नित्य संदेश। आज दशहरे के पावन पर्व पर सुबह 3:45 बजे उठकर मैंने अपने गांव बढ़ेडी नागल में लगभग 8 किलोमीटर की पदयात्रा की। यह केवल पैदल चलना नहीं था, बल्कि अपने बचपन की यादों, गांव की मिट्टी और जीवन के पुराने अनुभवों से दोबारा जुड़ने का एक खूबसूरत अवसर था।
सुबह की शुरुआत और बचपन की यादें!
सुबह-सुबह अपने घर से निकलकर मैं नागल रेलवे स्टेशन पहुंचा। रेलवे स्टेशन के पास ही जनता इंटर कॉलेज है, जहां मैंने कक्षा 6 की पढ़ाई की थी। वहां पहुंचते ही बचपन की यादें ताजा हो गईं। मन अनायास ही उन दिनों में लौट गया, जब जीवन सरल था और सपने बड़े हुआ करते थे।
गांव की गलियों से अपने खेतों तक!
जनता इंटर कॉलेज से आगे बढ़ते हुए मैं मीरपुर रेलवे फाटक से होकर सहारनपुर-मुजफ्फरनगर रोड पर पहुंचा। वहां से अपने खेत यानी चक पर गया। कुछ देर खेत में बैठकर प्रकृति के सान्निध्य का आनंद लिया। खेत की मिट्टी और गांव का शांत वातावरण मन को एक अलग ही सुकून दे रहा था। इसके बाद मैं ताजपुर रोड स्थित अपने दूसरे चक पर पहुंचा। वहां से आगे बढ़ते हुए डिगोली रोड पर स्थित श्मशान घाट गया। श्मशान घाट पर कुछ देर शांत बैठा। ऐसी जगह पर पहुंचकर जीवन की नश्वरता का एहसास होता है। मनुष्य जीवन में धन, पद, प्रतिष्ठा और अहंकार के पीछे भागता रहता है, लेकिन अंततः जीवन का सत्य यही है कि सब कुछ यहीं छूट जाता है। इसलिए जीवन में जितना संभव हो, प्रेम, सेवा, सद्भाव और परोपकार को महत्व देना चाहिए। श्मशान घाट से सीधे सहारनपुर रोड होते हुए थाने के सामने से गुजरकर अपने घर वापस आ गया।
आज की यह 8 किलोमीटर की पदयात्रा मेरे लिए केवल शारीरिक गतिविधि नहीं थी। यह अपने बचपन को याद करने, अपनी जड़ों से जुड़ने, प्रकृति के करीब रहने और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने की एक छोटी-सी यात्रा थी। दशहरे का पर्व हमें भीतरी बुराइयों पर विजय पाने की प्रेरणा देता है। आइए, हम अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और द्वेष का अंत करके प्रेम, करुणा और मानवता को अपने जीवन का आधार बनाएं।
मेरा संदेश:
गांव की मिट्टी से जुड़िए, प्रकृति के साथ चलिए, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखिए और जीवन को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के कल्याण के लिए भी जिएं।
Dr Anil Nausaran
Cyclomed Fit India
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