
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। इतिहास के क्षेत्र में भाट की पोथी एक अद्भुत और प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज है जो प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न अंग है और इससे तत्कालीन सामाजिक ताना-बाना आर्थिक व राजनीतिक वास्तविक स्थिति की ओर जानकारी मिलती है। इतिहास के प्रमाणिक स्रोतों के रूप में यह उपयोग में लाई जा रही है जो अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक है।
उक्त विचार महारानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के पूर्व कुलपति एवं वरिष्ठ इतिहासकार, शिक्षाविद् प्रोफेसर कपिल देव मिश्रा ने व्यक्त किये। उल्लेखनीय है कि दिनांक 29 अक्टूबर 2026 को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में प्रोफेसर ज़ीनत ज़ैदी व प्रोफेसर विघ्नेश कुमार के निर्देशन में पूनम देवी द्वारा पीएच डी हेतु भाट की पोथी मे अंकित विभिन्न वशो का ऐतिहासिक विवरण– एक विश्लेषणात्मक अध्ययन,(जनपद हरिद्वार व समीपवर्ती क्षेत्र के विशेष संदर्भ में विषयक ओपन वायवा के परीक्षक के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर संपन्न हुए ओपन वायवा के अवसर पर इतिहास विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर कृष्णकांत शर्मा प्रो कपिल देव मिश्रा का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सभी शिक्षक एवं अनेक शोधार्थी व विद्यार्थी उपस्थित रहे।


