HomeUncategorizedमनीषा शर्मा को अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) मिली

मनीषा शर्मा को अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) मिली

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। मनीषा शर्मा को उनकी उच्च शिक्षा, विशेष रूप से 4 साल के पीएचडी शोध कार्य के लिए एक अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) मिली है। यह छात्रवृत्ति चेक गणराज्य (यूरोपीय संघ का एक देश, जो जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से 400 किमी दूर है) के प्राग स्थित ‘चेक टेक्निकल यूनिवर्सिटी’ द्वारा दी गई है। मनीषा ने हाल ही में मेरठ की CCS यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग से M.Sc. (भौतिकी) पूरी की है और अपना मास्टर प्रोजेक्ट प्रो. संजीव कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में पूरा किया है। 3 चरणों के इंटरव्यू को पास करने के बाद, दुनिया भर के 100 छात्रों में से भारत से चुनी जाने वाली वह एकमात्र उम्मीदवार थीं। यह मेरठ की CCS यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग के लिए गर्व का क्षण है। उन्हें 4 साल तक हर महीने 1,20,000/- रुपये की छात्रवृत्ति (स्टाइपेंड) मिलेगी।

उन्होंने पर्यावरण सुधार (environmental remediation) के लिए एक बेहतरीन प्रोजेक्ट तैयार किया, जो उनके इंटरव्यू के तीसरे चरण को पास करने में एक बड़ा मददगार साबित हुआ। उन्होंने एल्सेवियर (Elsevier), आईओपी (IOP), एसीएस (ACS), विली (Wiley) और आरएससी (RSC) जैसे वैश्विक प्रकाशकों के साथ 7 रिसर्च और रिव्यू आर्टिकल प्रकाशित किए हैं। इनमें ‘मटेरियल्स टुडे फिजिक्स’ (इम्पैक्ट फैक्टर = 9.7), ‘मटेरियल्स टुडे सस्टेनेबिलिटी’ (इम्पैक्ट फैक्टर = 9.9), ‘एसीएस एप्लाइड मैटेरियल्स एंड इंटरफेस’ (इम्पैक्ट फैक्टर = 8.9) और ‘एसीएस एप्लाइड नैनो मैटेरियल्स’ (इम्पैक्ट फैक्टर = 6.3) जैसे जर्नल शामिल हैं। उन्होंने अपना प्रोजेक्ट और रिसर्च/रिव्यू आर्टिकल प्रो. संजीव कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में तैयार किए हैं। प्रो. शर्मा के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग लेने वालीं, वे उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाली पांचवीं छात्रा हैं।

उस प्रोजेक्ट में ऐसी क्या खास बात थी, जिसके कारण उसे यूरोप में आगे की पढ़ाई के लिए चुना गया?

उन्होंने पर्यावरण से CO2 को कम करने और उसे गैर-विषैले अणुओं तथा यूरिया में बदलने पर काम किया। उन्होंने बताया कि किस तरह हानिकारक उत्सर्जन को कम किया जा सकता है और ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने फोटोकैटालिसिस, फोटोइलेक्ट्रोकैटालिसिस और बायोकैटालिसिस का उपयोग करके हानिकारक उत्सर्जन को कम करने का सुझाव दिया और इस दिशा में काम किया। मनीषा शर्मा ऊर्जा के वैकल्पिक समाधान खोजने की दिशा में काम करेंगी और ऊर्जा उत्पादन/प्राप्ति के लिए प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर काम करेंगी।

Figure of CO2

मनीषा शर्मा ने कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला को अच्छे से समझाया कि चेक गणराज्य में उच्च शिक्षा का यह मुकाम कैसे हासिल किया जा सका, और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रो. संगीता शुक्ला ने मनीषा शर्मा को सलाह दी कि यूरोप में शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्हें भारत वापस आना चाहिए और युवा पीढ़ी को प्रशिक्षित करना चाहिए। मनीषा को रिसर्च डायरेक्टर प्रो. बीर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. अनुज कुमार, प्रो. अनिल मलिक और अन्य फैकल्टी सदस्यों से भी आशीर्वाद और शुभकामनाएं मिलीं।

Share on Blogger
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Facebook Page

Most Popular

Recent Comments