
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज मामले में आरोपी विकास को जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति समीर जैन ने याची अधिवक्ता सुनील चौधरी की दलीलें सुनने के बाद मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए इसे प्रथम दृष्टया ‘किशोरी प्रेम’ (एडोलेसेंट लव) का मामला माना है।
पीड़िता के पिता ने 13 फरवरी 2026 को परतापुर थाने में आरोपी विकास (20) निवासी ग्राम अचरौड़ा के विरुद्ध अपनी 15 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और शारीरिक संबंध बनाने का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।अधिवक्ता सुनील चौधरी ने बताया कि स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता की उम्र 16 वर्ष थी और पीड़िता ने अपने बयानों में स्वीकार किया था कि वह अपनी मर्जी से पिछले चार साल से जान-पहचान वाले आरोपी के साथ गई थी, दोनों ने मंदिर में शादी कर ली थी और पति-पत्नी की तरह रहे थे। मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान में पीड़िता ने स्पष्ट कहा था कि शादी के बाद वह अपनी सास के साथ सोती थी और आरोपी ने उसके साथ कभी कोई शारीरिक संबंध नहीं बनाए।
अदालत के समक्ष यह तथ्य भी आया कि दोनों के बीच प्रेम प्रसंग था और इससे पहले भी वर्ष 2025 में पीड़िता दो बार आरोपी के साथ भाग चुकी थी, जिस पर पिता ने दो एफआईआर दर्ज कराई थीं और आरोपी उनमें पहले से जमानत पर था। राज्य सरकार और विपक्षी के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया।हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता भले ही करीब 16 वर्ष की थी, लेकिन समग्र परिस्थितियां ‘किशोरी प्रेम’ का मामला दर्शाती हैं।
आरोपी 10 अप्रैल 2026 से छह माह से अधिक समय से जेल में है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, ऐसे में जमानत याचिका रोकी नहीं जानी चाहिए। अदालत ने गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना एक निजी मुचलके और दो जमानतदारों पर आरोपी को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।


