
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। विद्या ग्लोबल स्कूल, मेरठ में वार्षिकोत्सव ‘विहान 2026’ का भव्य आयोजन किया गया।‘उत्कृष्टता की ओर मार्गदर्शक कदम’ की केंद्रीय भावना पर आधारित इस समारोह ने जीवन में मार्गदर्शन, ज्ञान, संस्कृति, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों के महत्त्व को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यालय के चेयरमैन प्रदीप जैन, प्रबंध निदेशक विशाल जैन तथा प्रधानाचार्य विनीत सूद के मार्गदर्शन में आयोजित इस समारोह ने विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का मनोहारी परिचय दिया।
इस गरिमामयी अवसर पर मेजर जनरल अजय सूद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। भारतीय सेना में अपने विशिष्ट सेवाकाल के दौरान उन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण कमान, प्रशिक्षण एवं रणनीतिक दायित्वों का निर्वहन किया। कारगिल में ऑपरेशन विजय के दौरान उनकी सेवाएँ तथा स्कूल ऑफ आर्टिलरी, देवलाली और ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई में उनके प्रशिक्षण संबंधी दायित्व उनके समृद्ध सैन्य अनुभव के उल्लेखनीय अध्याय रहे हैं। उन्हें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड तथा जीओसी-इन-सी कमेंडेशन कार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
अपने प्रेरणादायी संबोधन में मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों के जीवन में अनुशासन, दृढ़ संकल्प, नैतिक मूल्यों और स्पष्ट लक्ष्य के महत्त्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास विकसित करने, चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करने तथा अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि वास्तविक उत्कृष्टता केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उत्तम चरित्र, कर्तव्यनिष्ठा, प्रतिबद्धता और सही मार्ग चुनने की विवेकपूर्ण क्षमता से प्राप्त होती है। उनका संदेश विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और उन्हें जीवन में नेतृत्व, उत्तरदायित्व तथा सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2025-26 के मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को उनके अभिभावकों सहित आमंत्रित किया गया। मुख्य अतिथि मेजर जनरल अजय सूद ने विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता, समर्पण एवं अथक परिश्रम के लिए सम्मानित किया। उन्होंने विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
सारथी: मार्गदर्शन और आत्मबोध की अनूठी यात्रा
समारोह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जीवन को दिशा देने वाली विभिन्न शक्तियों का मनोहारी चित्रण किया। भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, बालसुलभ कल्पनाओं, जीवनानुभवों और मानवीय संबंधों को केंद्र में रखकर तैयार की गई इन प्रस्तुतियों ने मंच को भावनाओं, रंगों, संगीत और अभिव्यक्ति के एक जीवंत संसार में परिवर्तित कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान गणेश की वंदना से हुआ। विघ्नहर्ता, बुद्धि और ज्ञान के अधिष्ठाता भगवान गणेश की आराधना ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। विद्यार्थियों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति और लयबद्ध प्रस्तुतियों ने श्रद्धा, समर्पण तथा मंगलमय आरंभ का सुंदर संदेश दिया। भगवान गणेश ज्ञान और विवेक के ऐसे दिव्य प्रतीक हैं, जो मनुष्य को बाधाओं से उबरकर सत्य एवं सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। यह प्रस्तुति ‘सारथी’ की मूल भावना का प्रतीक बनीकृएक ऐसा मार्गदर्शक, जो जीवन की कठिन राहों में सही दिशा दिखाता है और लक्ष्य तक पहुँचने का आत्मविश्वास प्रदान करता है।
