
‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ के संकल्प के साथ अतिपिछड़ा और अतिदलित समाज एकजुट; बड़े दलों के भरोसे रहने के बजाय खुद सत्ता में भागीदारी तय करने का किया ऐलान
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सूबे के सियासी फलक पर नए सामाजिक-राजनीतिक समीकरण की बुनियाद रख दी गई है। क्रांतिधरा मेरठ से वंचित, अतिपिछड़े और अतिदलित समाज को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने के संकल्प के साथ चार राजनीतिक दलों ने मिलकर ‘कर्पूरी मोर्चा’ के गठन की औपचारिक घोषणा की। मोर्चे ने सर्वसम्मति से सामाजिक न्याय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर देवेन्द्र कश्यप को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया है।
मोर्चे ने स्पष्ट किया कि अब यह वंचित वर्ग किसी बड़े राजनीतिक दल की बैसाखी बनने के बजाय अपने स्वतंत्र नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरेगा। संगठन का लक्ष्य प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर उतरकर जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक हिस्सेदारी हासिल करना है।
अब टिकट मांगने वाले नहीं, बांटने वाले बनेंगे: विनेश ठाकुर ‘कर्पूरी’
इंडियन जन सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं दैनिक विधान केसरी के सम्पादक विनेश ठाकुर ‘कर्पूरी’ ने मुख्य दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा: आजादी के आठ दशक बाद भी अतिपिछड़ी और अतिदलित जातियों को विधानसभा, लोकसभा और शासन में समुचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस ने केवल इन वर्गों के वोट बटोरे, लेकिन सत्ता में भागीदारी के नाम पर हमेशा उपेक्षा की। आरक्षण के उप-वर्गीकरण के अभाव में अंतिम पंक्ति की छोटी जातियां लाभ से वंचित हैं, जिसकी तुरंत समीक्षा होनी चाहिए।
प्रदेश के अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में अतिपिछड़ा वर्ग 1.5 से 2 लाख तक निर्णायक मतदाता रखता है। यदि यह ताकत एकजुट हो जाए, तो लखनऊ की सत्ता की चाबी इन्हीं वर्गों के हाथ में होगी।

सामाजिक न्याय और सम्मान की साझा लड़ाई: देवेन्द्र कश्यप
मुख्यमंत्री पद के घोषित चेहरे इंजीनियर देवेन्द्र कश्यप ने कहा कि पाल, बघेल, प्रजापति, कश्यप, निषाद, सैनी, मौर्य, कुशवाहा, शाक्य, विश्वकर्मा, सैन, सविता, नंदवंशी, लोधी, गुर्जर और अतिदलित वर्ग प्रदेश की सबसे बड़ी आबादी होने के बावजूद राजनीतिक रूप से उपेक्षित रहे हैं। “कर्पूरी मोर्चा किसी एक व्यक्ति या जाति का मंच नहीं है। यह उन तमाम वंचित तबकों की साझा आवाज है जो सिर्फ चुनाव लड़ने नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा को खत्म कर सत्ता के केंद्र में अपनी सीधी भागीदारी तय करने के लिए मैदान में उतरे हैं।”
गुलामी की मानसिकता छोड़ें, स्वतंत्र नेतृत्व उभारें: राजेश तुरैहा
सामाजिक न्याय पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता राजेश तुरैहा ने आह्वान किया कि समाज को अब निजी स्वार्थ, छोटे पदों और टिकट की लालसा छोड़कर सामूहिक अधिकारों के लिए खड़ा होना होगा। जब तक यह वर्ग अपने वोटों की ताकत पहचानकर स्वतंत्र नेतृत्व तैयार नहीं करेगा, तब तक वास्तविक सामाजिक न्याय संभव नहीं है।
संगठन का विस्तार और मुख्य जिम्मेदारियां
संगठन विस्तार: सम्मेलन में सैनी समाज को लामबंद करने की कमान बुद्ध प्रकाश सैनी को सौंपी गई।
प्रमुख उपस्थिति: कार्यक्रम में इंडियन जन सेवा दल के जिलाध्यक्ष संजय सैन, स्टेट कोऑर्डिनेटर उमेश नंदवंशी, जिला उपाध्यक्ष सत्यप्रकाश सैन, सूरज सैन, सुभाष सैनी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
रणनीति: मोर्चे की ताकत को जिला, विधानसभा और बूथ स्तर तक ले जाने के लिए साझा समन्वय समितियां गठित की जाएंगी।
राजनीतिक संदेश: मेरठ की धरती से उठी यह आवाज संकेत दे रही है कि उत्तर प्रदेश का अतिपिछड़ा और अतिदलित मतदाता अब महज ‘वोट बैंक’ बनकर संतुष्ट नहीं है। 2027 के महासमर में यदि यह सामाजिक गठबंधन जमीन पर प्रभावी तालमेल और सीट संतुलन साधने में सफल रहता है, तो यह पारंपरिक राजनीतिक दलों के स्थापित समीकरणों को सीधी चुनौती दे सकता है।


