HomeUncategorizedसुभारती में ‘सनातन राष्ट्र एवं राष्ट्रीय चरित्र निर्माण संगोष्ठी’ का भव्य आयोजन

सुभारती में ‘सनातन राष्ट्र एवं राष्ट्रीय चरित्र निर्माण संगोष्ठी’ का भव्य आयोजन

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ में बुधवार को राष्ट्रीय चेतना, भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और युवा पीढ़ी में राष्ट्रीय चरित्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘सनातन राष्ट्र एवं राष्ट्रीय चरित्र निर्माण संगोष्ठी’ का भव्य आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय परिसर स्थित मांगल्य प्रेक्षागृह में आयोजित संगोष्ठी में श्री श्री 1008 श्रीमद्जगद्गुरु श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी महाराज मुख्य अतिथि तथा वरिष्ठ पत्रकार एवं अमर उजाला समूह के सलाहकार-संपादक विनोद अग्निहोत्री विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण, विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज सहित अनेक शिक्षाविद, प्रबुद्धजन, शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि जो शाश्वत है, वही सनातन है। सनातन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की ऐसी शाश्वत पद्धति है, जो मानवता, नैतिकता, संस्कार और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण व्यक्तिगत चरित्र निर्माण से ही संभव है। जब व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को आत्मसात करता है, तभी एक सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण होता है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के मूल भाव को समझकर उन्हें अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपने संबोधन में सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण की प्रशंसा करते हुए कहा कि डॉ. अतुल की जो विचारधारा है वही सच्चे राष्ट्रभक्त की विचारधारा होनी चाहिए।जिस प्रकार से डॉ. अतुल कृष्ण ने दशकों पहले अपने छात्र जीवन से ही सुभारत के निर्माण के लिए सुभारती संस्था का निर्माण किया और आज एक विशाल सुभारती संस्थान को ना सिर्फ स्थापित किया है बल्कि उसे एक उच्च मानकों वाले राष्ट्रवादी विचारों के पोषक संस्थान के रुप में प्रतिष्ठित कराना भी एक बहुत बड़ी बात है। युवाओं को डॉ. अतुल के जीवन से सदा प्रेरणा लेनी चाहिए। 

इस अवसर पर बोलते हुए विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल विचारों या नारों से नहीं, बल्कि समर्पित व्यक्तित्व और उनके कर्मों से होता है। उन्होंने युवाओं को डॉ. अतुल कृष्ण के जीवन, संघर्ष, दूरदृष्टि और राष्ट्र के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को ऐसे व्यक्तित्वों के जीवन से सीख लेकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। राष्ट्र के प्रति संवेदनशीलता, सकारात्मक सोच और कर्मठता ही एक जागरूक नागरिक की पहचान है।

सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में जेनरेशन अल्फा और जेनरेशन ज़ी को भारतीय संस्कारों, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। आधुनिक तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय अस्मिता को सुरक्षित रखना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सपनों का भारत तभी साकार हो सकता है, जब देश की युवा पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, त्याग, आत्मसम्मान और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित हो। उन्होंने युवाओं से केवल अपने व्यक्तिगत विकास तक सीमित न रहकर राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा हमारे जीवन को दिशा देने वाले अमूल्य आधार हैं। राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण शिक्षा के साथ संस्कार, नैतिकता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के समन्वय से होता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अकादमिक रूप से दक्ष बनाना नहीं, बल्कि उन्हें संवेदनशील, जिम्मेदार और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बनाना भी है। नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य बोध विकसित करना शिक्षा संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

संगोष्ठी का विशेष आकर्षण सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण द्वारा लिखित एवं संपादित पुस्तक ‘राष्ट्र अनुभूति’ के विस्तारित संस्करण का विमोचन रहा। अतिथियों ने पुस्तक का विमोचन करते हुए इसे राष्ट्र चेतना, भारतीय विचार परंपरा, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय मूल्यों को समाज तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से नई पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को समझने की प्रेरणा मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान 21 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय के द्वारा आयोजित ‘अखंड भारत स्वतंत्रता दिवस महापर्व-2026’ के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत एवं सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि महापर्व के अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में निबंध लेखन, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। इसके अतिरिक्त राष्ट्रभक्ति, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का संदेश प्रसारित करने के लिए भव्य रैली भी निकाली गई थी।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने संगोष्ठी को वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए कहा कि आधुनिकता के साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का समन्वय ही एक सशक्त, आत्मनिर्भर और संस्कारवान भारत की आधारशिला बनेगा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र के प्रति समर्पण, सांस्कृतिक चेतना और युवा शक्ति को सकारात्मक दिशा देने के संकल्प के साथ हुआ।

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