‘टोका टोका’ ने बचपन की उस जादुई दुनिया को साकार किया, जहाँ कल्पनाओं की कोई सीमा नहीं होती और प्रत्येक छोटा-सा सपना अनगिनत संभावनाओं को जन्म देता है। खिलौनों की रंगीन दुनिया से प्रेरित इस प्रस्तुति ने मासूमियत, जिज्ञासा, उल्लास और रचनात्मकता को जीवंत रूप में मंच पर उतारा। विद्यार्थियों की ऊर्जापूर्ण गतिविधियों, चंचल भाव-भंगिमाओं और मनमोहक अभिव्यक्तियों ने दर्शकों को बचपन की निश्छल खुशियों से जोड़ दिया। इस प्रस्तुति ने संदेश दिया कि खेलना, प्रश्न करना, कल्पना करना और नई चीजें सीखना बच्चों के विकास के महत्त्वपूर्ण आधार हैं। कभी-कभी जीवन की सबसे असाधारण उपलब्धियों का मार्ग भी बचपन की छोटी-छोटी कल्पनाओं और सरल खुशियों से होकर गुजरता है।

‘यूँ ही चला चल’ ने जीवन की अनिश्चितताओं, अनुभवों और निरंतर आगे बढ़ते रहने की भावना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। जीवन की यात्रा में प्रत्येक मोड़, प्रत्येक मुलाकात और प्रत्येक चुनौती हमें कुछ नया सिखाती है। इस प्रस्तुति ने बताया कि कठिन परिस्थितियों में भी साहस और आशा बनाए रखना ही आगे बढ़ने की वास्तविक शक्ति है। मित्रता, संघर्ष, खोज और अनुभव हमारे दृष्टिकोण को परिपक्व बनाते हैं तथा हमारे व्यक्तित्व को नई दिशा देते हैं। जीवन की सार्थकता केवल मंजिल तक पहुँचने में नहीं, बल्कि उस यात्रा में प्राप्त सीख और अनुभवों को आत्मसात करने में भी निहित है। यह प्रस्तुति ‘सारथी’ के विचार को सुंदरता से अभिव्यक्त करती है कि जीवन में मिलने वाला प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक अनुभव हमारा मार्गदर्शक बन सकता है।
‘कॉम काल्मा’ ने संगीत, लय और नृत्य के अद्भुत समन्वय से मंच पर उत्साह और ऊर्जा का संचार किया। विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, तालमेल, शारीरिक समन्वय और कलात्मक अभिव्यक्ति ने प्रस्तुति को आकर्षक बनाया। इसकी जीवंत लय और मनमोहक नृत्य ने दर्शकों को आनंद, सहजता और सामूहिक उत्सव की अनुभूति कराई। संगीत एक ऐसी सार्वभौमिक भाषा है, जो भिन्नताओं के बीच भी लोगों को जोड़ती है और भावनाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम बनती है। इस प्रस्तुति ने व्यक्तिगत प्रतिभा के साथ अनुशासन, अभ्यास और सामूहिक सहयोग के महत्त्व को भी उजागर किया। यह संदेश दिया गया कि जब व्यक्तिगत क्षमताएँ साझा उद्देश्य के साथ एकाकार होती हैं, तब उत्कृष्टता का सुंदर रूप सामने आता है।

‘अघोरी’ ने आध्यात्मिकता, आत्मचिंतन और आंतरिक शक्ति के गहन पक्षों को उजागर किया। यह प्रस्तुति दर्शकों को बाहरी आडंबरों से परे जाकर अपने अंतर्मन को समझने और जीवन के वास्तविक सत्य की खोज करने के लिए प्रेरित करती है। इसकी प्रभावशाली अभिव्यक्ति ने भय पर विजय पाने, अपनी सीमाओं को पहचानने और आत्मबोध की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। आध्यात्मिक अनुशासन और आत्मचेतना मनुष्य को क्षणिक आकर्षणों तथा स्थायी मूल्यों के बीच अंतर समझने की क्षमता प्रदान करते हैं। यह प्रस्तुति बताती है कि वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत भीतर से होती है। ‘सारथी’ की भावना के अनुरूप, इसने संदेश दिया कि हमारा अंतर्मन ही कभी-कभी हमारा सबसे गहरा और सशक्त मार्गदर्शक बन जाता है।
