Homeमध्य प्रदेशइंदौर"युद्ध का विकल्प युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और शांति है":

“युद्ध का विकल्प युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और शांति है”:

श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति द्वारा अखिल भारतीय कविता प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान

 * विजेताओं को मिला ‘सुश्री कांति भार्गव उत्कृष्ट कृति सम्मान’

 * देशभर से प्राप्त 130 प्रविष्टियों में श्रुति शर्मा प्रथम, वरुण सिंह (हैदराबाद) द्वितीय और सीमा धोके रही तृतीय स्थान पर

नित्य संदेश, इंदौर। श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर के तत्त्वावधान में “युद्ध की विभीषिका – एक काव्य दृष्टि” विषय पर आयोजित अखिल भारतीय कविता लेखन प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण समारोह रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को समिति के शिवाजी भवन में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने एक स्वर में संदेश दिया कि युद्ध केवल सीमाओं का संघर्ष नहीं है, बल्कि यह मानवता, विकास और सामाजिक व्यवस्था पर गहरा आघात है।

कार्यक्रम में प्रतियोगिता के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय विजेताओं को ‘सुश्री कांति भार्गव उत्कृष्ट कृति सम्मान’ से अलंकृत किया गया। यह सम्मान सुश्री अंबिका भार्गव (संस्थापक—एकात्मता अभियान एवं क्विंडम लाइफस्टाइल मीडिया वर्ल्ड) द्वारा प्रायोजित है, जिसका उद्देश्य साहित्यिक सृजनशीलता के माध्यम से युद्ध की गंभीर मानवीय त्रासदी पर विचार-विमर्श और जनचेतना को बढ़ावा देना है।

युद्ध और मानवीय त्रासदी पर वक्ताओं के विचार:

समारोह की मुख्य अतिथि सुश्री अंबिका भार्गव (आर्किटेक्ट एवं भू-राजनीतिक एक्टिविस्ट) ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक युद्ध तकनीक और उन्नत हथियार प्रणालियों ने युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। आज आवासीय क्षेत्र और निर्दोष नागरिक सबसे अधिक असुरक्षित हैं। युद्ध परिवारों को उजाड़ता है, बच्चों को शिक्षा व सुरक्षित बचपन से वंचित करता है तथा महिलाओं और बुजुर्गों को असहनीय पीड़ा देता है। उन्होंने कूटनीति, नैतिक उत्तरदायित्व और शांति के प्रयासों को प्राथमिकता देने पर बल दिया।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे समिति के प्रधानमंत्री श्री अरविंद जवलेकर ने कहा कि युद्ध से अपार जन-धन की हानि होती है और विकास की प्रक्रिया अवरुद्ध हो जाती है। समाज में नागरिक जागरूकता बढ़ाना और समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान खोजना आज की महती आवश्यकता है।

संस्कृति मंत्री डॉ. पदमा सिंह ने कहा कि कविता समाज की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने और नैतिक उत्तरदायित्व का बोध कराने का सशक्त माध्यम है।

प्रतियोगिता के परिणाम:

 * प्रथम पुरस्कार: श्रुति शर्मा

 * द्वितीय पुरस्कार: वरुण सिंह (हैदराबाद)

 * तृतीय पुरस्कार: सीमा धोके

 * सांत्वना पुरस्कार: अनिल ओझा, कल्याणी गुप्ता (कृति) एवं ओमिशा प्रजापत

130 प्रविष्टियाँ और निष्पक्ष मूल्यांकन:

कार्यक्रम के आयोजक एवं परीक्षा व शिक्षा मंत्री श्री उमेश पारेख ने बताया कि प्रतियोगिता के लिए गूगल फॉर्म व ई-मेल के जरिए सिक्किम, हैदराबाद, पटना, ठाणे, चंडीगढ़, भोपाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 130 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं, जिनमें सेना के जवानों की रचनाएँ भी शामिल थीं। पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु इंदौर से बाहर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन कराया गया।

कार्यक्रम की झलकियाँ:

कार्यक्रम का शुभारंभ अर्थ मंत्री सीए श्री राजेश शर्मा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। अनुसंधान मंत्री डॉ. पुष्पेंद्र दुबे ने अतिथियों का सूत की मालाओं से स्वागत किया। मंच संचालन श्री उमेश पारेख ने किया तथा अंत में प्रकाशन मंत्री श्री अनिल भोजे ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और निर्णायकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त  डॉ..मेजर मेहता ( ए.के.एस.), डॉ. सुरेंद्र कुमार  सक्सेना, ज्योति जैन, रविंद्र जोशी, विजय खंडेलवाल, अखिलेश राव, श्याम सिंह सहित अनेक गणमान्य प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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