
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। परंपरागत माटी कला को बढ़ावा और कुम्हारों को सशक्त बनाने के लिए राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में सात दिवसीय माटी कला मेले का आयोजन किया जा रहा है। मेले की शुरुआत एक नवंबर से हो जाएगी, जबकि इसका औपचारिक उद्घाटन 2 नवंबर को होगा। मेला पूरी तरह निशुल्क है, जिसमें कारीगरों को स्टॉल के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा।
यह जानकारी परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने दी। उन्होंने बताया कि मेले में कुल 30 स्टॉलों को जगह दी गई है। इनमें मेरठ के अलावा बुलंदशहर, हापुड़, गाजियाबाद, मथुरा और आगरा से कुम्हार अपने उत्पाद लेकर पहुंच रहे हैं। मेले में मिट्टी के दीये, बर्तन, सुराही, गुल्लक और सजावटी उत्पादों के विशेष स्टॉल लगेंगे। दीपावली के मद्देनजर मिट्टी के दीयों और सजावटी सामानों को खास तवज्जो दी गई है। इसके अलावा बनारसी साड़ी सहित अन्य हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे, ताकि मेले में विविधता बनी रहे। मेले का मुख्य उद्देश्य ‘वोकल फॉर लोकल’ को मजबूती देना और मिट्टी से जुड़े कारीगरों को सीधा बाजार उपलब्ध कराना है। उन्होंने अपील की कि मेरठवासी अधिक से अधिक संख्या में मेले में पहुंचकर स्थानीय कुम्हारों के उत्पादों को खरीदें और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में सहयोग करें।
माटीकला योजना से मिल रहा सहारा
अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने बताया कि माटीकला योजना के तहत जिले के कुम्हारों को लाभार्थी के रूप में पंजीकृत किया गया है। योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा कुम्हारों को मिट्टी गूंथने और बर्तन बनाने के लिए इलेक्ट्रिक चाक मुफ्त में उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनकी मेहनत और समय दोनों की बचत हो रही है।
नजीबाबाद में 15 दिन का प्रशिक्षण, रोज 250 रुपये
कारीगरों को हुनरमंद बनाने के लिए नजीबाबाद स्थित शिल्पकारी प्रशिक्षण केंद्र में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां कारीगरों को मिट्टी से नई डिजाइन और आधुनिक तकनीक से उत्पाद बनाना, साथ ही आकर्षक पैकेजिंग करना सिखाया जाता है। 15 दिन तक चलने वाले इस प्रशिक्षण के दौरान सरकार द्वारा कारीगरों को 250 रुपये प्रतिदिन मानदेय के रूप में दिए जाते हैं।


