
- मोमबत्ती निर्माण की कार्यशाला में सिखाए हुनर के गुर
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। खादी अब सिर्फ सादगी और परंपरा की पहचान नहीं, बल्कि फैशन की दुनिया में अपनी नई जगह बनाने के साथ रोजगार के अवसरों का माध्यम भी बन रही है।
मेरठ में चल रहे मंडलीय खादी ग्रामोद्योग महोत्सव में गुरुवार को इसका अनूठा संगम देखने को मिला। दोपहर में जहां मोमबत्ती निर्माण की कार्यशाला के जरिये लोगों को हुनर सीखने का अवसर मिला, वहीं शाम को रैंप पर खादी के परिधानों ने फैशन का नया अंदाज पेश किया। दिल्ली और आगरा से आई मॉडलों के साथ स्थानीय प्रतिभागियों ने भी फैशन शो में हिस्सा लिया। परंपरा, रचनात्मकता और स्वरोजगार की संभावनाओं से सजे आयोजन में दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रही और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों की भी अच्छी बिक्री हुई।
उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, मेरठ मंडल की ओर से आयोजित वर्ष 2026-27 की मंडलीय खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी में गुरुवार दोपहर दो बजे मोमबत्ती निर्माण की कार्यशाला हुई। कृषि विश्वविद्यालय, सरदार वल्लभभाई पटेल, मोदीपुरम की प्रोफेसर डॉ. रश्मि ने कार्यशाला का संचालन किया। इसमें मेरठ के आम लोगों ने प्रतिभाग किया और मोमबत्ती निर्माण से संबंधित जानकारी हासिल की। इस तरह की कार्यशालाएं लोगों को नए कौशल से जोड़ने के साथ स्वरोजगार की संभावनाओं से परिचित कराने का माध्यम बनती हैं। छोटे स्तर पर उत्पाद तैयार करने का हुनर स्थानीय उद्यमों को आगे बढ़ाने में भी उपयोगी हो सकता है।
शाम छह बजे आयोजित खादी फैशन शो महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा। एकता जैन और शिवानी गौड़ के आयोजन में मॉडलों और प्रतिभागियों ने रैंप वॉक के जरिये अपनी प्रस्तुतियां दीं। दिल्ली और आगरा से आई मॉडलों के साथ स्थानीय प्रतिभागियों ने भी हिस्सा लिया। खादी के परिधानों को आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत कर उन्होंने दिखाया कि यह कपड़ा पारंपरिक पहनावे तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते फैशन के साथ भी कदमताल कर सकता है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला रहीं। उन्होंने प्रतिभागियों और मॉडलों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मॉडलों की रैंप वॉक और कलात्मक प्रस्तुतियां दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहीं। फैशन शो ने महोत्सव की सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा देने के साथ खादी को नए अंदाज में प्रस्तुत किया।
कारीगरों को बाजार, उत्पादों को पहचान
महोत्सव में स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों के उत्पादों की बिक्री भी जारी रही। प्रदर्शनी उनके लिए अपने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने और बाजार में पहचान बनाने का अवसर उपलब्ध करा रही है। खादी और ग्रामोद्योग से जुड़े उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से पारंपरिक कौशल को आगे बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाएं विकसित करने में मदद मिल सकती है।
परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने कहा, “खादी और ग्रामोद्योग के उत्पादों को बाजार से जोड़ना जरूरी है। जब कारीगरों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलता है, तो उनकी मेहनत को पहचान मिलने के साथ बिक्री की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। महोत्सव में कार्यशालाओं और फैशन शो जैसी गतिविधियों के माध्यम से खादी को नए वर्गों तक पहुंचाने और स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।”


