
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। बंकिम चंद्र की कलम से निकला वंदे मातरम महज एक गीत नहीं बल्कि हर भारतीय की नसों में दौड़ता हुआ एक लघु भारत है जिसने स्वतंत्रता संग्राम में हर भारतवासी को अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा कर दिया था इस वंदे मातरम गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर आज दशहरा मैदान पर स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए वंदे मातरम थीम पर देशभक्ति के गीतों पर आधारित नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय एवं लोक संस्कृति मंच के संयुक्त तत्वाधान में हुआ।
जानकारी देते हुए लोक संस्कृति मंच के संयोजक एवं लोकप्रिय सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि आज इंदौर के 14 स्कूलों से 400 से अधिक विद्यार्थी एवं 41 शिक्षक इस प्रतियोगिता में शामिल हुए। जिन्होंने राष्ट्र गीत को सिर्फ मिट्टी को नमन करना नहीं माना बल्कि उस मिट्टी में जन्में सभी महाशक्तियों महानायकों को प्रणाम किया जिसमें स्वतंत्रता की चिंगारी इस देश में सुलगाई थी और देश को स्वतंत्र करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ।जब वैष्णव अकादमी के विद्यार्थियों ने ऑपरेशन सिंदूर के द्वारा देश की एयरफोर्स की ताकत का एहसास कराया तो देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। सरफरोशी की तमन्ना हमारे दिल में है देखना है जोर कितना बाजुए का कातिल में है के बोल से गूंजती प्रस्तुति में महानायको की भगत सिंह ,चंद्रशेखर आजाद बिस्मिल ,झांसी की रानी सब की याद दिला दी ।
दीपक लवंगडे ने बताया कि दिल्ली पब्लिक स्कूल द्वारा सफेद धवल वस्त्रो में वंदे मातरम पर प्रस्तुति सब का मन मोहकर देश के गौरव का बखान कर गई ।एमराल्ड हाईट स्कूल के बच्चों ने संस्कृति अध्यात्म और देश प्रेम तीनों को एक माला में पिरोकर भारत दर्शन भरतनाट्यम योग और आर्मी की चपलता दर्शाकर कराया। वहीं रानी लक्ष्मीबाई के साथ नारी शक्ति और उसका एंपावरमेंट का एहसास कराती प्रस्तुति सबकी तालियां बटोर गई। तिरंगे की शान को एकता और अनेकता के मंत्र में सैंट नॉरबर्ट के विद्यार्थियों ने भारत के वैभव व गौरव के प्रतीकों से प्रस्तुत किया ।
अशोक स्तंभ के समक्ष लहराते तिरंगे को देखना एक अद्भुत अनुभव रहा जिसे पेश किया सिक्का सीनियर स्कूल के विद्यार्थियों ने इस नृत्य में इन्होंने पूरे भारत भर का भ्रमण कराया साथ ही भारत की न्यायशीलता की कहानी का एहसास कराया ।वहीं वंदे मातरम की प्रस्तुति रियान इंटरनेशनल स्कूल के बच्चों ने दी एडवांस एकेडमी के बच्चों ने आधुनिकता के और प्राचीन संस्कृति के फ्यूजन का जो नृत्य पारंपरिक पोशाखो के साथ किया एक अद्भुत नृत्य रहा।
संकल्प वर्मा ने बताया कि शिल्प मेले में दीपावली पर घर को सजाने हेतु कई प्रकार के शिल्पा एवं डेकोरेटिव आइटम उपलब्ध है जिसमें कुशन कवर बेडशीट झूमर लाइटिंग आर्ट पेंटिंग आदि. कार्यक्रम के अंत में पुरस्कारों की घोषणा की गई निर्णायक आशा अग्रवाल, रुचिता बाहेती एवं मेघा शर्मा थी। इसमें प्रथम पुरस्कार 51 हजार द्वितीय पुरस्कार 21 हजार तृतीय पुरस्कार 11000 एवं दो सांत्वना पुरस्कार ₹5000 के दिए गए । 31 अक्टूबर को महाविद्यालय छात्र-छात्राओं के लिए सांस्कृतिक नृत्य प्रतियोगिता होगी जो शाम 7:00 बजे शुरू होगी शिल्प मेला 4:00 बजे प्रारंभ होगा।


