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सुभारती में छह दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों ने सीखी पायथन प्रोग्रामिंग, एआई और ऑटोमेशन की बारीकियां

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की ओर से आयोजित छह दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कार्यशाला का आयोजन सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग के वाइस प्रिंसिपल डॉ. श्रवण कुमार गर्ग के मार्गदर्शन में किया गया। इसमें सीईटीपीए इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड के विशेषज्ञ मोहम्मद बिलाल ने विद्यार्थियों को पायथन प्रोग्रामिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित एप्लीकेशन और ऑटोमेशन के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की पायथन प्रोग्रामिंग की बुनियादी समझ को मजबूत करना और उन्हें एआई आधारित एप्लिकेशन विकसित करने में इस तकनीक के उपयोग से परिचित कराना था। छह दिनों तक चले प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोगों को समझने और स्वयं तकनीकी समाधान विकसित करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान सैद्धांतिक जानकारी के साथ प्रायोगिक अभ्यास पर विशेष ध्यान दिया गया। इससे विद्यार्थियों को कक्षा में सीखे गए सिद्धांतों को वास्तविक तकनीकी अनुप्रयोगों से जोड़ने में मदद मिली। कार्यशाला ने विद्यार्थियों को एआई और मशीन लर्निंग के तेजी से बढ़ते क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों को समझने तथा उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप अपने कौशल को विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर रिसोर्स पर्सन मोहम्मद बिलाल ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा, “आज के तकनीकी दौर में केवल प्रोग्रामिंग की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस ज्ञान का उपयोग वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए करना भी जरूरी है। पायथन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकें विद्यार्थियों को नए विचारों को साकार करने और उपयोगी एप्लीकेशन विकसित करने के अवसर देती हैं। विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास, जिज्ञासा और रचनात्मक सोच के साथ नई तकनीकों को सीखना चाहिए, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास से सामना कर सकें।”

कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग ने कार्यशाला के सफल आयोजन और विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए मोहम्मद बिलाल के प्रति आभार व्यक्त किया। विभाग ने प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता की भी सराहना की। कार्यशाला का समन्वय इंजीनियर अंशिका शर्मा ने किया। विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे व्यावहारिक एवं कौशल-आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को नवीन तकनीकों से परिचित कराना, उनकी तकनीकी दक्षता बढ़ाना और उन्हें उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है।

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