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महाराष्ट्र के स्वाद में इंदौरी तड़का, जत्रा में उमड़ा जनसैलाब

रविवार को होगा ‘जत्रा – मराठी वारसा फेस्टिवल’ का अंतिम दिन

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। सर्व मराठी भाषी सोशल एंड कल्चरल सोसायटी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय मेगा इवेंट ‘जत्रा – मराठी वारसा फेस्टिवल’ का दूसरा दिन उत्साह, सांस्कृतिक रंगों और पारंपरिक मराठी व्यंजनों के नाम रहा। शनिवार को शाम ढलने से पहले ही आयोजन स्थल पर लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। शाम होते-होते जत्रा परिसर में रौनक बढ़ती गई और रात आठ बजे तक पूरा ग्राउंड लोगों से गुलजार हो उठा। 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित इस फेस्टिवल में प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से लोगों के लिए प्रवेश और विभिन्न गतिविधियां रखी गई हैं। महाराष्ट्र की पारंपरिक संस्कृति और व्यंजनों के साथ इंदौरी अंदाज का अनूठा संगम शहरवासियों को खूब आकर्षित कर रहा है।

जत्रा में पहुंचे लोगों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेने के साथ ही महाराष्ट्र के लजीज व्यंजनों का जमकर स्वाद लिया। खाने-पीने के स्टॉल देर रात तक गुलजार रहे और हर ओर लोगों की चहल-पहल दिखाई दी। पारंपरिक मराठी वेशभूषा, लोककलाओं, संगीत और खानपान ने आयोजन को एक जीवंत सांस्कृतिक उत्सव का रूप दे दिया।

जत्रा ने दोगुना किया लोगों का उत्साह

आयोजन समिति की अध्यक्ष एवं सर्व मराठी भाषी सोशल एंड कल्चरल सोसायटी की अध्यक्ष स्वाति युवराज काशिद ने बताया कि जत्रा के दूसरे दिन भी लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। दोपहर 2 बजे से ही आयोजन स्थल पर लोगों का आना शुरू हो गया था और शाम होते-होते बड़ी संख्या में परिवार यहां पहुंच चुके थे। उन्होंने कहा कि लोगों की भागीदारी और मराठी संस्कृति के प्रति उनका प्रेम देखकर मन प्रफुल्लित हो गया। जत्रा का उद्देश्य मराठी विरासत, परंपराओं, लोककलाओं और खानपान को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करना है, जिसे लोगों का भरपूर प्रतिसाद मिल रहा है।

पुणे और मुंबई से भी जत्रा देखने पहुंचे मेहमान

इंदौर के विजय नगर क्षेत्र स्थित गुजराती स्कूल में आयोजित जत्रा मराठी वारसा फेस्टिवल में पुणे और मुंबई से आए मेहमानों ने भी शिरकत की। इंदौर आए ये परिवार शहर में आयोजित इस बड़े मराठी सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा बनने पहुंचे। उनके लिए यह देखना खास रहा कि महाराष्ट्र से दूर इंदौर में भी मराठी समाज अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को सहेजने के साथ अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। जत्रा ने स्थानीय लोगों के साथ ही बाहर से आए मेहमानों को भी मराठी विरासत से रूबरू होने का अवसर दिया।

लावणी, गोंधल और पोवाड़े ने बांधा समां

महाराष्ट्र से आए लोकनृत्य कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। इसके बाद लावणी, गोंधल और पोवाड़े की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया। लगभग चार घंटे तक चले इस सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखने के लिए शाम 7 बजे से ही दर्शक अपनी-अपनी जगह पर बैठ गए थे। कलाकारों की लय, संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। विशेष रूप से छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास और मराठी लोकपरंपरा से जुड़े पोवाड़ों ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा। जत्रा में लावणी के लिए ‘महाराष्ट्रचे मानकारी’ नाम की कलाकारों की टीम महाराष्ट्र से इंदौर आयी हुई है।

