
- साइबर स्लेवरी, फर्जी निवेश और सोशल मीडिया ठगी से सतर्क रहने की अपील; पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को दी शिकायत दर्ज कराने की जानकारी
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। डिजिटल दुनिया में बढ़ती सुविधाओं के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। कभी पुलिस अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाया जाता है, तो कभी ऑनलाइन गेमिंग, फर्जी निवेश और विदेश में नौकरी के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता है। ऐसे अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर जागरूकता अभियान के अंतर्गत चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में साइबर सुरक्षा एवं साइबर अपराध जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (ILS) और सर छोटू राम इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (SCRIET) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विधि एवं तकनीकी संकायों के विद्यार्थियों को साइबर अपराध के बदलते स्वरूप, डिजिटल गोपनीयता, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी तथा शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। सीसीएसयू की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. भूपेंद्र सिंह, , विश्वविद्यालय कुलानुशासक प्रोफेसर बीरपाल सिंह, इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के निदेशक डॉ विवेक कुमार त्यागी, सर छोटू राम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. नीरज सिंघल, पुलिस विभाग से सीओ सौम्या अस्थाना, इंस्पेक्टर संजय पांडेय, उपनिरीक्षक नितिन पांडे, उपनिरीक्षक आकाश और उपनिरीक्षक निर्मल सती सहित अन्य अधिकारी एवं शिक्षक मौजूद रहे। कार्यक्रम के आयोजन एवं समन्वय में डॉ. सुशील कुमार, डॉ. अर्पित छाबड़ा और इंजीनियर प्रवीण पवार सहित अन्य सहयोगियों की भूमिका रही।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराएं तो न घबराएं
उपनिरीक्षक नितिन पांडेय एवं आकाश कुमार ने डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी के तरीकों की जानकारी देते हुए बताया कि साइबर अपराधी खुद को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। इसके बाद जांच के नाम पर धनराशि ट्रांसफर करने या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी देने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसी कॉल पर घबराने के बजाय संबंधित विभाग से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करने की अपील की। उन्होंने बताया कि अनजान लिंक खोलने, संदिग्ध क्यूआर कोड स्कैन करने और अनधिकृत एप डाउनलोड करने से भी वित्तीय नुकसान हो सकता है। किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम कार्ड का सीवीवी या बैंकिंग पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए।
साइबर स्लेवरी और गेमिंग फ्रॉड से भी रहें सावधान
सीओ सौम्या अस्थाना ने साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप के प्रति जागरूक रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना संबंधित अधिकारियों को देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को ऑनलाइन सुरक्षा संबंधी सावधानियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करते हुए साइबर स्लेवरी के प्रति भी विद्यार्थियों को जागरूक किया । उन्होंने बताया कि विदेश में नौकरी, आकर्षक वेतन और आसान कमाई का लालच देकर लोगों को ऐसे नेटवर्क में फंसाया जा सकता है, जहां उनसे दबावपूर्वक ऑनलाइन ठगी जैसी अवैध गतिविधियां कराई जाती हैं। विद्यार्थियों को नौकरी के प्रस्तावों, भर्ती एजेंसियों और विदेश भेजने के दावों की विश्वसनीयता की जांच करने की सलाह भी दी । ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड के संबंध में बताया गया कि मुफ्त कॉइन, बोनस, बड़े इनाम और गेमिंग अकाउंट अनलॉक करने के नाम पर ठग लोगों से पैसे और गोपनीय जानकारी हासिल कर सकते हैं। विद्यार्थियों को केवल आधिकारिक स्रोतों से एप डाउनलोड करने और अनजान व्यक्तियों के साथ अपने गेमिंग अकाउंट की जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी गई।

सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से बचें
उपनिरीक्षक निर्मल सती ने सोशल मीडिया की सुरक्षा और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करना, संदिग्ध समूहों से जुड़ना और निजी तस्वीरें या दैनिक गतिविधियां सार्वजनिक करना जोखिम बढ़ा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदिग्ध प्रोफाइल, लिंक और संदेशों के डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की जानकारी भी दी। इंस्पेक्टर संजय पांडेय ने साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने और शिकायत की स्थिति में पुलिस की सहायता लेने का संदेश दिया। विद्यार्थियों को बताया गया कि साइबर ठगी होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत संपर्क करें और https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

फर्जी निवेश योजनाओं के लालच में न आएं
छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. भूपेंद्र सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी शुरुआत में छोटे निवेश पर लाभ दिखाकर विश्वास जीतते हैं और बाद में बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी निवेश मंच की विश्वसनीयता की जांच करने तथा जल्दबाजी में वित्तीय निर्णय नहीं लेने की अपील की। प्रो. बीरपाल सिंह ने कहा कि साइबर जागरूकता केवल व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को अपने परिवार और समाज को भी ऑनलाइन ठगी से बचाव के उपाय बताने चाहिए। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार किए जाने वाले भ्रामक वीडियो, आवाज की नकल और फर्जी प्रचार के प्रति भी सतर्क रहने की आवश्यकता बताई। प्रो. नीरज सिंघल एवं प्रो. विवेक कुमार त्यागी के नेतृत्व में दोनों संस्थानों की सहभागिता ने तकनीकी और कानूनी जागरूकता के समन्वय को महत्वपूर्ण बनाया ने विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के संयोजन में डॉ. सुशील कुमार, डॉ. अर्पित छाबड़ा और इंजीनियर प्रवीण पवार सहित अन्य सहयोगियों ने भूमिका निभाई। अंत में डॉ. अर्पित छाबड़ा ने पुलिस अधिकारियों, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षकों एवं आयोजन में सहयोग देने वालों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा -डर में आकर पैसे न भेजें, लालच में निवेश न करें, ओटीपी और यूपीआई पिन साझा न करें तथा साइबर ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें। जागरूकता ही सुरक्षित डिजिटल समाज की पहली शर्त है।