‘इट्स मैजिक’ ने कल्पना, विश्वास और सकारात्मक सोच की अद्भुत शक्ति को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया। जादू और आश्चर्य की दुनिया से प्रेरित इस प्रस्तुति ने सामान्य क्षणों को रोमांचक और विस्मयकारी अनुभवों में बदल दिया। विद्यार्थियों की रचनात्मकता ने यह संदेश दिया कि जो संभावना आज असंभव प्रतीत होती है, वह दृढ़ संकल्प, निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास से कल साकार हो सकती है। अपने ऊपर विश्वास रखना और नई संभावनाओं के प्रति खुले मन से आगे बढ़ना सफलता की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं। कल्पना हमें सपने देखने की प्रेरणा देती है, जबकि कर्म उन सपनों को वास्तविकता में बदलने का मार्ग प्रशस्त करता है। इस प्रस्तुति ने सुंदर ढंग से समझाया कि जीवन का वास्तविक जादू केवल दिखाई देने वाले चमत्कारों में नहीं, बल्कि उन सपनों में है, जिन पर हम विश्वास करने का साहस रखते हैं।

‘बंगाली एवं कांतारा’ ने भारत की सांस्कृतिक विविधता, क्षेत्रीय परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत की समृद्धि को एक साथ प्रस्तुत किया। बंगाल की प्रस्तुति ने वहाँ की कलात्मक परंपराओं, भक्तिमय अभिव्यक्तियों और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान की जीवंत झलक दिखाई। वहीं, ‘कांतारा’ से प्रेरित प्रस्तुति ने लोकपरंपराओं, प्रकृति के साथ मानवीय संबंध, आस्था, साहस और प्राचीन मान्यताओं के संरक्षण के महत्त्व को रेखांकित किया। दोनों प्रस्तुतियों ने दर्शाया कि संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि एक जीवंत विरासत है, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और समाज को उसकी पहचान प्रदान करती है। अपनी जड़ों से जुड़ाव हमें जीवन में स्थिरता, आत्मगौरव और सही दिशा देता है। यह प्रस्तुति इस विचार को सशक्त करती है कि परंपराओं का सम्मान करते हुए ही हम भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ अग्रसर हो सकते हैं।
‘हनुमान चालीसा’ की प्रस्तुति भगवान हनुमान के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भावपूर्ण प्रतीक बनी। भगवान हनुमान साहस, भक्ति, विनम्रता, बुद्धिमत्ता और निःस्वार्थ सेवा के शाश्वत आदर्श हैं। इस प्रस्तुति ने अटूट विश्वास, दृढ़ संकल्प और कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठावान रहने की प्रेरणा दी। अहंकार का त्याग, उद्देश्य के प्रति समर्पण और व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर कर्तव्य का निर्वहन करना जीवन के महत्त्वपूर्ण मूल्य हैं। विविध भक्तिमय अभिव्यक्तियों ने एकता, सद्भाव और आध्यात्मिक समरसता के संदेश को भी सुदृढ़ किया। भगवान हनुमान का जीवन हमें सिखाता है कि वास्तविक शक्ति केवल सामर्थ्य में नहीं, बल्कि विनम्रता, सेवा और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने में निहित है। यह प्रस्तुति आस्था को ऐसी प्रेरक शक्ति के रूप में दर्शाती है, जो मनुष्य को अपनी आंतरिक क्षमता पहचानने और विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने का संबल देती है।

‘शुभ दिन आयो’ ने भारतीय त्योहारों की उल्लासपूर्ण परंपरा, सामूहिक आनंद, कृतज्ञता और नई शुरुआत की भावना को जीवंत किया। इस प्रस्तुति ने परिवारों और समुदायों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक परंपराओं तथा जीवन की छोटी-बड़ी खुशियों का उत्सव मनाया। प्रकाश और अंधकार, ज्ञान और अज्ञान तथा आशा और निराशा के बीच के प्रतीकात्मक अंतर को प्रस्तुत करते हुए इसने सकारात्मकता और नवचेतना का संदेश दिया। त्योहार हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करते हैं और हमें प्रेम, सद्भाव, सहयोग तथा परस्पर सम्मान के मूल्यों से जोड़ते हैं। यह प्रस्तुति बताती है कि प्रत्येक नई सुबह अपने साथ नई संभावनाएँ लेकर आती है। बीते अनुभवों से सीखकर और आशावादी दृष्टिकोण अपनाकर हम भविष्य को बेहतर बना सकते हैं। ‘सारथी’ की मूल भावना के अनुरूप, इसने परंपरा और आस्था के उस प्रकाश को रेखांकित किया, जो मानव जीवन को सुख, शांति और सद्भाव की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।
