
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में ‘फिल्में कैसे बनती हैं’ विषय पर सात दिवसीय फिल्म निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। अकादमिक ज्ञान और फिल्म निर्माण की वास्तविक कार्यप्रणाली के बीच की दूरी को कम करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। पश्चिम बंगाल के सुप्रसिद्ध फिल्म निर्माता एवं निर्देशक अमलान कुसुम घोष मुख्य प्रशिक्षक के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
कार्यशाला का उद्घाटन कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सुधीर त्यागी, फिल्म निर्देशक अमलान कुसुम घोष, साप्ताहिक प्रभात के संपादक प्रो. अशोक त्यागी, कार्यशाला संयोजक डॉ. संतोष कुमार गौतम, डॉ. आशुतोष वर्मा एवं डॉ. प्रीति सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सुधीर त्यागी ने कहा कि फिल्म निर्माण आज केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों, रचनात्मक अभिव्यक्ति और जनसंचार का एक प्रभावशाली साधन है। डिजिटल युग में युवाओं के लिए फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को पटकथा लेखन, कैमरा संचालन, संपादन और दृश्यात्मक प्रस्तुति की व्यावहारिक समझ प्रदान करती हैं। इससे विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा निखरेगी और वे मीडिया एवं फिल्म उद्योग की व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकेंगे।

कार्यशाला के संयोजक डॉ. संतोष कुमार गौतम ने कहा कि इस कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण की पूरी प्रक्रिया से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना और उनकी रचनात्मक सोच को तकनीकी दक्षता के साथ जोड़ना है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण केवल कैमरे से दृश्य रिकॉर्ड करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए विषय की समझ, प्रभावी पटकथा, सटीक निर्देशन, तकनीकी कौशल और कहानी को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता आवश्यक है। इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को विशेषज्ञ के अनुभव से सीखने, अपनी कल्पनाशीलता को विकसित करने और भविष्य में स्वतंत्र रूप से फिल्म निर्माण करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
उद्घाटन सत्र में मुख्य प्रशिक्षक अमलान कुसुम घोष ने समकालीन सिनेमा में रचनात्मक दृष्टिकोण, प्रभावशाली दृश्यात्मक प्रस्तुति और तकनीकी अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक एवं उपकरणों का प्रभावी उपयोग करते हुए सार्थक और प्रभावशाली कहानियां प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। सत्र में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विजुअल स्टोरीटेलिंग तथा फिल्म उद्योग के बदलते रुझानों पर चर्चा की। सात दिवसीय कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को प्री-प्रोडक्शन प्लानिंग, पटकथा लेखन, कैमरा फ्रेमिंग, लाइटिंग सेटअप, निर्देशन संबंधी निर्णयों और पोस्ट-प्रोडक्शन की विभिन्न प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण के विभिन्न चरणों की समग्र समझ प्रदान करना है।

कार्यक्रम के प्रथम दिवस का समापन पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की सहायक आचार्य डॉ. प्रीति सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कार्यशाला के आयोजन में सहयोग देने के लिए विश्वविद्यालय नेतृत्व, मुख्य प्रशिक्षक अमलान कुसुम घोष, संकाय सदस्यों, छात्र आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन बीएजेएमसी प्रथम वर्ष की छात्रा उमामा अरशद ने किया। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