ठेठ मराठी और गावठी व्यंजनों का लिया स्वाद

जत्रा का फूड सेक्शन भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। यहां महाराष्ट्र के पारंपरिक और ग्रामीण स्वादों से लेकर लोकप्रिय मुंबई स्ट्रीट फूड तक की विस्तृत श्रृंखला देखने को मिली। झुणका-भाकर, भरली वांगी, ठेसा-भाकर, बासुंदी, आप्पे, साबूदाना वड़ा, पुरणपोली, वड़ा पाव, मिसळ पाव, धपाटे, भरीत-भाकरी, श्रीखंड-पुरी, अनारसे, चकली, भाकरवड़ी, मुंबई की स्वादिष्ट भेल, कोथिंबीर वड़ी, सांबरवड़ी, वाटली दाल, धिरड़े (चिले), मसाला भात, कढ़ी गोळा, कलाकंद और मूंग हलवा सहित अनेक पारंपरिक व्यंजन लोगों के लिए उपलब्ध रहे।

खास बात यह रही कि हर स्टॉल पर लोगों की अच्छी भीड़ दिखाई दी। लोग परिवार और दोस्तों के साथ अलग-अलग व्यंजनों का स्वाद लेते नजर आए। महाराष्ट्र के पारंपरिक जायके और इंदौर के खानपान प्रेम का यह मेल जत्रा की खास पहचान बनकर उभरा।

रविवार को जत्रा का अंतिम दिन

तीन दिवसीय ‘जत्रा – मराठी वारसा फेस्टिवल’ का समापन रविवार, 25 अक्टूबर को होगा। आयोजन के अंतिम दिन भी लोगों के लिए मराठी संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों और सांस्कृतिक गतिविधियों का आनंद लेने का अवसर रहेगा।जत्रा में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

दूसरे दिन 25 हजार लोगों ने किया कथा का श्रवण, चिठ्ठियां और स्केच भी लाए

ठाकुरजी को जड़ नहीं, चेतन भाव से देखें, भक्त के प्रेम से बदल जाता है भगवान का स्वरूप —इंद्रेश जी महाराज

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। ‘मुकुंद माधव हरि, हरि बोल’ की धुन गूंजते ही पूरा पंडाल भक्ति और उल्लास में झूम उठा। हर तरफ ऐसा नजारा था, मानो साक्षात श्रीकृष्ण भक्तों के बीच आकर बांसुरी की धुन पर सबको अपने रंग में रंग रहे हों। शरद पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर ही पंडाल में रास का उल्लास छा गया। भजन की लय पर थिरकते भक्त सुध-बुध खोकर कृष्ण भक्ति के रस में डूब गए। किसी के कदम थमने का नाम नहीं ले रहे थे, तो कोई दोनों हाथ उठाकर प्रभु के प्रति अपनी श्रद्धा जता रहा था। पूरा माहौल कृष्णमय हो गया और हर ओर भक्ति, प्रेम और आनंद की अनूठी छटा बिखर गई। इन्द्रेश जी महाराज की श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कुछ ऐसा ही दृश्य दिखाई दिया।

कथा सुनाते हुए महाराज जी ने कहा ‘जिस दिन हमारे चित्त का जड़त्व खत्म हो जाएगा, उस दिन ठाकुरजी हमें जड़ नहीं, चेतन दिखाई देंगे। भगवान हिलते-डुलते नहीं, ऐसा नहीं है, बल्कि हमारे भीतर का भाव उन्हें देखने का नजरिया तय करता है।’ उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों के भाव और प्रेम से प्रसन्न होते हैं। भक्त की श्रद्धा इतनी गहरी हो कि वह भगवान को अपने बीच जीवंत अनुभव करने लगे, यही भक्ति की शक्ति है।

