नित्य संदेश। आज विजय दशमी है। अधर्म पर धर्म की, असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक। हर साल हम खुले मैदान में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलाते हैं, तालियां बजाते हैं, घर लौट आते हैं। लेकिन क्या सच में रावण जलता है?
राम ने रावण को इसलिए नहीं मारा था कि वो ब्राह्मण था या विद्वान था, इसलिए मारा था कि वो अहंकारी था, अत्याचारी था। उसके पास ज्ञान था, शक्ति थी, सोने की लंका थी, लेकिन चरित्र नहीं था। और आज हमारे समाज में हर तरफ ऐसे ही रावण घूम रहे हैं।
कभी सोचा है, आज का रावण कौन है?
आज का रावण है दहेज के लिए बेटी को जलाने वाला लालच।
आज का रावण है मिलावट करने वाला, नशा बेचने वाला व्यापारी।
आज का रावण है सोशल मीडिया पर बैठकर झूठ फैलाने वाला, नफरत परोसने वाला।
आज का रावण है रिश्वत लेने वाला, और काम के बदले इज्जत मांगने वाला।
आज का रावण है वो प्रेमी जो प्रेम के नाम पर हत्या कर देता है – जैसे मेरठ में हमने अभी देखा।
हम हर साल 30 फीट का पुतला जलाते हैं, लेकिन मन के अंदर बैठे 3 इंच के अहंकार, क्रोध, लोभ और वासना के पुतले को नहीं जला पाते।
विजय दशमी सिर्फ रावण दहन नहीं, आत्म-मंथन है।
राम बनना आसान नहीं है। राम ने 14 साल वन में बिताए, पिता के वचन के लिए राजपाट छोड़ा, तब जाकर वो मर्यादा पुरुषोत्तम बने। हमारे अंदर थोड़ी सी तकलीफ आते ही हम मर्यादा भूल जाते हैं।
इस दशहरे पर एक प्रण लें।
एक बुराई को जलाने का प्रण। अगर हर व्यक्ति इस दशहरे पर अपनी एक बुराई – चाहे वो झूठ बोलना हो, गुस्सा करना हो, किसी का हक मारना हो – को जलाने का संकल्प ले ले, तो अगला दशहरा सच में विजय का पर्व होगा। वरना हर साल की तरह इस साल भी हम रावण जलाएंगे, और कल सुबह फिर उसी रावण को अपने अंदर जिंदा पाएंगे।
बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न हो, चाहे उसके दस सिर क्यों न हों, अंत में जीत अच्छाई की ही होती है। यही विजय दशमी का संदेश है।
आप सभी को विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। अधर्म पर धर्म की जीत हो।
सपना सीपी साहू
– समाचार संपादिका


