
डा. अभिषेक डबास
नित्य संदेश, मोदीपुरम। उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, शोभित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), मेरठ ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करना, अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए नए अवसर विकसित करना है।
इस अवसर पर शोभित विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. के. त्यागी, प्रो-कुलपति प्रो. (डॉ.) जयानंद तथा कुलसचिव डॉ. पंकज राणा उपस्थित रहे। आईआईटी रुड़की की ओर से प्रो. (डॉ.) के. के. पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की, प्रो. (डॉ.) विवेक कुमार मलिक, डीन (रिसर्च), आईआईटी रुड़की एवं प्रोफ नवानी इस महत्वपूर्ण अवसर पर उपस्थित रहे।
इस अवसर पर शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) बूटा सिंह सिद्धू एवं कुलसचिव डॉ. महिपाल सिंह भी उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने शोभित विश्वविद्यालय के दोनों परिसरों के बीच शैक्षणिक सहयोग और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
समझौता ज्ञापन का उद्देश्य उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार, प्रशिक्षण, परामर्श सेवाओं तथा संस्थागत क्षमता निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक प्रभावी रूपरेखा तैयार करना है। इसके अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, शैक्षणिक गतिविधियों, अंतर्विषयक अनुसंधान तथा उत्कृष्ट शैक्षणिक पद्धतियों के आदान-प्रदान की संभावनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रस्तावित सहयोग के अंतर्गत पीएच.डी. शोधार्थियों के संयुक्त मार्गदर्शन, शोध पत्रों के संयुक्त प्रकाशन, प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं, विद्यार्थियों की इंटर्नशिप, नवाचार परियोजनाओं, स्टार्टअप इनक्यूबेशन तथा उद्यमिता विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पाठ्यक्रम संवर्धन, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार, प्रयोगशालाओं एवं अनुसंधान सुविधाओं के साझा उपयोग, संकाय विकास कार्यक्रमों, सम्मेलनों, कार्यशालाओं, विशेषज्ञ व्याख्यानों तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन में भी सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
समझौते के अंतर्गत विभिन्न सहयोगात्मक गतिविधियों एवं परियोजनाओं को दोनों संस्थानों की आपसी सहमति से विकसित एवं क्रियान्वित किया जाएगा।