आयोजक आशीष गोयल ने कहा कि परिवार में गुरु परंपरा और भागवत कथा करवाने की प्रथा बरसों से चली आ रही है। यह गुरुदेव और श्रीजी की कृपा ही है कि हम यह कथा करा पा रहे हैं। यह कथा सभी के लिए निशुल्क है। सभी शहरवासी आकर इसका लाभ ले सकते हैं। आयोजक अमृता गोयल ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मेरा जन्म और फिर विवाह ऐसे परिवार में हुआ वहां मुझे गुरु सेवा और भागवत कथा करवाने का मौका मिल रहा है।

एमआर-10 स्थित स्टार चौराहे पर करीब 10 एकड़ क्षेत्र में आयोजित कथा प्रतिदिन शाम 4 से 7 बजे तक हो रही है। श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश निशुल्क है। आयोजन स्थल पर बैठने, धूप और बारिश से बचाव, पेयजल, मेडिकल सहायता और सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। कथा का प्रसारण 12 बड़ी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से भी किया जा रहा है।

भक्त के प्रेम से ठाकुरजी ने किए सफेद बाल, संतों का अपमान न करने की दी सीख—

महाराज ने उदयपुर के राजघराने से जुड़ा एक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बार मंदिर के पुजारी ने ठाकुरजी को पहनाई जाने वाली माला स्वयं पहन ली थी। बाद में वही माला राजा को पहना दी। माला में पुजारी का सफेद बाल देखकर राजा ने व्यंग्य में पूछा कि क्या ठाकुरजी के बाल भी सफेद हो गए हैं। पुजारी ने घबराहट में हां कह दिया। अगले दिन राजा ने ठाकुरजी का मुकुट उतरवाकर उनके बाल देखने चाहे तो वास्तव में उनके बाल सफेद दिखाई दिए। यह देखकर राजा उनके चरणों में गिर पड़ा। महाराज ने बताया कि ठाकुरजी ने स्वप्न में राजा को संतों, वैष्णवों, भक्तों और ब्राह्मणों का अपमान न करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों की चिंता दूर करने के लिए भी लीला करते हैं।

नरसी मेहता ने महादेव से मांगा वही, जो उन्हें सबसे प्रिय था—

कथा में महाराज ने नरसी मेहता का प्रसंग आगे बढ़ाते हुए बताया कि जब महादेव ने उनसे वरदान मांगने को कहा तो नरसी मेहता ने अपने लिए कुछ नहीं मांगा। उन्होंने कहा कि प्रभु, आपको जो सबसे प्रिय है, वही मुझे दे दीजिए। महादेव उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें रासलीला के दर्शन कराए। महाराज ने कहा कि सच्चा भक्त भगवान के सामने अपनी इच्छाओं की सूची नहीं रखता, बल्कि अपना जीवन उनके भरोसे छोड़ देता है। हमें भी भगवान से यही प्रार्थना करनी चाहिए कि वे हमारे लिए जो उचित समझें, वही करें।

भगवान के प्रति समर्पण से दूर होती है चिंता—

महाराज ने कहा कि मनुष्य अपनी हर जिम्मेदारी स्वयं उठाने की कोशिश करता है, इसलिए परेशान होता है। जब वह अपना जीवन भगवान को समर्पित कर देता है, तब परिस्थितियों को स्वीकार करने की शक्ति मिलती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान के प्रति विश्वास रखने और संतों का सम्मान करने का आग्रह किया।

महादेव की कृपा से लगता है कथा में मन—

महाराज जी को कई खत भी आएं जिसमें से एक पढ़ते हुए उन्होंने कहा छोटी सी लाली है भोली भाली है कहती है कथा में मन नहीं लगता है पर मम्मी-पापा ले आते हैं। कुछ ऐसा करें कि कथा में मन लगे और उससे ज्यादा पढ़ाई में मन लगे। उन्होंने कहा कि पढ़ाई में तो मन लगाने से लग जाता है पर कथा में मन महादेव की कृपा से ही लगता है। कभी कभी कथा का हिस्सा बनती रहो किस पल कथा का कोई भाव मन को छू जाएगा और कथा में मन लगने लगेगा।

‘ठरलंय फॉरएवर !’ : प्रेमकथा का अनूठा रंगानुभव, युवा पीढ़ी की भाषा, मल्टीमीडिया तकनीक से नाटक बना अत्यंत प्रभावशाली

