HomeUncategorizedरोबो असेंड कार्यशाला में विद्यार्थियों ने समझी रोबोटिक्स के घटकों की कार्यप्रणाली

रोबो असेंड कार्यशाला में विद्यार्थियों ने समझी रोबोटिक्स के घटकों की कार्यप्रणाली

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के सर छोटूराम इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (SCRIET) में आयोजित ‘रोबो असेंड’ पीयर-टू-पीयर लर्निंग कार्यशाला के आठवें दिन विद्यार्थियों को रोबोटिक्स में उपयोग होने वाले मूलभूत घटकों और उनकी कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। छात्र वक्ता रविंद्र नाथ मिश्रा ने बताया कि किसी भी रोबोट को प्रभावी ढंग से काम करने के लिए सेंसर, कंट्रोलर, मोटर, पावर सप्लाई और एक्चुएटर जैसे घटकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने समझाया कि सेंसर रोबोट की आंख और कान की तरह काम करते हैं, जो आसपास की वस्तुओं, दूरी, तापमान और अन्य परिस्थितियों से संबंधित जानकारी जुटाते हैं। माइक्रोकंट्रोलर या प्रोसेसर सेंसर से प्राप्त आंकड़ों को संसाधित कर निर्देश देता है, जबकि मोटर और एक्चुएटर उन निर्देशों के अनुसार रोबोट की गति और गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। पावर सप्लाई सभी इलेक्ट्रॉनिक घटकों को आवश्यक ऊर्जा उपलब्ध कराती है। वहीं, मोटर ड्राइवर कंट्रोलर के कम शक्ति वाले संकेतों के आधार पर मोटरों को आवश्यक विद्युत शक्ति प्रदान करने में मदद करता है।

विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि इन सभी घटकों के बीच समन्वय से रोबोट अपने आसपास के वातावरण को समझने, निर्णय के अनुसार प्रतिक्रिया देने और निर्धारित कार्यों को पूरा करने में सक्षम होता है। उदाहरण के तौर पर, बाधा से बचने वाले रोबोट में दूरी मापने वाला सेंसर सामने मौजूद वस्तु का पता लगाता है। कंट्रोलर इस जानकारी का विश्लेषण करके मोटर को रुकने या दिशा बदलने का निर्देश देता है। इस प्रकार विद्यार्थियों को रोबोटिक्स के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ उसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समझने का अवसर मिला।

संस्थान के निदेशक प्रो. नीरज सिंघल ने कहा कि रोबोटिक्स और ऑटोमेशन आधुनिक इंजीनियरिंग के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों में तकनीकी समझ, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रयोग आधारित शिक्षा के माध्यम से नई तकनीकों को सीखने और उपयोगी प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

संस्थान के एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर डॉ. केपी सिंह ने कहा कि पीयर-टू-पीयर लर्निंग विद्यार्थियों को आपसी सहयोग से सीखने, अपने विचार साझा करने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान करती है। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. शिवम गोयल ने कहा कि रोबोटिक्स जैसे व्यावहारिक विषयों में पियर टू पियर पद्धति से विद्यार्थियों की अवधारणाएं स्पष्ट होती हैं और उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। इस दौरान योगेश कौशिक और पीयूष बत्रा की भूमिका रही। छात्र आयोजन टीम से अनन्या, ऋतिक कुमार अग्रहरी, शिखर तिवारी, सत्यम कुमार और प्रखर गंगवार भी उपस्थित रहे।

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