नित्य संदेश ब्यूरो
बिजनौर। स्वस्थ समाज का निर्माण केवल अस्पतालों और दवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए जन-जागरूकता, स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित पेयजल और स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार व्यवहार भी उतना ही आवश्यक है। इसी सामाजिक सोच को केंद्र में रखते हुए चंदक स्थित सुभारती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस परिसर में संचालित डॉ. प्रफुल्ल चंद्र राय सुभारती कॉलेज ऑफ फार्मेसी, बिजनौर में राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह के अंतर्गत 16 से 22 अक्टूबर तक सप्ताह व्यापी कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाना तथा फार्मेसी शिक्षा को समाज सेवा से जोड़ना रहा।
सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य परीक्षण, स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, जल प्रबंधन, जल की गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण और औषधियों के विवेकपूर्ण उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष गतिविधियां आयोजित की गईं। संस्थान की पहल के अंतर्गत ग्राम खुराहेरी, कबूलपुर, रायपुर, किशनपुर, दौलतपुर, नसीरपुर और बुडगरा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का अभाव कई बार सामान्य बीमारियों को गंभीर रूप दे सकता है। समय पर स्वास्थ्य परीक्षण, स्वच्छता, संतुलित जीवनशैली और दवाओं का सही तरीके से सेवन अनेक स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी उद्देश्य से आयोजित जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर योग्य चिकित्सकीय सलाह लेने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में यह विचार भी प्रमुखता से सामने आया कि फार्मासिस्ट की भूमिका केवल दवा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। दवाओं के सुरक्षित उपयोग, उनकी उचित खुराक, संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी और रोगाणुरोधी दवाओं के जिम्मेदार इस्तेमाल के प्रति लोगों को जागरूक करना भी फार्मासिस्ट के सामाजिक दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह के अवसर पर कॉलेज में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, पोस्टर प्रस्तुतीकरण और रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की गईं, जिनमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस) के बढ़ते खतरे, दवाओं के अनावश्यक इस्तेमाल के दुष्परिणाम और स्वास्थ्य सेवाओं में फार्मासिस्ट की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। रोगाणुरोधी प्रतिरोध आज वैश्विक स्वास्थ्य के सामने एक गंभीर चुनौती है। चिकित्सकीय सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेना, निर्धारित अवधि से पहले दवा बंद कर देना अथवा जरूरत के बिना इनका इस्तेमाल करना इस समस्या को बढ़ा सकता है। ऐसे में विद्यार्थियों के माध्यम से समाज तक सही जानकारी पहुँचाने की पहल भविष्य के जिम्मेदार स्वास्थ्य पेशेवर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर संस्थान के निदेशक सरदार अहमद ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य, स्वच्छ जल और स्वच्छ पर्यावरण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। जल की गुणवत्ता की अनदेखी अनेक बीमारियों का कारण बन सकती है, जबकि जल का विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण वर्तमान तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने ‘जल ही जीवन है’ का संदेश देते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जल की बर्बादी रोकने, स्वच्छता अपनाने और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने फार्मेसी के विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अर्जित ज्ञान को केवल अपनी शैक्षणिक प्रगति तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए उपयोग में लाएँ।
इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) गणेश प्रसाद मिश्रा, कुलसचिव के.पी. सिंह तथा प्रो. (डॉ.) साजिद अली अतिरिक्त कुलसचिव, धनीराम राजपूत,भुवनेश्वर कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में फार्मेसी विभाग के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। सप्ताह भर आयोजित गतिविधियों ने विद्यार्थियों को स्वास्थ्य जागरूकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर प्रदान किया।
राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह की यह पहल इस विचार को रेखांकित करती है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि उस ज्ञान से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है। जब फार्मेसी के विद्यार्थी ग्रामीण समुदायों तक स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाते हैं, सुरक्षित औषधि उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं और जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं, तब उनका योगदान कक्षा-कक्ष से आगे बढ़कर जनकल्याण का माध्यम बनता है।


