
- शिमला मिर्च, खीरा, गुलाब और जरबेरा के फूलों का हो रहा उत्पादन
लियाकत मंसूरी
नित्य संदेश, मेरठ। खेती में तकनीक का साथ मिला तो मेरठ के किसानों ने भी नई राह पकड़ ली। मौसम के असर से फसलों को बचाने और बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए जिले में पॉली हाउस तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है। वर्ष 2015-16 तक मेरठ में जहां केवल दो पॉली हाउस थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 50 हो गई है। दस वर्षों में 25 गुना हुई यह वृद्धि बताती है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ संरक्षित खेती को भी कमाई के विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। प्रदेश सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं और अनुदान से भी किसानों को इस दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में जिले में करीब डेढ़ लाख वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पॉली हाउस स्थापित हो चुके हैं। इनमें लगभग 80 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र सक्रिय रूप से खेती के लिए इस्तेमाल हो रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित औद्यानिक योजना के अनुसार पॉली हाउस खेती के निर्धारित मानकों को पूरा करने पर किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। अनुदान की गणना पॉली हाउस के आकार के अनुसार तय होती है। वर्तमान समय मं जिले में 500 वर्ग मीटर से लेकर चार हजार वर्ग मीटर तक के पॉली हाउस बनाए जा रहे हैं।
चार नए आवेदन, आठ पॉली हाउस पिछले साल बने
जिले में संरक्षित खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025-26 में आठ नए पॉली हाउस का निर्माण हुआ था। वहीं, वर्तमान वित्तीय वर्ष में चार किसानों ने पॉली हाउस स्थापित करने के लिए आवेदन किए हैं। सरधना, माछरा, सरूरपुर और परीक्षितगढ़ क्षेत्र में किसान इस तकनीक को अधिक अपना रहे हैं। पॉली हाउस में किसान शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर और अन्य सब्जियों के साथ गुलाब और जरबेरा जैसे फूलों का उत्पादन कर रहे हैं। चिंदौड़ी में मशरूम की खेती भी की जा रही है। फसलों की विविधता से किसानों को बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने का विकल्प मिल रहा है। पॉली हाउस में खेती करने वाले किसानों के अनुभव भी इस तकनीक के प्रति बढ़ते रुझान की वजह बन रहे हैं। खीरा उत्पादक किसान यशपाल सिंह के अनुसार, संरक्षित वातावरण में खेती करने से उन्हें सामान्य खेती की तुलना में दोगुना उत्पादन मिल रहा है। बाजार में फसल के बेहतर दाम मिलने की संभावना भी रहती है। सलावा के किसान आकाश सिंह ने पॉली हाउस में शिमला मिर्च की खेती से बेहतर आय प्राप्त की है।

पांच एकड़ में खेती, 29 लाख रुपये से अधिक का कारोबार
सरधना तहसील के खेड़ा गांव निवासी किसान रविन्द्र कुमार पॉली हाउस तकनीक से खेती करने वाले किसानों में शामिल हैं। वह पांच एकड़ क्षेत्र में फल और सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। उनके कृषि कारोबार का सालाना आंकड़ा 29 लाख रुपये से अधिक पहुंच चुका है। उनके पॉली हाउस में पीली, हरी और लाल शिमला मिर्च के साथ गुलाब और जरबेरा का उत्पादन होता है। शिमला मिर्च की दिल्ली की आजादपुर मंडी में मांग है। रविन्द्र कुमार को उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के माध्यम से भी नए व्यावसायिक अवसर मिले हैं।
इन्होंने कहा
जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार के अनुसार जिले में पॉली हाउस की बढ़ती संख्या से स्पष्ट है कि संरक्षित खेती किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन रही है। सरकारी अनुदान, आधुनिक तकनीक और बाजार की मांग का मेल किसानों को खेती में नए प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इस कारण खासकर युवा किसानों का पॉली हाउस तकनीक में विश्वास तेजी से बढ़ रहा है।


