नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक साइंस विभाग में गुरुवार को आयोजित विशेष व्याख्यान में आपराधिक जांच की आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन और फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL), उत्तर प्रदेश के निदेशक डॉ. (प्रो.) आदर्श कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि बीएससी और एमएससी फॉरेंसिक साइंस के उत्तीर्ण एवं अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए जल्द ही नए अवसर और रिक्तियां आने की संभावना है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला और डॉ. आदर्श कुमार के बीच विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक साइंस विभाग तथा FSL उत्तर प्रदेश के मध्य प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण, शोध परियोजनाओं और संयुक्त कार्यशालाओं के अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों की जानकारी हासिल करने और रोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी।
FSL लखनऊ के उपनिदेशक डॉ. अजय श्रीवास्तव और FSL गाजियाबाद के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. अशोक कुमार यादव ने वास्तविक जांचों के उदाहरणों के माध्यम से क्राइम सीन मैनेजमेंट और बैलिस्टिक साक्ष्यों के महत्व को समझाया। उन्होंने वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन, संरक्षण और विश्लेषण की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आपराधिक मामलों की जांच में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
फॉरेंसिक साइंस विभागाध्यक्ष प्रो. बिंदु शर्मा ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस वर्तमान समय में आपराधिक जांच और न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन गया है। विभाग का प्रयास है कि विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और आधुनिक जांच तकनीकों की जानकारी भी मिले। FSL उत्तर प्रदेश के साथ प्रस्तावित एमओयू से विद्यार्थियों को प्रयोगशाला प्रशिक्षण, शोध और विशेषज्ञों के साथ संवाद के नए अवसर मिल सकेंगे। इससे उन्हें अपने कौशल को विकसित करने और फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में बेहतर करियर बनाने में सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों की ओर से तैयार किया गया मॉक क्राइम सीन रहा। डॉ. राजेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में तैयार किए गए इस मॉक क्राइम सीन के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपराध स्थल की जांच और वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया। विद्यार्थियों के पोस्टर और विषय आधारित रंगोली ने भी अतिथियों का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम का आयोजन विभागाध्यक्ष प्रो. बिंदु शर्मा के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में किया गया। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को फॉरेंसिक विज्ञान की व्यावहारिक उपयोगिता, आधुनिक जांच पद्धतियों और इस क्षेत्र में उपलब्ध करियर संभावनाओं की जानकारी मिली।


