नित्य संदेश।पूरा विश्व ऊर्जा संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, तो कही दो देशों के बीच चलते युद्ध के कारण अन्य देश ऊर्जा संसाधनों की बढ़ती कीमत को झेल रहे है । कुछ दिनों पहले भारत में बढ़ती पेट्रोल डीजल की कीमत ओर गैस की किल्लत को देखते हुए पेट्रोल पंप ओर गैस एजेंसी पर लंबी कतारे देखी गई , लेकिन जैसे ही घूमने , मस्ती मारने या यूं कहे नए नए चोंचले शुरू करने की बात आती है हम सबसे आगे हो जाते है ।
नवरात्रि के ये दिन गुजरात को बहुत ही सुंदर रंग से रंग देते है ये रंग रात्रि की कालिमा दूर करने तक ठीक किन्तु जब ये भौर को भी प्रदूषित करने लगे तो क्या हम सभी को एक बार रुक कर नहीं सोचना चाहिए । सुबह 4 बजे जब प्रकृति अपनी सुन्दरता बिखरने को तैयार है हम गाड़ियों के शोर को भौंर का कलरव कैसे कह सकते है । ओर उसे अपना स्टेटस कैसे मान सकते है ।
यह बहुत विचारणीय बात है कि प्रकृति का विनाश करके हम एक पेड़ मां के नाम कैसे लगा सकते है ?
मानवीय ऊर्जा जो कि देश की अमूल्य पूंजी है लगातार इस तरह अपने आपको व्यय करती ही जा रही जो प्राकृतिक ऊर्जा के साथ – साथ स्वयं का हास करने पर उतारू हैं।
-जयमनी
मनीषा


