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सुभारती विश्वविद्यालय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के राष्ट्रवाद एवं राष्ट्र निर्माण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के नेताजी सुभाष चंद्र बोस पीठ एवं गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के संयुक्त तत्वावधान में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों, राष्ट्रवाद, स्वतंत्रता और राष्ट्र निर्माण की अवधारणा पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के सत्यजीत रे ऑडिटोरियम में आयोजित संगोष्ठी का मुख्य विषय “नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भारत के प्रति दृष्टिकोण : राष्ट्रवाद, स्वतंत्रता और राष्ट्र निर्माण” रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात रक्षा विशेषज्ञ एवं मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. जी.डी. बख्शी, एसएम, वीएसएम तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं आईपीएस (सेवानिवृत्त) श्री सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय और फिल्म निर्माता श्री अमलेंदु कुसुम घोष उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रितेश चौधरी ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षाविदों एवं सभी बच्चों का स्वागत करते हुए कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का व्यक्तित्व भारतीय इतिहास में साहस, त्याग, राष्ट्रप्रेम और अदम्य संकल्प का प्रतीक है। उनके विचारों पर विमर्श करना केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराना भी है।

मुख्य अतिथि मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. जी.डी. बख्शी ने अपने ओजस्वी एवं प्रभावशाली संबोधन में भारतीय प्राचीन इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जेन-जी पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा कि आजाद भारत में जन्म लेना सौभाग्य की बात है। युवाओं को यह समझना चाहिए कि स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए देशवासियों ने कितना संघर्ष और बलिदान दिया है। उन्होंने औपनिवेशिक शासन के दौरान भारतीयों के साथ किए जाने वाले अपमानजनक व्यवहार का उल्लेख करते हुए अंग्रेजों की उस मानसिकता को याद किया, जिसमें भारतीयों को अपमानित किया जाता था और सार्वजनिक स्थानों पर उनके साथ भेदभाव होता था। उन्होंने कहा कि यह इतिहास हमें स्वतंत्रता के वास्तविक मूल्य और राष्ट्रीय स्वाभिमान का बोध कराता है। डॉ. बख्शी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धेय और पूजनीय व्यक्तित्व बताते हुए उनके अदम्य साहस, सैन्य नेतृत्व, राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नेताजी के विचारों और उनके ऐतिहासिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुभारती विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय नेताजी के आदर्शों और उनके राष्ट्र निर्माण के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का सराहनीय प्रयास कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे नेताजी के इतिहास और विचारों का गंभीरता से अध्ययन करें तथा अपने ज्ञान, कौशल और सामर्थ्य का उपयोग राष्ट्रहित में करें।

विशिष्ट अतिथि एवं पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने राष्ट्र निर्माण में प्रशासनिक व्यवस्था, सामाजिक उत्तरदायित्व, राष्ट्रीय एकता और नागरिक कर्तव्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस आज भी युवाओं के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत हैं। वर्तमान समय में जब युवा पीढ़ी के सामने अनेक चुनौतियां और दिशाभ्रम की स्थितियां हैं, तब नेताजी का जीवन उन्हें स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का मार्ग दिखाता है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की शक्ति, चरित्र निर्माण और आत्मविश्वास से ही राष्ट्र का भविष्य निर्धारित होता है। उन्होंने सुभारती विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय युवा पीढ़ी में चरित्र निर्माण, राष्ट्रीय चेतना और सकारात्मक सोच विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है।

विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज ने अपने संदेश में कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन साहस, त्याग, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च समर्पण का प्रतीक है। उनका व्यक्तित्व आज भी युवा पीढ़ी को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और देश के प्रति अटूट निष्ठा की प्रेरणा देता है। उन्होंने विशेष रूप से कृतज्ञता (ग्रेटिट्यूड) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हमें उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान के प्रति सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए, जिनके संघर्ष और बलिदान के कारण आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं। उन्होंने मुख्य अतिथि मेजर जनरल डॉ. जी.डी. बख्शी का सुभारती विश्वविद्यालय परिसर में आगमन पर हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व और देश के प्रति समर्पण की भावना विकसित करना भी है। ऐसी संगोष्ठियां युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ती हैं और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती हैं।


विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विनय कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के व्यक्तित्व और विचारों को समझना सागर की गहराइयों से अनमोल मोती निकालने के समान है। उनके विचारों में राष्ट्र के प्रति समर्पण, अदम्य साहस, सामाजिक समरसता और अखंड भारत की परिकल्पना समाहित है। उन्होंने कहा कि यदि अखंड भारत के स्वतंत्रता दिवस की ऐतिहासिक चेतना को स्मरण करना है तो 21 अक्टूबर का दिन विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि नेताजी का सपना एक ऐसे भारत का था, जो आत्मनिर्भर, संगठित, सशक्त और सामाजिक एकता के सूत्र में बंधा हो। आज के सामाजिक, शैक्षणिक और राष्ट्रीय परिदृश्य में उनके विचार पहले से भी अधिक प्रासंगिक हैं।


फिल्म निर्माता अमलेंदु कुसुम घोष ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस पीठ को अपनी शुभकामनाएं देते हुए सुभारती विश्वविद्यालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्र प्रथम और सर्व प्रथम की भावना को केंद्र में रखकर कार्य कर रहा है। उन्होंने ऑडिटोरियम में उपस्थित जेन-जी विद्यार्थियों से विशेष अपील करते हुए कहा कि युवा अपनी दिशा और लक्ष्य से न भटकें, बल्कि अपनी प्रतिभा, ऊर्जा और क्षमता का उपयोग देशहित में करें। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा देश के विकास में अपना योगदान देने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान लेखक प्रो. अशोक त्यागी द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारत की क्रांतिकारी चेतना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ का विमोचन भी किया गया। पुस्तक के माध्यम से भारतीय क्रांतिकारी चेतना और आधुनिक तकनीकी विकास के बीच संबंधों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर मिला। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बदलते दौर में राष्ट्र, समाज और शिक्षा के समक्ष उभरती संभावनाओं एवं चुनौतियों पर विचार-विमर्श का मार्ग प्रशस्त किया गया। कार्यक्रम के अंत में रामप्रकाश तिवारी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षाविदों, आयोजकों एवं मीडिया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावशाली संचालन डॉ. प्रीति सिंह ने किया।

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