
ठाकुरजी को जड़ नहीं, चेतन भाव से देखें, भक्त के प्रेम से बदल जाता है भगवान का स्वरूप —इंद्रेश जी महाराज
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। ‘मुकुंद माधव हरि, हरि बोल’ की धुन गूंजते ही पूरा पंडाल भक्ति और उल्लास में झूम उठा। हर तरफ ऐसा नजारा था, मानो साक्षात श्रीकृष्ण भक्तों के बीच आकर बांसुरी की धुन पर सबको अपने रंग में रंग रहे हों। शरद पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर ही पंडाल में रास का उल्लास छा गया। भजन की लय पर थिरकते भक्त सुध-बुध खोकर कृष्ण भक्ति के रस में डूब गए। किसी के कदम थमने का नाम नहीं ले रहे थे, तो कोई दोनों हाथ उठाकर प्रभु के प्रति अपनी श्रद्धा जता रहा था। पूरा माहौल कृष्णमय हो गया और हर ओर भक्ति, प्रेम और आनंद की अनूठी छटा बिखर गई। इन्द्रेश जी महाराज की श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कुछ ऐसा ही दृश्य दिखाई दिया।
कथा सुनाते हुए महाराज जी ने कहा ‘जिस दिन हमारे चित्त का जड़त्व खत्म हो जाएगा, उस दिन ठाकुरजी हमें जड़ नहीं, चेतन दिखाई देंगे। भगवान हिलते-डुलते नहीं, ऐसा नहीं है, बल्कि हमारे भीतर का भाव उन्हें देखने का नजरिया तय करता है।’ उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों के भाव और प्रेम से प्रसन्न होते हैं। भक्त की श्रद्धा इतनी गहरी हो कि वह भगवान को अपने बीच जीवंत अनुभव करने लगे, यही भक्ति की शक्ति है।
आयोजक आशीष गोयल ने कहा कि परिवार में गुरु परंपरा और भागवत कथा करवाने की प्रथा बरसों से चली आ रही है। यह गुरुदेव और श्रीजी की कृपा ही है कि हम यह कथा करा पा रहे हैं। यह कथा सभी के लिए निशुल्क है। सभी शहरवासी आकर इसका लाभ ले सकते हैं। आयोजक अमृता गोयल ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मेरा जन्म और फिर विवाह ऐसे परिवार में हुआ वहां मुझे गुरु सेवा और भागवत कथा करवाने का मौका मिल रहा है।
एमआर-10 स्थित स्टार चौराहे पर करीब 10 एकड़ क्षेत्र में आयोजित कथा प्रतिदिन शाम 4 से 7 बजे तक हो रही है। श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश निशुल्क है। आयोजन स्थल पर बैठने, धूप और बारिश से बचाव, पेयजल, मेडिकल सहायता और सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। कथा का प्रसारण 12 बड़ी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से भी किया जा रहा है।
भक्त के प्रेम से ठाकुरजी ने किए सफेद बाल, संतों का अपमान न करने की दी सीख—
महाराज ने उदयपुर के राजघराने से जुड़ा एक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बार मंदिर के पुजारी ने ठाकुरजी को पहनाई जाने वाली माला स्वयं पहन ली थी। बाद में वही माला राजा को पहना दी। माला में पुजारी का सफेद बाल देखकर राजा ने व्यंग्य में पूछा कि क्या ठाकुरजी के बाल भी सफेद हो गए हैं। पुजारी ने घबराहट में हां कह दिया। अगले दिन राजा ने ठाकुरजी का मुकुट उतरवाकर उनके बाल देखने चाहे तो वास्तव में उनके बाल सफेद दिखाई दिए। यह देखकर राजा उनके चरणों में गिर पड़ा। महाराज ने बताया कि ठाकुरजी ने स्वप्न में राजा को संतों, वैष्णवों, भक्तों और ब्राह्मणों का अपमान न करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों की चिंता दूर करने के लिए भी लीला करते हैं।
नरसी मेहता ने महादेव से मांगा वही, जो उन्हें सबसे प्रिय था—
कथा में महाराज ने नरसी मेहता का प्रसंग आगे बढ़ाते हुए बताया कि जब महादेव ने उनसे वरदान मांगने को कहा तो नरसी मेहता ने अपने लिए कुछ नहीं मांगा। उन्होंने कहा कि प्रभु, आपको जो सबसे प्रिय है, वही मुझे दे दीजिए। महादेव उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें रासलीला के दर्शन कराए। महाराज ने कहा कि सच्चा भक्त भगवान के सामने अपनी इच्छाओं की सूची नहीं रखता, बल्कि अपना जीवन उनके भरोसे छोड़ देता है। हमें भी भगवान से यही प्रार्थना करनी चाहिए कि वे हमारे लिए जो उचित समझें, वही करें।
भगवान के प्रति समर्पण से दूर होती है चिंता—
महाराज ने कहा कि मनुष्य अपनी हर जिम्मेदारी स्वयं उठाने की कोशिश करता है, इसलिए परेशान होता है। जब वह अपना जीवन भगवान को समर्पित कर देता है, तब परिस्थितियों को स्वीकार करने की शक्ति मिलती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान के प्रति विश्वास रखने और संतों का सम्मान करने का आग्रह किया।
महादेव की कृपा से लगता है कथा में मन—
महाराज जी को कई खत भी आएं जिसमें से एक पढ़ते हुए उन्होंने कहा छोटी सी लाली है भोली भाली है कहती है कथा में मन नहीं लगता है पर मम्मी-पापा ले आते हैं। कुछ ऐसा करें कि कथा में मन लगे और उससे ज्यादा पढ़ाई में मन लगे। उन्होंने कहा कि पढ़ाई में तो मन लगाने से लग जाता है पर कथा में मन महादेव की कृपा से ही लगता है। कभी कभी कथा का हिस्सा बनती रहो किस पल कथा का कोई भाव मन को छू जाएगा और कथा में मन लगने लगेगा।