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। सानंद न्यास के पांच दर्शक समूहों के लिए रिश्तों की उलझनों को टटोलते नाटक ‘ठरलंय फॉरएवर’ का मंचन शनिवार शाम से प्रारंभ हुआ। नाटक की लेखिका-अक्षता आचार्य और दिग्दर्शक- ऋषी मनोहर हैं।

मराठी रंगमंच के सामने आज सबसे बड़ी चुनौतियों में एक है युवा दर्शकों को नाट्य गृह तक आकर्षित करना। इंटरनेट और ओटीटी के विस्तार ने मनोरंजन की दुनिया बदल दी है। ऐसे में ‘नवा गडी, नवा राज’ और ‘अमर फोटो स्टुडिओ’ की परंपरा में ‘ठरलंय फॉरएवर!’ नई पीढ़ी के भावविश्व से संवाद करने का प्रयास है।

सुजय जाधव, ऋषि मनोहर, कपिल रेडेकर, अक्षता आचार्य और ऋता दुर्गुळे के सहयोग से तैयार यह नाटक समकालीन प्रेमकथा को मल्टीमीडिया तकनीक और अंग्रेजी मिश्रित मराठी के सहारे मंच पर उतारता है। लेखिका और अबीर का दर्शकों से सीधा संवाद प्रस्तुति को सहज बनाता है। एलईडी तकनीक के जरिए समय और स्थान की रचना पारंपरिक नेपथ्य की सीमाओं को विस्तार देती है।

अबीर और मीरा की मुलाकात, साथ मिलकर फिल्म की कहानी लिखने का प्रयास, गलतफहमियां और दोस्ती में पनपती भावनाएं कथानक का आधार हैं। उनके द्वारा रचे जा रहे काल्पनिक पात्र कबीर और इरा की कहानी वास्तविक रिश्तों के समानांतर चलती है। प्रेम, विश्वास और भावनात्मक उलझनों का यह मेल रोचक है। कुछ प्रसंगों का अनुमान लगने के बावजूद प्रस्तुति दर्शकों की रुचि बनाए रखती है। अंग्रेजी मिश्रित मराठी नाटक की विशिष्ट पहचान है। यह महानगरीय युवाओं की बोलचाल और उनकी बदलती भाषाई आदतों को प्रतिबिंबित करती है। मराठी रंगमंच ने मालवणी, वरहाड़ी और आगरी जैसी बोलियों को अपनाया है; उसी क्रम में ‘मंग्लिश’ का प्रयोग भी नए दर्शक वर्ग तक पहुंचने की संभावना जगाता है। कपिल रेडेकर ने अबीर के भुलक्कड़ और बेतरतीब स्वभाव को सहजता से निभाया है। ऋता दुर्गुळे की मीरा चंचलता और संवेदनशीलता का सुंदर मेल है। दोनों की नोकझोंक प्रेमकथा को जीवंत बनाती है।

मरीन ड्राइव, अलीबाग और चौपाटी के दृश्य, गीत-संगीत तथा नृत्य प्रस्तुति को दृश्यात्मक आकर्षण देते हैं। सुमित पाटील का नेपथ्य, शुभंकर सौदणकर के वीएफएक्स और तेजस देवधर की प्रकाश व्यवस्था इस अनुभव को समृद्ध करते हैं। एलईडी और वीएफएक्स प्रभावशाली हैं, तकनीक कहानी को और सशक्त बनाती है। मंचन असली शक्ति कलाकारों का जीवंत अभिनय और दर्शकों से नाटक का तादात्म्य है। निश्चित ही ‘ठरलंय फॉरएवर !’ बदलते समय से संवाद करने वाला स्वागत योग्य प्रयोग है। दिग्दर्शक
ऋषि मनोहर द्वारा किया गया तकनीकी नवाचार इंदौर के रसिक प्रेक्षकों को बहुत पसंद आया है।

