
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ।कभी जिनकी सुबह शाम डायलिसिस मशीन की बीप के साथ होती थी, आज उन्हीं कदमों ने तालकटोरा स्टेडियम के ट्रैक पर इतिहास लिख दिया। नई दिल्ली में हुई राष्ट्रीय प्रत्यारोपण खेल प्रतियोगिता-2026 में न्यूटीमा अस्पताल के ट्रांसप्लांट मरीजों ने दिखा दिया कि जिंदगी ट्रांसप्लांट के बाद खत्म नहीं, बल्कि वहीं से शुरू होती है। न्यूटीमा की टीम इस बार मेडल लेकर ही नहीं, एक संदेश लेकर लौटी है।
पोडियम पर मेरठ का परचम –
- मोहम्मद सैफी: कभी कमजोरी से चलना मुश्किल था, आज 100 मीटर दौड़ में सभी को पछाड़कर स्वर्ण पदक जीता।
- आदित्य: 100 मीटर और 500 मीटर दोनों रेस में दो कांस्य पदक अपने नाम किए।
- हर्ष चौधरी: दिमागी खेल कैरम में बाजी मारी और रजत पदक जीता।
- क्रिकेट टीम: नसीम के नेतृत्व में 11 खिलाड़ियों की टीम ने दमदार खेल दिखाकर रजत पदक जीता।
- कबड्डी में कमल और आशीष का दमखम और रस्साकशी में टीम उपविजेता रही।

डॉ. संदीप गर्ग बोले – ये सिर्फ मेडल नहीं, उम्मीद है
न्यूटीमा अस्पताल के निदेशक एवं वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप कुमार गर्ग ने कहा, “ये उपलब्धि सिर्फ पदकों की नहीं है। ये उन हजारों मरीजों के लिए उम्मीद है जो आज भी डायलिसिस पर हैं और सोचते हैं कि जिंदगी रुक गई।” उन्होंने कहा कि सही देखभाल, नियमित दवा, जांच और हेल्दी लाइफस्टाइल से ट्रांसप्लांट मरीज पूरी तरह सामान्य, सक्रिय और आत्मनिर्भर जीवन जी सकते हैं। दौड़ते हुए सैफी और आदित्य ने साबित कर दिया – किडनी मिली तो सिर्फ जान नहीं, जिंदगी का दूसरा चांस भी मिला है।


