
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। देश की अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं, लेकिन भाव एक—एक भारत, श्रेष्ठ भारत। हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयूएसटी) में आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर में यही तस्वीर देखने को मिली। 22 से 28 अक्टूबर तक चले इस शिविर में 17 राज्यों के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के NSS प्रभारी प्रोफेसर दुष्यंत चौहान के मार्ग-दर्शन में सर छोटू राम इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (एससीआरआईईटी) के स्वयंसेवक ने भी अपनी प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और सांस्कृतिक समझ का परिचय देते हुए विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। शिविर में केवल प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभा दिखाने का अवसर ही नहीं मिला, बल्कि अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं को एक साथ रहने, विचार साझा करने और एक-दूसरे की संस्कृति को करीब से जानने का मौका भी मिला। सात दिनों तक चले इस आयोजन में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, आपसी सहयोग और राष्ट्रीय एकता की भावना प्रमुख रूप से दिखाई दी।
MCA विभाग के आयुष के नेतृत्व में टीम नालंदा ने हासिल की जीत
शिविर में प्रतिभागियों को दस मिश्रित टीमों में बांटा गया था। प्रत्येक टीम में अलग-अलग राज्यों के स्वयंसेवकों को शामिल किया गया, ताकि वे मिलकर काम करने, सामूहिक निर्णय लेने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अनुभव प्राप्त कर सकें। सीसीएसयू की राष्ट्रीय सेवा योजना की चतुर्थ इकाई के स्वयंसेवक आयुष रंजन दुबे को टीम नालंदा (टीम-01) का नेतृत्व सौंपा गया। उनके नेतृत्व में टीम ने रंगोली, स्टोन पेंटिंग, बालिका 200 मीटर दौड़, अंग्रेजी भाषण, युवा संसद और रील निर्माण सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की।
टीम नालंदा ने युवा संसद प्रतियोगिता में भी पहला स्थान प्राप्त किया। इस प्रतियोगिता में प्रत्येक टीम से केवल दो प्रतिभागियों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया था। आयुष रंजन दुबे, टीम की ओर से बोलने वाले दो प्रतिनिधियों में शामिल रहे। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों की तर्कशक्ति, वक्तृत्व कला, वाद-विवाद कौशल और संसदीय कार्यप्रणाली की समझ को परखा गया।
आयुष ने अंग्रेजी भाषण प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उन्हें प्रमाण-पत्र और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। टीम का नेतृत्व करने के साथ विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी ने उनके शिविर अनुभव को खास बना दिया।

हितेश को दौड़ में स्वर्ण पदक
शिविर में सीसीएसयू के अन्य स्वयंसेवकों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। हितेश ने 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि दीपांशु ने विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों में स्वयंसेवकों की भागीदारी ने राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की उपस्थिति को उल्लेखनीय बनाया।
संस्कृतियों के मेल से मजबूत हुई एकता की भावना
राष्ट्रीय एकता शिविर में सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी आकर्षण का केंद्र रहा। अलग-अलग राज्यों से आए स्वयंसेवकों ने अपनी क्षेत्रीय भाषाओं, लोक परंपराओं, नृत्य शैलियों, रीति-रिवाजों और जीवनशैली से परिचित कराया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ युवा संसद, भाषण, नारा लेखन, कविता पाठ और रचनात्मक प्रतियोगिताओं ने युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया।
मिश्रित टीमों में काम करने और साझा आवास में रहने के दौरान स्वयंसेवकों को यह समझने का अवसर मिला कि भाषा, पहनावे और खानपान में अंतर होने के बावजूद आपसी सम्मान और सहयोग सभी को जोड़ते हैं। अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए युवाओं ने एक-दूसरे के विचारों को समझा और अपने अनुभव साझा किए। इस तरह शिविर में राष्ट्रीय एकता का संदेश केवल मंच से दिए गए भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दैनिक जीवन के अनुभवों में भी दिखाई दिया।
प्रतियोगिता में प्रतिद्वंद्वी, शिविर के बाद बने दोस्त
शिविर का सबसे यादगार पहलू विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच विकसित हुई मित्रता रही। युवा संसद जैसी प्रतियोगिताओं में एक-दूसरे के विचारों का विरोध करने वाले प्रतिभागी कार्यक्रम समाप्त होने के बाद साथ बैठकर बातचीत और हंसी-मजाक करते नजर आए। इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ आपसी सम्मान और सौहार्द का संदेश भी मिला।
समापन के दौरान स्वयंसेवकों ने एक-दूसरे के संपर्क विवरण और सोशल मीडिया की जानकारी साझा की। कई प्रतिभागियों ने एक-दूसरे की डायरियों में संदेश लिखे और दोबारा मिलने की इच्छा जताई। सात दिनों में बने ये रिश्ते शिविर की उन उपलब्धियों में शामिल रहे, जिन्हें प्रतिभागी अपने साथ यादों के रूप में लेकर लौटे।
प्रतिभा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी मिला पाठ
28 अक्टूबर को शिविर का समापन हुआ। सीसीएसयू के स्वयंसेवकों के लिए यह अनुभव पदक और प्रमाण-पत्र हासिल करने तक सीमित नहीं रहा। उन्हें नेतृत्व संभालने, सामूहिक जिम्मेदारी निभाने, विभिन्न संस्कृतियों को समझने और राष्ट्रीय एकता के महत्व को व्यवहार में अनुभव करने का अवसर मिला।
राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य युवाओं में सेवा भावना, सामाजिक जिम्मेदारी, नेतृत्व क्षमता और जागरूक नागरिकता का विकास करना है। राष्ट्रीय एकता शिविर ने इन उद्देश्यों को व्यावहारिक रूप में समझने का अवसर प्रदान किया। सात दिनों के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत है। जब युवा एक-दूसरे की भाषा, संस्कृति और विचारों का सम्मान करते हैं, तो राष्ट्रीय एकता की नींव और मजबूत होती है।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ नीरज सिंघल एवं विभाग समन्वयक विकास जैन ने शुभकामनाएं प्रेषित की और उज्जवल भविष्य की कामना की l
शिविर समाप्त हो गया, लेकिन यहां बनी मित्रताएं, सीखे गए जीवन-मूल्य और एक भारत का संदेश स्वयंसेवकों के साथ लंबे समय तक बने रहेंगे।


