन अपनी सीमाएँ भी निर्धारित करें। अन्याय होने पर बदला लेने के बजाय उचित और शांतिपूर्ण तरीके से न्याय प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
अन्याय और गलत कार्यों का समर्थन करने वाला रावण
गलत होते देखकर भी चुप रहना भी रावण का एक प्रतिरूप है।
अपने प्रिय व्यक्ति की गलती को सही ठहराना।
कमजोर व्यक्ति के साथ हो रहे अन्याय की अनदेखी करना।
समाधान: सत्य और न्याय का साथ दें। अन्याय का विरोध विवेकपूर्ण तरीके से करें और जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार व्यक्तियों से सहायता लेना उचित है।
कुछ और रावण, जो हमारे भीतर छिपे हो सकते हैं इन दस बुराइयों के अलावा भी कुछ ऐसी कमजोरियाँ हैं, जिन पर विजय पाना आवश्यक है:
अभिमान
दिखावा
चुगली
संकीर्ण सोच
असहिष्णुता
जिम्मेदारी से भागना
दूसरों को नियंत्रित करने की इच्छा
भेदभाव
गलत बात पर चुप्पी याद रखिए, मनुष्य की कमजोरी उसकी पहचान नहीं होती। अपनी गलती को पहचानकर स्वयं में सुधार करना ही उसकी वास्तविक शक्ति है। अपने भीतर के रावण को कैसे नष्ट करें
आत्मचिंतन: अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेना, अपनी गलती का दोष दूसरों पर डालने के बजाय उसे स्वीकार करना। गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि सुधार की पहली सीढ़ी है।
सकारात्मक सोच: हमारे विचार हमारे व्यवहार को प्रभावित करते हैं। इसलिए किसी के प्रति नकारात्मक विचार आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय उसके कारण को समझने का प्रयास करें।
अच्छे संस्कार और सही संगति: ऐसे लोगों के साथ समय बिताएँ जो ईमानदारी, संवेदनशीलता, परिश्रम और अच्छे व्यवहार को महत्त्व देते हैं।
प्रतिदिन एक बुराई पर विजय: एक ही दिन में सभी कमजोरियों को समाप्त करने का दबाव मानव जीवन में संभव नहीं। प्रतिदिन अपने व्यवहार में एक छोटा-सा सुधार करने का संकल्प लेना ही अपने भीतर के रावण का वध करना है। – शीला बड़ोदिया इंदौर (म.प्र.)