
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज के अंतर्गत सुभारती कॉलेज ऑफ एलाइड एंड हेल्थ केयर द्वारा सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) ‘भूमि पर जीवन’ के तहत वृक्षारोपण जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के महत्व तथा प्रकृति के अनुकूल जीवन शैली अपनाने के प्रति जागरूक करना था। सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को हरित पर्यावरण के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान दो ज्ञानवर्धक प्रस्तुतियां दी गईं। पहली प्रस्तुति एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर मोहम्मद हाशिम ने दी। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पेड़-पौधे पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने, वायु की गुणवत्ता सुधारने तथा जैव विविधता को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने और अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
दूसरी प्रस्तुति बीएससी ओटीटी-एचए तृतीय वर्ष के विद्यार्थी सुधांशु तिवारी ने दी। उन्होंने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल पर जानकारी साझा करते हुए वृक्षारोपण को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल करना और उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव विकसित करने तथा पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का छात्रा आयुषी ने किया। सत्र में महाविद्यालय के संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्रों के विस्तार और जैव विविधता को बचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया। प्रतिभागियों को समझाया गया कि छोटे-छोटे पर्यावरण-अनुकूल कदम भी दीर्घकाल में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
कार्यक्रम का समन्वयन संयम ठाकुर ने महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पंकज किशोर मिश्रा के मार्गदर्शन में किया। इस जागरूकता सत्र ने विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों को समझने और सतत विकास की दिशा में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्वच्छ, स्वस्थ और हरित भविष्य के निर्माण के लिए सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है


