नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के नंदलाल बोस सुभारती कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स एंड फैशन डिजाइन के ललित कला विभाग द्वारा प्रतिष्ठित 14वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी “द लैंग्वेज ऑफ विजुअल आर्ट – 2026 ” का भव्य आयोजन राजा रवि वर्मा आर्ट गैलरी में किया गया।
प्रदर्शनी का उद्घाटन डॉ . हिमानी अग्रवाल (सदस्य, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग) द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विनय कुमार मित्तल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) प्रो. (डॉ.) शल्या राज तथा डीन एवं प्राचार्य प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस कला प्रदर्शनी में विभाग के प्राध्यापकों तथा बी.एफ.ए., एम.एफ.ए. एवं पीएच.डी. के विद्यार्थियों द्वारा सृजित उत्कृष्ट कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में चित्रकला, मूर्तिकला एवं फोटोग्राफी सहित विभिन्न कला माध्यमों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को प्रभावित किया। प्रदर्शित कलाकृतियों में कलाकारों की सृजनात्मकता, कल्पनाशीलता, तकनीकी दक्षता तथा समकालीन कला दृष्टिकोण की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिली। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण प्रदर्शनी की कैटलॉग का विमोचन रहा, जिसमें प्रदर्शनी में प्रस्तुत कलाकृतियों एवं कलाकारों के रचनात्मक योगदान को संकलित किया गया।
ललित कला विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पूजा गुप्ता ने प्रदर्शनी के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की तथा प्राध्यापकों और विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा, समर्पण एवं रचनात्मक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने, कलात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने तथा कला एवं संस्कृति के प्रति रुचि विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. वंदना तोमर, डॉ. कृष्ण कुमार, लकी त्यागी, डॉ. सोनल भारद्वाज, डॉ. अंशु श्रीवास्तव, डॉ. आशीष मिश्रा, डॉ. सनी, डॉ. पवनेंद्र तिवारी, दिवाकर बिष्ट, लक्ष्य कुमार एवं सुश्री प्रियंका सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे। 14वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी “द लैंग्वेज ऑफ विजुअल आर्ट – 2026” कला, संस्कृति एवं सृजनात्मकता का एक उत्कृष्ट उत्सव साबित हुई। इस आयोजन ने विश्वविद्यालय में कलात्मक नवाचार, रचनात्मक अभिव्यक्ति तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की दिशा में ललित कला विभाग की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया।


