
- वाल्मीकि जयंती पर तहसील और ब्लॉक मुख्यालय परं गूंजा समरसता का संदेश
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। रामायण के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए महर्षि वाल्मीकि जयंती पर जिले में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिरों में वाल्मीकि रामायण के अखंड पाठ और दीपदान हुए तो हस्तिनापुर, मेरठ दक्षिण, कैंट आदि विधानसभा क्षेत्र के गांवों में नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने मुक्ताकाश नाट्य संस्थान के सहयोग से नाटकों का आयोजन कराया।
तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों पर भी कार्यक्रम हुए। रजबन स्थित वाल्मीकि मंदिर में जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके आदर्शों को जीवन में उतारने और आपसी सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया। महर्षि वाल्मीकि जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भी लोगों को रामायण के संदेश से जोड़ने पर जोर रहा। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और मुक्ताकाश नाट्य संस्थान के कलाकारों ने हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र के मवाना, मवाना खुर्द, अटौरा, अलीपुर, जानी समेत विभिन्न गांवों में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनकी रचना रामायण में निहित आदर्शों को आमजन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। योगी सरकार ने संदेश दिया है कि महर्षि वाल्मीकि जयंती पर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और महापुरुषों की शिक्षाओं से लोगों को जोड़ना है। गांवों में नुक्कड़ नाटकों के आयोजन से रामायण के संदेश को जनसामान्य तक पहुंचाने के साथ सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
रजबन मंदिर में डीएम ने किया माल्यार्पण
जयंती के अवसर पर जिलास्तरीय कार्यक्रम का आयोजन रजबन स्थित वाल्मीकि मंदिर (महर्षि वाल्मीकि चौक) में किया गया। यहां जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह पहुंचे और मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल के साथ अन्य अधिकारियों ने महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। डीएम ने जनपदवासियों को जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी कार्यक्रम आपसी सद्भाव और सौहार्दपूर्ण वातावरण में आयोजित किए जाने चाहिए। सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत बनाने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
समानता, शिक्षा और स्वावलंबन का दिया संदेश
जिलाधिकारी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। समाज में समानता, शिक्षा, स्वावलंबन और परिश्रम की भावना को बढ़ावा देना उनकी शिक्षाओं के अनुरूप है। रामायण के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि ने मर्यादा, सत्य, करुणा और धर्मपरायणता का जीवन दर्शन प्रस्तुत किया, जो पीढ़ियों से समाज का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने लोगों से रामायण के आदर्शों को जीवन में अपनाने और आपसी भाईचारे के साथ राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने की अपील की।
मंदिरों में अखंड पाठ, दीपदान से भक्तिमय हुआ माहौल
महर्षि वाल्मीकि जयंती पर जिले के मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलन और दीपदान के साथ आठ, 12 अथवा 24 घंटे तक वाल्मीकि रामायण के अखंड पाठ आयोजित किए गए। इन आयोजनों के माध्यम से रामायण में निहित मानवीय, सामाजिक और राष्ट्रीय मूल्यों को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों पर भी विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनकी शिक्षाओं को याद किया गया।


