नित्य संदेश ब्यूरो
खालिद इकबाल
जानीखुर्द। क्षेत्र का कस्बा सिवाल खास कभी अपनी जीवंत और भव्य रामलीला के लिए आसपास के इलाकों में पहचाना जाता था। बीच बाजार स्थित मंदिर के प्रांगण में हर साल नवरात्रि आते ही जो ढोलक की थाप और संवादों की गूंज सुनाई देती थी, वह अब बीते दिनों की बात बन चुकी है। कस्बे की इस पुरानी परंपरा पर दो ऐसे दिग्गजों के जाने के बाद ताला लग गया, जिनकी अदाकारी के बिना लोग रामलीला की कल्पना भी नहीं करते थे।
गौरतलब है कि कस्बा सिवाल खास निवासी हरवीर सिंह और हरपाल शर्मा रामलीला की जान थे। प्रत्येक वर्ष मंच पर जब हरवीर सिंह हनुमान के रूप में अवतरित होते थे, तो उनका समर्पण और अभिनय दर्शकों में भक्ति भाव भर देता था। वहीं दूसरी ओर, हरपाल शर्मा जब रावण का किरदार निभाते हुए मंच पर गरजते थे, तो उनका दमदार अभिनय और संवाद अदायगी पूरे पंडाल में सन्नाटा खींच देती थी। इन दोनों कलाकारों की जुगलबंदी ही सिवाल खास की रामलीला का मुख्य आकर्षण थी। लेकिन काल के चक्र ने इस सांस्कृतिक विरासत को गहरा झटका दिया।
पांच साल में दोनों कलाकार हो गए विदा
वर्ष 2013 में रावण का किरदार निभाने वाले हरपाल शर्मा का निधन हो गया। कस्बे के लोग इस क्षति से उबर भी नहीं पाए थे कि वर्ष 2018 में हनुमान का किरदार रचने वाले हरवीर सिंह भी दुनिया को अलविदा कह गए। इन दोनों मुख्य स्तंभों के ढहते ही कस्बे के सांस्कृतिक मंच की रीढ़ टूट गई। दोनों दिग्गज कलाकारों के देहांत के बाद सिवाल खास के बीच बाजार स्थित मंदिर पर रामलीला का मंच सजना पूरी तरह बंद हो गया।
मंच पर आज वीरानी
जो मंच कभी हफ्तों तक रामकथा और कलाकारों के जीवंत अभिनय से गुलजार रहता था, वहां अब वीरानी छाई रहती है। अब कस्बे में रामलीला का मंचन तो समाप्त हो चुका है, बस रस्म अदायगी के तौर पर विजयादशमी के दिन रावण का पुतला दहन कर दिया जाता है। बुजुर्ग आज भी मंदिर के खाली मंच को देखकर उन दिनों को याद करते हैं, जब हरवीर और हरपाल की जोड़ी रंगमंच पर इतिहास रचती थी।


