
- 50 से अधिक परिवार एक मंच पर जुटेंगे, विशेषज्ञों के साथ होगा सीधा संवाद
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्तन कैंसर केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि मरीज और उसके पूरे परिवार के लिए एक लंबा संघर्ष है। इसी संघर्ष की वास्तविक चुनौतियों और समाधान पर मंथन के लिए कल 31 अक्टूबर को मेरठ में ‘मंथन 2026 – स्तन कैंसर समुदाय सम्मेलन’ का आयोजन किया जा रहा है।
यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्तन कैंसर से प्रभावित मरीजों और उनके परिवारों का सबसे बड़ा सामुदायिक जुटान होगा। सम्मेलन का आयोजन प्रशस्ति (Prashasti – Breast Cancer Community) एवं BRENDOS-WUP के तत्वावधान में, न्यूटिमा हॉस्पिटल एवं BENS सुपर-स्पेशियलिटी क्लिनिक के स्तन एवं एंडोक्राइन सर्जरी विभाग द्वारा किया जा रहा है। इस पहल के सूत्रधार डॉ. सुधि ए. कम्बोज, कंसल्टेंट एवं विभागाध्यक्ष, स्तन एवं एंडोक्राइन सर्जरी हैं।
मुख्य कार्यक्रम :
दिनांक : 31 अक्टूबर 2026, शनिवार
समय : प्रातः 10:00 बजे
स्थान : IMA हॉल, बच्चा पार्क, मेरठ
सम्मेलन की मुख्य विशेषताएं :
1. 50 से अधिक परिवारों का जुटान : पश्चिमी यूपी के 50 से अधिक स्तन कैंसर मरीज और उनके परिवार एक साझा मंच पर एकत्रित होंगे। यह केवल मेडिकल कॉन्फ्रेंस नहीं, बल्कि उन लोगों का मंच है जिन्होंने इस लड़ाई को स्वयं जिया है।
2. मरीजों और विशेषज्ञों के बीच सीधा संवाद : कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पैनल डिस्कशन होगा, जिसमें मरीज अपने वास्तविक अनुभव, उपचार में आई कठिनाइयां, देरी से निदान, आर्थिक व सामाजिक भ्रांतियां साझा करेंगे।
3. देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल : कार्यक्रम में KGMU व SGPGIMS लखनऊ, राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट सहित दिल्ली, मुंबई और असम के प्रमुख कैंसर केंद्रों के विशेषज्ञ ऑनलाइन एवं ऑफलाइन जुड़ेंगे। पश्चिमी यूपी की स्थिति की तुलना मुंबई और असम से कर बेहतर समाधान तलाशे जाएंगे।
4. प्रतिभा और हौसले को मिलेगा मंच : प्रशस्ति समुदाय के सदस्यों द्वारा विशेष डांस और ड्रामा प्रस्तुत किए जाएंगे, तथा संघर्ष में साहस की मिसाल बने मरीजों का सम्मान भी किया जाएगा।
इस संबंध में आज न्यूटिमा हॉस्पिटल में प्री-इवेंट प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।
डॉ. सुधि ए. कम्बोज ने कहा, “मंथन 2026 का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि उन मरीजों की आवाज को सुनना है, जिनकी समस्याएं अक्सर चिकित्सा चर्चाओं में पीछे रह जाती हैं। जब मरीज, उनके परिवार और विशेषज्ञ एक साथ बैठकर संवाद करेंगे, तभी उपचार में आने वाली वास्तविक बाधाओं को समझ पाएंगे।”
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