Homeमध्य प्रदेशइंदौरइंदौर के भक्तों को रास में सीधे प्रवेश मिल सकता है :...

इंदौर के भक्तों को रास में सीधे प्रवेश मिल सकता है : इन्द्रेश जी महाराज

एमआर-10 स्टार चौराहे पर श्रीमद्भागवत कथा शुरू, महादेव को बताया पंच रसों का अधिष्ठाता

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। इंदौर ऐसी पुण्य भूमि है, जिसके एक ओर महाकाल और दूसरी ओर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग हैं। यहां के भक्तों को रास में सीधे प्रवेश मिल सकता है।’ यह बात पूज्य इन्द्रेश जी महाराज ने शुक्रवार को एमआर-10 स्टार चौराहे पर शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कही। कृष्ण भक्ति के भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। महाराज ने कहा कि इंदौर से उनका गहरा नाता है। उनके माता-पिता मानते थे कि यहां के एक महात्मा के आशीर्वाद से उनका जन्म हुआ। यहां के युवाओं से उन्हें हमेशा प्रेम मिला है। शुक्रवार सुबह 6 बजे भी बड़ी संख्या में युवा एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी के लिए पहुंचे।

गोयल परिवार की ओर से पूज्य माताजी स्व. चमेलीदेवी गोयल और पिताजी स्व. श्रीमन्नालाल गोयल की स्मृति में कथा का आयोजन किया जा रहा है। आयोजक आशीष गोयल के अनुसार, परिवार में गुरुजनों के प्रति श्रद्धा और सम्मान की परंपरा रही है। इसी भावना के साथ यह धार्मिक आयोजन किया जा रहा है, जिसमें गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी मिलेगा।

भक्ति से जुड़ने का मिलेगा मौका…

यजमान आशीष गोयल ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि महाराज जी अपने ठाकुर जी राधा गिरधर और अर्धांगिनी के साथ पधारे हैं। 7 दिन तक उनके सानिध्य में कथा का श्रवण करना पूरे शहर के लिए सौभाग्य की बात है। यह आयोजन केवल कथा सुनने का अवसर नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से जुड़ने और उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का भी माध्यम है। महाराज जी के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करेंगे।

श्रद्धालु खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए

‘गिरधारी कहो बनवारी’ भजन की शुरुआत के साथ ही पंडाल में भक्ति और उल्लास का ऐसा रंग चढ़ा कि हर कोई झूमने लगा। इसके बाद महाराज ने ‘श्याम संग राधा नाचे रे’, ‘जगन्नाथ’ और ‘रास रचाई’ भजनों को एक के बाद एक जोड़कर सुनाया। भजनों की लय और कृष्ण नाम की गूंज के बीच श्रद्धालु खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। कोई हाथ उठाकर झूम रहा था, तो कोई तालियां बजाते हुए भक्ति में डूबा था। देखते ही देखते पूरा पंडाल नाचने लगा। हर तरफ कृष्ण भक्ति, संगीत और आनंद का ऐसा माहौल बना कि श्रद्धालु भजनों के सुरों के साथ भावविभोर होकर झूमते रहे।

भक्ति के पांच रस, महादेव में सभी विद्यमान

कथा में इन्द्रेश जी महाराज ने भक्ति के पांच रसों शांत, दास्य, सख्य, वात्सल्य और श्रृंगार का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि शांत रस में भक्त अपनी भक्ति का दिखावा नहीं करता, जबकि दास्य रस में भगवान के प्रति सेवाभाव रहता है। सख्य रस में मित्रता, वात्सल्य रस में माता-पिता जैसा स्नेह और श्रृंगार रस में प्रेमभाव से आराधना की जाती है। मीरा बाई और रानी रत्नावती जैसे भक्तों ने प्रेमभाव से ठाकुरजी की पूजा की। महाराज ने कहा कि भक्त जिस रस से भगवान की आराधना करता है, वह दूसरे रस में प्रवेश नहीं कर सकता। हालांकि महादेव पंच रसों में विद्यमान हैं और सभी रसों के अधिष्ठाता हैं।

नरसी मेहता की कथा से बताया महादेव की कृपा का महत्व

महाराज ने नरसी मेहता का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि दादी के निधन के बाद नरसी मेहता को घर से निकाल दिया गया था। इसके बाद वे जूनागढ़ स्थित इन्द्रेश्वर महादेव के मंदिर पहुंचे और सात दिन तक भूखे-प्यासे वहीं पड़े रहे। उनकी स्थिति देखकर माता पार्वती ने महादेव से उन्हें दर्शन देने और कृपा करने का आग्रह किया। इसके बाद नरसी मेहता ने महादेव और माता पार्वती को अपने माता-पिता मानकर उनके चरणों में प्रणाम किया।

10 एकड़ में आयोजन, 12 एलईडी स्क्रीन और सुरक्षा के इंतजाम

करीब 10 एकड़ क्षेत्र में आयोजित कथा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मंच को श्रीकृष्ण, गाय-बछड़े और मोर की आकृतियों वृंदावन के स्वरूप में सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 250 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। धूप और बारिश से बचाव के लिए पंडाल के साथ पार्किंग से कथा स्थल तक करीब 15 फीट चौड़ा शेड बनाया गया है। कथा सभी श्रद्धालुओं को स्पष्ट दिखाई दे, इसके लिए 12 बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं। मेडिकल सुविधा के लिए एंबुलेंस, डॉक्टर और फर्स्ट एड की व्यवस्था है। फायर सेफ्टी के साथ पुलिस और सुरक्षा के इंतजाम भी किए गए हैं। कथा प्रतिदिन शाम 4 से 7 बजे तक आयोजित होगी।

Share on Blogger
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Facebook Page

Most Popular

Recent Comments