HomeUncategorized271 वर्ष प्राचीन हनुमान चालीसा की पांडुलिपि का लोक समर्पण

271 वर्ष प्राचीन हनुमान चालीसा की पांडुलिपि का लोक समर्पण

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। शारदा रोड स्थित प्राचीन श्री राधा-कृष्ण मंदिर में गोस्वामी तुलसीदास रचित श्री हनुमान चालीसा की लगभग 271 वर्ष प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपि का दर्शन व लोक समर्पण उत्सव धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में डॉ. पंकज झा के निर्देशन में उनके शिष्य समूह ने स्वस्तिवाचन के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ किया।

आयोजक पंडित शंकर दत्त ब्रह्मा देवी संस्कृति विरासत एवं इतिहास समीक्षा संस्थान के अध्यक्ष प्रो. देवेश चंद्र शर्मा ने बताया कि यह दुर्लभ पांडुलिपि संस्थान के संग्रहालय में संरक्षित है। वर्तमान प्रचलित चालीसा और इस पांडुलिपि के कुछ दोहों में अंतर है, जिस पर अवधी विद्वानों द्वारा समीक्षा की आवश्यकता है। संस्थान के पास हनुमान अष्टक और हनुमान बाहुक की मूल पांडुलिपियां भी सुरक्षित हैं। विश्व हिंदू पीठ के अध्यक्ष महंत आचार्य मदन ने कहा कि जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य का ‘सब पर राम राय सिर ताजा’ दोहे वाला कथन इस प्राचीन पांडुलिपि से सही सिद्ध होता है।

इस अवसर पर शास्त्रीय गायक पवनेश गौड़ और उमा भार्गव ने भजन प्रस्तुत किए। संस्थान की ओर से डॉ. कपिल धवन को विशेष वाल्मीकि रामायण सम्मान दिया गया। पांडुलिपि की प्रकाशित प्रतियां प्रसाद के रूप में वितरित की गईं। कार्यक्रम में संरक्षक डॉ. लोकेश चंद्र शर्मा, महंत पंडित अशोक शर्मा, मनोज शर्मा, पंकज शर्मा, ज्योति शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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