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शहरी विकास में नागरिकों की भागीदारी जरूरी, सुभारती में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को किया जागरूक

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ की ओर से प्रजा फाउंडेशन के सहयोग से ‘अर्बन गवर्नेंस एंड सिटिजन पार्टिसिपेशन को समझना’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत में शहरी स्थानीय शासन की व्यवस्था, नगर निकायों की कार्यप्रणाली तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों की भूमिका से परिचित कराना था।

कार्यशाला के प्रथम सत्र का संचालन प्रजा फाउंडेशन की सुश्री पूजा वर्मा ने किया, जबकि दूसरे सत्र का संचालन प्रजा फाउंडेशन के श्री स्वाभिमान ने किया। दोनों विशेषज्ञों ने अपने व्यावहारिक अनुभव और विषयगत जानकारी के माध्यम से विद्यार्थियों को शहरी शासन की संरचना, कानूनी प्रावधानों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी।कार्यशाला के दौरान भारत में शासन के तीन स्तरों और शहरी शासन व्यवस्था, शहरी स्थानीय निकायों की वर्तमान स्थिति, सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 तथा संविधान और नागरिकों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने नगर निगमों की संरचना एवं कार्यप्रणाली, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों और नागरिक समस्याओं के समाधान की प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल शब्दों में समझाया। साथ ही, शिकायत निवारण तंत्र, सार्वजनिक सूचनाओं तक पहुंच, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में नागरिकों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

विशेषज्ञ वक्ताओं ने बताया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहकर, सूचना का अधिकार अधिनियम का उपयोग करके और संबंधित शहरी स्थानीय निकायों से संवाद स्थापित करके सार्वजनिक सेवाओं में सुधार तथा प्रशासनिक जवाबदेही को बढ़ावा दे सकते हैं। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्यशाला में प्रश्नोत्तरी, सवाल-जवाब और अन्य संवादात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं। विद्यार्थियों को विषयों की बेहतर समझ विकसित करने के लिए असाइनमेंट भी दिए गए, ताकि वे कक्षा में सीखी गई अवधारणाओं का गहन अध्ययन कर सकें। प्रश्नोत्तरी में सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को स्मृति चिह्न प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। 

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ वक्ताओं को विद्यार्थियों के साथ अपने ज्ञान, विचार और व्यावहारिक अनुभव साझा करने के लिए सम्मानित किया गया। समापन सत्र में प्रजा फाउंडेशन के विशेषज्ञों, विश्वविद्यालय के अधिकारियों, आयोजकों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया गया।  यह कार्यशाला विद्यार्थियों को शहरी शासन, संवैधानिक प्रावधानों, नागरिक अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही की व्यावहारिक समझ प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल रही। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि जागरूक और सक्रिय नागरिक भागीदारी किस प्रकार बेहतर शहरी प्रशासन तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे सकती है।

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