
एडवोकेट शाहीन परवेज
नित्य संदेश। फारूक अब्दुल्ला का यह कहना कि “पाकिस्तान ने कश्मीर के मुद्दे को ज़िंदा रखा और दिल्ली की नीयत नेक नहीं है” बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है।
मेरा फारूक अब्दुल्ला से सीधा सवाल है—आखिर पाकिस्तान ने कश्मीरियों को बचाने के नाम पर ऐसा क्या किया है, जिसका श्रेय उसे दिया जा रहा है?
पाकिस्तान द्वारा भारत में आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने और सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के मामले केवल राजनीतिक आरोपों तक सीमित नहीं रहे हैं। भारत में हुए अनेक आतंकवादी हमलों में पाकिस्तान-आधारित आतंकवादी संगठनों की भूमिका जांच और साक्ष्यों के आधार पर सामने आई है। आतंकवाद के कारण भारत ने अपने वीर जवानों और निर्दोष नागरिकों को खोया है। ऐसे में पाकिस्तान को कश्मीरियों का रक्षक बताना उन शहीदों के बलिदान और पीड़ित परिवारों के दर्द का अपमान है।
फारूक अब्दुल्ला को यह भी याद रखना चाहिए कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को हटाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में विकास, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, आतंकवाद पर अंकुश लगाने और सामान्य जनजीवन बहाल करने के लिए अनेक कदम उठाए गए।
आज जम्मू-कश्मीर में पर्यटन, बुनियादी ढाँचे, सड़क निर्माण, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी भर्तियों और विकास परियोजनाओं के माध्यम से लोगों को अवसर उपलब्ध कराने पर भी काम हुआ है। इन प्रयासों और उपलब्धियों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, न कि बिना पर्याप्त आधार के केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाए जाने चाहिए। लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन आलोचना तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।


