
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के डॉक्टरों ने हार्ट अटैक और तीनों कोरोनरी आर्टरीज़ में गंभीर ब्लॉकेज से पीड़ित 37-वर्षीय युवक का सफल उपचार किया, मरीज को ट्रिपल वेसल कोरोनरी आर्टरी डिजीज थी, जिसमें हार्ट को ब्लड सप्लाई करने वाली तीनों मेन आर्टरीज़ ब्लॉक्ड हो जाती हैं। इसके अलावा, मरीज के हार्ट की पंपिंग क्षमता भी काफी कम हो गई थी और उसे पहले से डायबिटीज होने का पता नहीं था। इन कॉम्प्लीकेशन्स को देखते हुए हार्ट तक ब्लड सप्लाई रीस्टोर करने के लिए तत्काल कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG) सर्जरी की आवश्यकता पड़ी।
सौरभ वार्ष्णेय, जो एक युवा कामकाजी व्यक्ति हैं, सीने में हाल ही में शुरू हुए दर्द की शिकायत के साथ मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज पहुंचे। इससे पहले उनका एक अन्य चिकित्सा केंद्र में परीक्षण किया गया था, जहां उन्हें एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम का पता चला। यह हार्ट की मांसपेशियों तक ब्लड सप्लाई कम होने के कारण होने वाली एक गंभीर स्थिति है, जिसमें हार्ट अटैक भी शामिल है। एक अन्य स्थानीय हॉस्पिटल में की गई कोरोनरी एंजियोग्राफी में हार्ट की तीनों मेन आर्टरीज़ में गंभीर ब्लॉकेज की पुष्टि हुई। इसके बाद उन्हें तत्काल बाईपास सर्जरी कराने की सलाह दी गई और बेहतर उपचार के लिए मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज की कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) टीम के अंतर्गत भर्ती किया गया।
इस मामले पर बात करते हुए मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर – डॉ. वैभव मिश्रा, ने कहा, “यह मामला दर्शाता है कि कम उम्र में भी कोरोनरी आर्टरी डिजीज कितनी गंभीर हो सकती है। मरीज के हार्ट की तीनों मेन आर्टरीज़ में गंभीर ब्लॉकेज थे, हार्ट की पंपिंग क्षमता काफी कम हो गई थी और डायबिटीज अनियंत्रित था। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए तत्काल सर्जरी करना आवश्यक था। डायबिटीज हार्ट रोग का एक प्रमुख जोखिम कारक है और कई बार इसके कारण हार्ट संबंधी समस्याओं के सामान्य लक्षण भी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आते।
सर्जरी के दौरान डॉक्टरों की टीम ने कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG) प्रक्रिया के तहत तीन ग्राफ्ट का इस्तेमाल कर ब्लॉक्ड आर्टरीज़ के आसपास रक्त प्रवाह के लिए वैकल्पिक रास्ते बनाए। मरीज के हार्ट की पंपिंग क्षमता काफी कम होने और सर्जरी के दौरान रक्त संचार की स्थिति अस्थिर होने के कारण यह प्रक्रिया कार्डियोपल्मोनरी बाईपास सपोर्ट की मदद से की गई। हार्ट की कार्यक्षमता को सहारा देने के लिए मरीज में इंट्रा-एओर्टिक बैलून पंप (IABP) भी लगाया गया। सर्जरी के बाद मरीज को गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण उसे श्वसन संबंधी सहायता भी दी गई।
डॉ. मिश्रा ने आगे कहा, “बाईपास सर्जरी के बाद लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का नियमित सेवन, समय-समय पर फॉलो-अप और डायबिटीज तथा बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारकों पर प्रभावी नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण है।
सर्जरी के आठवें दिन मरीज को स्थिर स्थिति में हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। उसे नियमित दवाएं लेने, डायबिटीज को नियंत्रित रखने और समय-समय पर चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी गई।
यह मामला दर्शाता है कि गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिजीज का समय पर निदान और उचित उपचार कम उम्र के लोगों के लिए भी कितना महत्वपूर्ण है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज में कॉम्प्लेक्स हार्ट रोगों से पीड़ित मरीजों के उपचार के लिए कार्डियक सर्जरी और विशेष गहन चिकित्सा सेवाओं सहित व्यापक हार्ट देखभाल सुविधाएं उपलब्ध हैं।


