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शोध को नई उड़ान: दिल्ली विश्वविद्यालय ने सीसीएसयू के 50 शिक्षकों-शोधार्थियों को कराया शैक्षणिक भ्रमण

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ी है। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के 40 शोधार्थियों एवं 10 शिक्षकों के 50 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण किया। भारत सरकार की अनुसंधान एवं विकास संबंधी ANRF-PAIR परियोजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने सीसीएसयू के पूरे प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करने के साथ ही इस शैक्षणिक भ्रमण का पूर्ण वित्तीय प्रायोजन (Fully Funded Academic Visit) song किया। इसका उद्देश्य सीसीएसयू के शोधार्थियों एवं शिक्षकों को दिल्ली विश्वविद्यालय की उन्नत शोध सुविधाओं, आधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक उपकरणों और विषय विशेषज्ञों से जोड़ना तथा दोनों विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक एवं अनुसंधान सहयोग को नई दिशा देना था।

यह भ्रमण केवल एक सामान्य शैक्षणिक यात्रा नहीं, बल्कि देश में उच्च शिक्षण संस्थानों की शोध क्षमता विकसित करने के लिए शुरू की गई ANRF-PAIR परियोजना के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने की महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना में दिल्ली विश्वविद्यालय को हब (Hub) तथा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय को स्पोक (Spoke) संस्थान के रूप में जोड़ा गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से दिल्ली विश्वविद्यालय अपनी शोध विशेषज्ञता, आधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक उपकरणों एवं उपलब्ध अनुसंधान संसाधनों के जरिए सीसीएसयू की शोध क्षमताओं को विकसित करने में सहयोग कर रहा है। वहीं सीसीएसयू के शिक्षक एवं शोधार्थी इस साझेदारी के माध्यम से नई शोध तकनीकों, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उन्नत अनुसंधान सुविधाओं का लाभ उठाकर अपने शोध कार्य को आगे बढ़ा सकेंगे।

क्या है ANRF-PAIR परियोजना, कैसे काम करता है हब-स्पोक मॉडल

ANRF का पूरा नाम अनसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (Anusandhan National Research Foundation) है। इसके अंतर्गत संचालित PAIR का पूरा नाम Partnerships for Accelerated Innovation and Research है। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य देश के विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच शोध संबंधी असमानताओं को कम करना, अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाना और संस्थागत स्तर पर शोध क्षमता का विकास करना है।

इस परियोजना के अंतर्गत हब-स्पोक मॉडल अपनाया गया है। इसमें हब संस्थान के रूप में चयनित विश्वविद्यालय अपनी विशेषज्ञता, आधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक उपकरणों, शोध नेटवर्क और अनुभवी शिक्षकों के माध्यम से स्पोक संस्थान को सहयोग प्रदान करता है। दूसरी ओर स्पोक संस्थान अपने शिक्षकों, शोधार्थियों और उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों के माध्यम से अनुसंधान गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल एक संस्थान से दूसरे संस्थान तक शोध सुविधाओं की पहुंच बनाना नहीं, बल्कि दोनों के बीच दीर्घकालिक शोध साझेदारी विकसित करना है।

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के लिए यह साझेदारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके माध्यम से विभिन्न विज्ञान विषयों के शोधार्थियों को दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों एवं उन्नत शोध सुविधाओं के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इससे संयुक्त शोध परियोजनाओं, अंतर्विषयक अनुसंधान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण शोध पत्रों के प्रकाशन की संभावनाओं को विस्तार मिलेगा।

दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से तैयार कार्यक्रम के अनुसार प्रतिनिधिमंडल का भ्रमण विश्वविद्यालय के नॉर्थ एवं साउथ कैंपस में आयोजित किया गया। नॉर्थ कैंपस में शोधार्थियों को उनकी संबंधित शोध रुचियों एवं विषयगत क्षेत्रों के अनुसार समूहों में विभाजित किया गया। यहां भौतिक विज्ञान, प्राणी विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं पर्यावरण अध्ययन विभागों की प्रयोगशालाओं का भ्रमण कराया गया। प्रतिभागियों ने इन विभागों में संचालित अनुसंधान गतिविधियों, प्रयोगात्मक कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक उपकरणों और उपलब्ध शोध सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने यूनिवर्सिटी साइंस इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर (USIC) का भ्रमण किया। यहां शोध में उपयोग होने वाले आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों एवं अनुसंधान संबंधी तकनीकी सुविधाओं की जानकारी दी गई। शोधार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों और आधुनिक परीक्षण तकनीकों का उपयोग किस प्रकार उच्च स्तरीय अनुसंधान में किया जाता है। इससे उन्हें अपने शोध कार्य में उपलब्ध तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग और संभावित सहयोग के नए अवसरों को समझने में मदद मिली।