‘विरसा-ए-पंजाब’ ने पंजाब की जीवंत संस्कृति, लोकसंगीत, उत्साहपूर्ण नृत्य और समृद्ध परंपराओं को मंच पर साकार किया। ऊर्जापूर्ण प्रस्तुतियों, रंगीन अभिव्यक्तियों और जोशीली लय ने दर्शकों को पंजाबी लोकजीवन की उमंग से भर दिया। इस प्रस्तुति ने पंजाब की मेहनतकश संस्कृति, अतिथि-सत्कार, उदारता, साहस और सामूहिकता की भावना को सम्मानित किया। लोकनृत्य और संगीत के माध्यम से विद्यार्थियों ने उस सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की, जो पीढ़ियों से लोगों को अपनी परंपराओं और सामुदायिक पहचान से जोड़ती आई है। पंजाबी संस्कृति हमें परिश्रम, प्रसन्नता, मिल-जुलकर रहने और कठिन परिस्थितियों में भी उत्साह बनाए रखने की प्रेरणा देती है। यह प्रस्तुति भारत की सांस्कृतिक विविधता का उल्लासपूर्ण उत्सव थी और इस बात का प्रतीक भी कि हमारी विरासत जीवन को दिशा देने वाली एक सशक्त मार्गदर्शक है।

इन सभी प्रस्तुतियों ने अपने-अपने ढंग से ‘सारथी’ की केंद्रीय भावना को साकार किया। उन्होंने यह संदेश दिया कि जीवन में मार्गदर्शन अनेक रूपों में मिलता हैकृकभी माता-पिता के स्नेह में, कभी शिक्षकों के ज्ञान में, कभी मित्रों के सहयोग में, कभी संस्कृति और आस्था में, तो कभी प्रकृति तथा जीवन के अनुभवों में। आवश्यकता केवल इस बात की है कि हम इन मार्गदर्शक शक्तियों को पहचानें और उनसे मिलने वाली सीख को अपने जीवन में अपनाएँ।
कार्यक्रम का समापन भव्य ग्रैंड फिनाले के साथ हुआ, जिसने पूरे समारोह की ऊर्जा, एकता और सामूहिक उपलब्धि की भावना को एक सूत्र में पिरो दिया। विद्यार्थियों की प्रतिभा, परिश्रम, रचनात्मकता और सामूहिक सहयोग ने इस अंतिम प्रस्तुति को समारोह का प्रभावशाली समापन बनाया। यह विद्यालय की उस शैक्षिक दृष्टि का प्रतीक था, जिसमें प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत क्षमता को सामूहिक प्रयासों के माध्यम से निखरने का अवसर मिलता है। इसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। राष्ट्रगान की गरिमामयी ध्वनि ने उपस्थित जनसमूह में देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना को सुदृढ़ किया। इसने सभी को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के निर्वहन का स्मरण कराया।

‘विहान 2026’ केवल एक वार्षिकोत्सव नहीं, बल्कि उन सभी मार्गदर्शक शक्तियों के प्रति एक भावपूर्ण अभिव्यक्ति था, जो हमारे विचारों को आकार देती हैं, हमारी आकांक्षाओं को पोषित करती हैं और हमें एक जिम्मेदार, संवेदनशील तथा आत्मविश्वासी व्यक्ति बनने की दिशा में प्रेरित करती हैं। यह समारोह विद्यालय की समग्र शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिचायक बना, जहाँ शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ सांस्कृतिक चेतना, रचनात्मकता, चरित्र निर्माण और शाश्वत जीवन-मूल्यों को समान महत्त्व दिया जाता है। विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, विचारों को अभिव्यक्त करने, भारतीय विरासत का उत्सव मनाने और सामूहिक प्रयासों की शक्ति को समझने का सार्थक अवसर मिला।
प्रत्येक प्रस्तुति और प्रत्येक संदेश ने इस विश्वास को सुदृढ़ किया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है। शिक्षा विद्यार्थियों को जीवन की जटिलताओं का सामना विवेक, धैर्य, संवेदनशीलता और उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण के साथ करने के लिए तैयार करती है। यही वह आधार है, जिस पर आत्मविश्वासी व्यक्तित्व, सशक्त नेतृत्व और उत्कृष्ट भविष्य का निर्माण होता है।


