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पत्रकारिता से साहित्य की ओर: लियाकत मंसूरी के चार उपन्यास, चार अलग दुनिया

अशोक सोम

नित्य संदेश, मेरठ। खबरों की दुनिया में वर्षों तक सच को शब्द देने वाले वरिष्ठ पत्रकार लियाकत मंसूरी अब साहित्य की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। पत्रकारिता की तेज़ रफ्तार, तथ्यों की कसौटी और समाज को करीब से देखने का अनुभव अब उनके उपन्यासों में उतर रहा है। यही वजह है कि उनके उपन्यास सिर्फ कहानी नहीं लगते, बल्कि ज़िन्दगी के करीब लगते हैं। मंसूरी अब तक चार उपन्यास लिख चुके हैं और हर उपन्यास में उन्होंने एक नया विषय, एक नई दुनिया और एक नया सवाल उठाया है।

1. पहला उपन्यास: ‘मुझे उड़ने दो’ – ऑनर किलिंग पर साहसिक प्रहार

लियाकत मंसूरी का पहला उपन्यास ‘मुझे उड़ने दो’ ऑनर किलिंग जैसे ज्वलंत मुद्दे पर लिखा गया था। साहित्यकारों और कवियों के बीच इसका विमोचन हुआ था और इसे खूब सराहना मिली थी। यह उपन्यास सामाजिक स्थिति पर प्रहार करता है और प्रेम, सम्मान और समाज की रूढ़ियों के बीच फंसे युवाओं की कहानी कहता है। लेखक ने खुद कहा है कि इस उपन्यास में उन्होंने इश्क, प्रेम और इंसान की अंधी भावनाओं जैसे विषयों पर लिखा है।

2. दूसरा उपन्यास: ‘मेरी कहानी और शहनाज़’ – जो पाठक को अंत तक बांधे रखे

उनका दूसरा उपन्यास ‘मेरी कहानी और शहनाज़’ है। समीक्षकों के अनुसार यह ऐसा उपन्यास है जो पढ़ने पर पाठकों को शुरू से आखिरी तक बांधे रखता है। इसमें प्रेम, रिश्तों की उलझन और मानवीय भावनाओं की जटिलता को बेहद करीब से दिखाया गया है।

3. तीसरा उपन्यास: ‘छू लिया आसमां’ – पहले उपन्यास का दूसरा भाग, हैट्रिक पूरी

उनका तीसरा उपन्यास ‘छू लिया आसमां’ है। इससे उन्होंने उपन्यासों की हैट्रिक पूरी की थी। खास बात यह है कि **’छू लिया आसमां’, ‘मुझे उड़ने दो’ का ही दूसरा भाग है**। इसमें अपराध, प्रेम और विश्वासघात का जटिल ताना-बाना है। इसमें अपराध की दुनिया की भयावहता, मानवीय भावनाओं की जटिलता और विश्वासघात के परिणामों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। इस उपन्यास को लेखक ने जिला कारागार मेरठ में वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा को भेंट भी किया था।

4. चौथा उपन्यास: ‘माहिरा’ – कोलाज तकनीक में हिंदी का पहला उपन्यास

उनका चौथा और सबसे चर्चित उपन्यास ‘माहिरा’ है। इसे कोलाज तकनीक में लिखा गया हिंदी का पहला उपन्यास बताया जा रहा है। ‘माहिरा’ एक त्रिकोणीय प्रेम, अपराध और सस्पेंस की कहानी है। इसकी टैगलाइन है – ‘एक गुनाह… एक राज़… एक महिला…’यह उपन्यास BFC Publications से प्रकाशित हुआ है और Google Books व Amazon पर भी उपलब्ध है।

पत्रकार की नज़र, साहित्यकार का दिल

लियाकत मंसूरी की खासियत यही है कि वे कहानी को अखबार की खबर की तरह नहीं, बल्कि इंसान के दर्द, प्रेम, अपराध और समाज की सच्चाई के साथ लिखते हैं। पत्रकारिता ने उन्हें समाज को देखने की नज़र दी और साहित्य ने उस नज़र को भावना दी।

आज के दौर में जब उपन्यास लिखना सबसे कठिन माना जाता है, तब हर साल एक उपन्यास लिखना उनके साहस और लगन को दिखाता है।साहित्य प्रेमियों को अब उनके अगले उपन्यास का इंतज़ार है।

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