
- शोभित विश्वविद्यालय की CXO टॉक सीरीज़ के अंतर्गत आयोजित मास्टर क्लास में विद्यार्थियों को मिला व्यावहारिक ज्ञान और पेशेवर दृष्टिकोण
डा. अभिषेक डबास
नित्य संदेश, मोदीपुरम। बदलते व्यावसायिक परिवेश में सफलता केवल किताबी ज्ञान और तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि अनिश्चित परिस्थितियों में सही निर्णय लेने, तार्किक ढंग से सोचने और चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है। इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए शॉभित विश्वविद्यालय, मेरठ के NICE स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज द्वारा विश्वविद्यालय की सतत शैक्षणिक पहल ‘शोभित विश्वविद्यालय CXO टॉक सीरीज़’ के अंतर्गत ‘डिसीजन-मेकिंग अंडर अनसर्टेन्टी’ विषय पर एक विशेष मास्टर क्लास आयोजित की गई।
यह CXO टॉक सीरीज़ विश्वविद्यालय की एक निरंतर चलने वाली महत्त्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य उद्योग जगत के अनुभवी विशेषज्ञों, नेतृत्वकर्ताओं और पेशेवरों को विद्यार्थियों के साथ जोड़कर अकादमिक ज्ञान तथा व्यावहारिक अनुभव के बीच सार्थक सेतु स्थापित करना है। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योग की वास्तविक चुनौतियों, नेतृत्व के दृष्टिकोण और बदलते कार्यक्षेत्र की आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी एवं व्यावसायिक प्रबंधन के क्षेत्र की अनुभवी विशेषज्ञ तान्या गुप्ता, सीनियर टेक्निकल बिजनेस एनालिस्ट, प्रोडक्ट ओनर, लेखिका, वक्ता एवं मेंटर ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वास्तविक पेशेवर जीवन में कई बार निर्णय लेने के लिए सभी आवश्यक जानकारियाँ उपलब्ध नहीं होतीं। ऐसी परिस्थितियों में तथ्यों का विश्लेषण, तार्किक चिंतन, संभावित जोखिमों का आकलन और उपलब्ध विकल्पों की समीक्षा प्रभावी निर्णय लेने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सुश्री गुप्ता ने प्रौद्योगिकी परियोजनाओं, एजाइल कार्यप्रणाली और परियोजना प्रबंधन से जुड़े अपने अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों को समझाया कि अनिश्चितता को केवल चुनौती के रूप में देखने के बजाय उसे सीखने, नवाचार करने और नए अवसर तलाशने के रूप में भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने आत्मविश्वास, अनुकूलनशीलता और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता को पेशेवर जीवन की आवश्यक दक्षताओं के रूप में रेखांकित किया।
विद्यार्थियों के लिए यह मास्टर क्लास केवल एक व्याख्यान नहीं, बल्कि वास्तविक व्यावसायिक परिस्थितियों को समझने और अपने निर्णय लेने के दृष्टिकोण को विकसित करने का अवसर रही। सत्र ने उन्हें यह समझने में मदद की कि प्रभावी नेतृत्व के लिए केवल सही उत्तर जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही प्रश्न पूछना, उपलब्ध जानकारी का विवेकपूर्ण उपयोग करना और अपने निर्णयों की जिम्मेदारी लेना भी आवश्यक है। इस प्रकार के संवाद विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा से आगे बढ़कर कार्यक्षेत्र की वास्तविक अपेक्षाओं के लिए तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. के. त्यागी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में आलोचनात्मक चिंतन, आत्मविश्वास और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता के महत्त्व को रेखांकित किया। IQAC के निदेशक प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार गुप्ता ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ व्यावहारिक अनुभव और उद्योग जगत से जुड़ाव को विद्यार्थियों की व्यावसायिक दक्षता मजबूत करने के लिए आवश्यक बताया। NICE स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज की निदेशक प्रो. (डॉ.) क्षमता चौहान ने प्रबंधन शिक्षा को उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने तथा विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने में इस प्रकार की पहलों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

CXO टॉक सीरीज़ के प्रोफेसर-इन-चार्ज एवं निदेशक यूनिवर्सिटी ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट डॉ. अभिषेक डबास ने इस पहल के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उद्योग जगत के अनुभवी विशेषज्ञों के साथ संवाद विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान, नवीन दृष्टिकोण और पेशेवर अनुभव प्रदान करता है। इस प्रकार की पहल अकादमिक शिक्षा को वास्तविक कार्यक्षेत्र की आवश्यकताओं से जोड़ने के साथ विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक सोच, समस्या-समाधान, नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में सहायक है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नेहा यजुर्वेदी द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के निदेशकगण एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे। प्रमुख उपस्थितजनों में डॉ. नेहा वशिष्ठ, निदेशक, आउटरीच; डॉ. संदीप कुमार, निदेशक, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग; डॉ. प्रियंका शर्मा; राधा; डॉ. प्रीति गर्ग; डॉ. नवनीश त्यागी तथा डॉ. एवगेनिया सहित अन्य संकाय सदस्य शामिल रहे।


