
- प्रो. अलका चौधरी ने थाना ब्रह्मपुरी में तहरीर दी, कहा – शिकायत करने पर निलंबित किया, निलंबन रद्द होने के बाद भी ज्वाइन नहीं करने दिया जा रहा
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। कनोहर लाल स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय की प्राचार्या (बिना प्रशासनिक प्रभार) प्रो. अलका चौधरी ने थाना ब्रह्मपुरी में तहरीर देकर महाविद्यालय प्रबंधन, ट्रस्ट सोसाइटी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर निष्पक्ष आपराधिक जांच की मांग की है।
तहरीर में उन्होंने आरोप लगाया है कि वर्ष 2023 से उन्होंने महाविद्यालय में छात्र निधियों की धनराशि के कथित दुरुपयोग, वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं और एक अनुसूचित जाति कर्मचारी के साथ कथित उत्पीड़न को लेकर शिकायतें की थीं। इसके बाद उनके खिलाफ कथित झूठे बयानों के आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई और आपराधिक मामला दर्ज कराने का प्रयास किया गया।
विशेष ऑडिट का हवाला
प्रो. चौधरी के अनुसार, 10 से 12 जून 2024 के बीच राज्य सरकार की ओर से कराए गए विशेष ऑडिट में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आए थे। उन्होंने कहा कि छात्र निधि का उपयोग ट्रस्ट के कार्यक्रमों और अन्य गैर-छात्रहित कार्यों में किए जाने की जांच होनी चाहिए।
निलंबन रद्द, फिर भी ज्वाइनिंग नहीं
तहरीर में कहा गया है कि 23 अप्रैल 2025 को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति ने उनका निलंबन निरस्त कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं करने दिया गया। उनका आरोप है कि इस दौरान किसी सक्षम न्यायालय का कोई प्रभावी स्थगन आदेश नहीं था।
बैंक खातों में हस्ताक्षर बदलने का आरोप
प्रो. चौधरी ने महाविद्यालय के चार HDFC बैंक खातों के हस्ताक्षर प्राधिकरण में उनके ज्वाइन करने से ठीक पहले कथित अनियमित परिवर्तन का भी आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके लिए शासनादेश के विरुद्ध एक परिवर्तित प्रस्ताव बैंक को भेजा गया, जिस पर प्रबंधन के सचिव के हस्ताक्षर नहीं थे। इस मामले में तत्कालीन कार्यवाहक प्राचार्या, स्टेनोग्राफर, सहायक लेखाकार और ट्रस्ट अध्यक्ष की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
कूटरचित दस्तावेज और समिति का आरोप
तहरीर में विश्वविद्यालय के Affiliation Department, तत्कालीन क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी और महाविद्यालय प्रबंधन पर कथित कूटरचित बैठकों की कार्यवाही, दस्तावेज और प्रस्ताव तैयार करने का आरोप भी लगाया गया है। इसके अलावा एक कथित अवैध समिति के गठन और उसकी रिपोर्ट को सरकारी कार्यालयों में शिकायतों के निस्तारण का आधार बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
RTI और IGRS पर भी सवाल
प्रो. चौधरी ने आरोप लगाया कि मई 2026 से RTI के तहत मांगी गई सूचनाएं नहीं दी गईं या अधूरी दी गईं। IGRS और CPGRAMS पर की गई शिकायतों का भी मूल अभिलेखों की जांच के बिना भ्रामक रिपोर्टों के आधार पर निस्तारण किया गया। उन्होंने उप निबंधक कार्यालय, फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स, जिलाधिकारी कार्यालय और अन्य विभागों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।
क्या चाहती हैं प्राचार्या?
1. छात्र निधि, बैंक खातों, निलंबन, कथित झूठे बयानों और कूटरचित दस्तावेजों की अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ निष्पक्ष जांच हो।
2. CCTV फुटेज, ऑडियो, मूल फाइलें, नोटशीट और बैंक रिकॉर्ड सीधे संबंधित विभागों से प्राप्त किए जाएं।
3. दोषी पाए जाने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पुलिस की ओर से इस तहरीर पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। महाविद्यालय प्रबंधन और नामजद पक्षों का पक्ष भी अभी सामने आना बाकी है।