रविवार को 3 शो

सानंद न्यास के अध्यक्ष जयंत भिसे और मानद सचिव संजीव वावीकर ने बताया कि नाटक
ठरलंय फोरेवर के रविवार को 3 शो होंगे।
सुबह 10 बजे, दोपहर 4 बजे और रात्रि 7:30 बजे।

संयुक्त प्रेस क्लब का तीसरी बार विस्तार, नई कार्यकारिणी गठित

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। मंगल पांडे नगर स्थित मेरठ प्रेस क्लब में संयुक्त प्रेस क्लब की कार्यकारिणी बैठक का आयोजन हुआ। बैठक की अध्यक्षता अनिल कुमार बादली ने की, जबकि संचालन क्लब महामंत्री धर्मेन्द्र प्रताप सिंह तोमर ने किया।

बैठक में संयुक्त प्रेस क्लब अध्यक्ष अतुल माहेश्वरी ने कार्यकारिणी का तीसरी बार विस्तार करते हुए नए सदस्यों को मनोनयन पत्र व पहचान पत्र सौंपकर संगठन में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कार्यकारिणी का विस्तार आगे भी जारी रहेगा। दीपावली व आगामी त्योहारों पर पत्रकार मिलन समारोह का आयोजन किया जाएगा।

अतुल माहेश्वरी ने बताया कि मेरठ प्रेस क्लब की सुरक्षा हेतु बाहरी दीवार बनाने की संयुक्त प्रेस क्लब की मांग पर नगर निगम ने सहमति दे दी है। शीघ्र ही नई बाउंड्री वॉल का कार्य प्रारंभ होगा। इस घोषणा पर सभी पत्रकारों ने ताली बजाकर स्वागत किया।

बैठक में राजेंद्र चौहान, विनोद गोस्वामी, रमेश सोनी, सुनील बादली, शालू शर्मा, अनु ठाकुर, अहसान कुरैशी, बीबी नागर, दिनेश सिंघल, प्रभास रस्तोगी, मुकेश वर्मा, सत्यव्रत शर्मा, अवनीश आर्य, चांद मुश्ताक, जाहिदा खान, वंशिका कौशिक, अरशद अली सिद्दीकी, अंशू गोयल, मुकुल कुमार, शुभम कुमार, धर्मेन्द्र कुमार, एमएस उपाध्याय, जयवीर कुमार, राजेश सैनी, नवेद खान, सुनील, अजीम सलमानी, सुनील जैकब, महेश चंद्र, मदन गोपाल, नौशाद सैफी आदि पत्रकार मौजूद रहे।

कवि युगल मिले नीले ड्रम वाली मुस्कान से, कवयित्री डाॅ. अनामिका जैन उठाएंगी मुस्कान की बेटी की पढ़ाई का खर्च

नित्य संदेश, मेरठ। कवयित्री डॉ. अनामिका जैन अंबर ने मेरठ की जिला कारागार में बंद चर्चित ड्रम हत्याकांड की दोषी मुस्कान की बेटी की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने और उसके आत्मनिर्भर होने तक फांसी टालने की अपील की है।

निशुल्क शिक्षा का संकल्प: जैनाचार्य सौरभ सागर जी महाराज के जन्म जयंती महोत्सव पर जेल पहुंचे कवि युगल सौरभ जैन सुमन और डॉ. अनामिका जैन अंबर ने बंदियों को फल बांटे और मुस्कान से मुलाकात की, जहां मुस्कान की दुधमुंही बेटी के भविष्य को संवारने के लिए कवयित्री ने उसे अपने स्कूल में निशुल्क पढ़ाने और समस्त खर्च उठाने की घोषणा की।

फांसी टालने की विशेष अपील: बातचीत के दौरान बच्ची के भविष्य की चिंता जताते हुए कवयित्री ने अपील की है कि जब तक बच्ची अपने पैरों पर खड़ी होकर आत्मनिर्भर नहीं हो जाती, तब तक मुस्कान की फांसी की सजा पर पुनर्विचार किया जाए।