नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ की ओर से आयोजित युवा वर्ग की शास्त्रीय एवं सुगम संगीत प्रतियोगिता के मेरठ संभाग का आयोजन स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला विभाग में किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित मंच प्रदान करना, उनकी प्रतिभा को पहचान दिलाना तथा भारतीय शास्त्रीय कला परंपरा के प्रति युवाओं को प्रोत्साहित करना रहा। प्रतियोगिता में मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से आए युवा कलाकारों ने गायन, वादन और कथक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियों से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विनय कुमार मित्तल, कला संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा तथा संगीत एवं मंच कला विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भावना ग्रोवर सहित विभिन्न स्थानों से आए विषय विशेषज्ञों एवं गणमान्य निरीक्षकों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थियों ने मधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके निरीक्षक मंडल के सदस्यों को अंगवस्त्र एवं पौधे भेंट कर सम्मानित किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में तबला वादन के लिए गणेश प्रसाद गुप्ता, गजल के लिए उस्ताद इलियास खान, कथक नृत्य के लिए डॉ. मंजू मलकानी तथा शास्त्रीय गायन के लिए राहुल अवस्थी शामिल रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन करते हुए उनकी कला, संगीत की समझ, लय, ताल और प्रस्तुति कौशल का आकलन किया।
शास्त्रीय गायन प्रतियोगिता में भव्य ने राग मधुवंती और अरुण कुमार ने राग भूपाली की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। तबला वादन में रमन कुमार ने तीनताल की प्रस्तुति दी, जबकि रिद्धि ने गिटार पर राग भैरवी एवं भूपाली की धुनें प्रस्तुत कर अपनी संगीत प्रतिभा का परिचय दिया। ठुमरी-दादरा प्रतियोगिता में जयंत कुमार ने राग भैरवी में ‘आया करे जरा कह दो सांवरिया से’ के बोलों पर दादरा प्रस्तुत किया।
भजन गायन प्रतियोगिता में आद्या, आकाश, वंश, राशिका और ज्योति कृष्ण ने भावपूर्ण प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया। वहीं, गजल प्रतियोगिता में अरुण, ऋत्विक शर्मा और राशिका आर्य ने अपनी गायकी से सभी को प्रभावित किया। कथक नृत्य प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने पारंपरिक बंदिशों, तालों और भावाभिनय के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सुंदरता प्रस्तुत की। खुशी सिंह नादरिया ने तीनताल में उठान, गणेश परन, थाट और आमद के साथ अपनी प्रस्तुति आरंभ की तथा ‘डगर बीच कैसे चलूं’ पर भावाभिनय के साथ समापन किया। रिया ने कृष्ण वंदना से प्रस्तुति शुरू करते हुए झपताल में थाट, लड़ी, परन और परमेलू प्रस्तुत किए। उन्होंने ‘सब बन ठन आई’ पर भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ अपना नृत्य पूरा किया। गुन गोयल ने विष्णु वंदना के बाद शिखर ताल में पारंपरिक बंदिशें प्रस्तुत कीं और ‘राह तकत मैं हारी’ पर भावाभिनय से समापन किया।
आरुषी नरूला ने ‘शंकर अति प्रचंड’ से अपनी प्रस्तुति आरंभ की तथा चौताल में पारंपरिक बंदिशें प्रस्तुत करने के बाद ठुमरी के साथ नृत्य का समापन किया। खुशी मल्होत्रा ने सरस्वती वंदना से शुरुआत करते हुए बसंत ताल में थाट, टुकड़े और परन प्रस्तुत किए। उन्होंने ‘काहे रोकत डगर प्यारे’ पर भावाभिनय के साथ अपनी प्रस्तुति पूरी की। सभी कथक प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों से निर्णायकों के समक्ष कड़ी प्रतिस्पर्धा पेश की।
प्रतियोगिता के परिणामों में शास्त्रीय गायन में अरुण कुमार ने प्रथम तथा भव्य ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। ठुमरी गायन में जयंत लोधी प्रथम रहे। तंत्र वाद्य श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। भजन गायन में ज्योति कृष्ण और राशिका ने प्रथम, वंश और आद्या ने द्वितीय तथा आकाश ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। गजल प्रतियोगिता में राशिका आर्य प्रथम, अरुण द्वितीय तथा ऋत्विक शर्मा तृतीय स्थान पर रहे। कथक नृत्य प्रतियोगिता में खुशी मल्होत्रा और आरुषी नरूला को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि गुन गोयल ने द्वितीय और रिया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से डॉ. पवन सिंह तथा मेरठ संभाग की ओर से प्रो. (डॉ.) भावना ग्रोवर ने प्रतियोगिता का कुशलतापूर्वक संचालन एवं समन्वय किया। कार्यक्रम का मंच संचालन सुश्री प्रियंका ठाकुर ने किया। प्रतियोगिता ने युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करने के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रेरक संदेश दिया