दोपहर बाद प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस का भी शैक्षणिक भ्रमण किया। यहां अकादमिक एवं अनुसंधान सुविधाओं का अवलोकन कराया गया। इस प्रकार एक ही दिन में प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय के दोनों प्रमुख परिसरों में उपलब्ध शोध एवं शैक्षणिक संसाधनों से परिचित होने का अवसर मिला।

इस भ्रमण में सीसीएसयू के भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, सूक्ष्मजीव विज्ञान, प्राणी विज्ञान, जेनेटिक्स एवं प्लांट ब्रीडिंग सहित विभिन्न विज्ञान विषयों के शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने सहभागिता की। दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के साथ संवाद के दौरान प्रतिभागियों को अपने शोध विषयों से संबंधित नई तकनीकों, अनुसंधान की आधुनिक प्रवृत्तियों, प्रयोगशाला सुविधाओं तथा वैज्ञानिक कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि विभिन्न विषयों के शोधार्थियों को एक साझा अकादमिक मंच उपलब्ध हुआ। इससे अंतर्विषयक अनुसंधान (Interdisciplinary Research) को प्रोत्साहन मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन जैसे विषयों के बीच तकनीकी एवं वैज्ञानिक सहयोग से नई शोध संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।

इस प्रकार के अकादमिक संपर्क से सीसीएसयू के शोधार्थियों को केवल अपने विषय तक सीमित रहने के बजाय दूसरे विषयों के विशेषज्ञों के साथ मिलकर शोध समस्याओं के समाधान तलाशने का अवसर मिलेगा। भविष्य में दोनों विश्वविद्यालयों के शिक्षक एवं शोधार्थी संयुक्त शोध पत्र तैयार करने, अनुसंधान परियोजनाएं विकसित करने और वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की दिशा में भी सहयोग कर सकेंगे।

दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से ANRF-PAIR परियोजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रो. राज किशोर शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी एवं अकादमिक समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में डीन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा चेयरमैन, रिसर्च काउंसिल भी हैं। उनके साथ प्रो. हाशमी, प्रो. शैलेंद्र, डॉ. उपदेश एवं डॉ. प्राक्षी सहित दिल्ली विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों एवं विशेषज्ञों ने कार्यक्रम में सहयोग किया।

सीसीएसयू की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ANRF-PAIR परियोजना के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर एवं निदेशक, अनुसंधान एवं विकास प्रो. बीरपाल सिंह ने किया। भ्रमण के समन्वय में भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल के. यादव, रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. नाजिया तरन्नुम, सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग की डॉ. अंजलि मलिक, वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. ईश्वर तथा प्राणी विज्ञान विभाग के डॉ. दुष्यंत के. चौहान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सीसीएसयू के निदेशक, अनुसंधान एवं विकास तथा ANRF-PAIR परियोजना के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर प्रो. बीरपाल सिंह ने कहा कि कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और अकादमिक सहयोग को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है। ANRF-PAIR जैसी राष्ट्रीय स्तर की परियोजनाएं विश्वविद्यालयों को अपनी शोध क्षमता विकसित करने और देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर काम करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा सीसीएसयू के 40 शोधार्थियों एवं 10 शिक्षकों को आमंत्रित करना और पूरे शैक्षणिक भ्रमण का फुली फंडेड प्रायोजन करना दोनों विश्वविद्यालयों के बीच मजबूत अकादमिक सहयोग एवं सकारात्मक दृष्टिकोण का परिचायक है। इस भ्रमण का उद्देश्य केवल प्रयोगशालाओं का अवलोकन कराना नहीं, बल्कि शोधार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों, उन्नत अनुसंधान तकनीकों और अनुभवी विशेषज्ञों से जोड़ना है। इससे उन्हें अपने शोध कार्य को अधिक गुणवत्तापूर्ण बनाने और नई शोध संभावनाओं को समझने में सहायता मिलेगी।

प्रो. सिंह ने कहा कि हब-स्पोक मॉडल के माध्यम से शोध सुविधाओं, विशेषज्ञता और वैज्ञानिक ज्ञान का आदान-प्रदान संभव हो रहा है। इससे भविष्य में दोनों विश्वविद्यालयों के बीच संयुक्त शोध परियोजनाओं, गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशनों और अंतर्विषयक अनुसंधान को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कुलपति के मार्गदर्शन में इस प्रकार की पहल चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की शोध क्षमता को और मजबूत करने के साथ उसके शिक्षकों एवं शोधार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक होगी।

ANRF-PAIR परियोजना के अंतर्गत दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ विकसित यह साझेदारी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस शोध नेटवर्क से सीसीएसयू के शोधार्थियों को आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन का लाभ मिलने के साथ विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार, संयुक्त प्रकाशन और नई शोध परियोजनाओं की संभावनाओं को विस्तार मिलेगा। यह पहल विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति को मजबूत करने और राष्ट्रीय शोध परिदृश्य में उसकी सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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