
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय में अब सारंगी वादन के डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स के परफॉर्मिंग आर्ट्स विभाग के अंतर्गत संचालित साबरी अकादमी ऑफ सारंगी के माध्यम से इन पाठ्यक्रमों का संचालन विश्वविख्यात सारंगी वादक उस्ताद कमाल साबरी के मार्गदर्शन में किया जाएगा। इस पहल से देश-विदेश के विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत के इस विशिष्ट वाद्ययंत्र को सीखने और उसमें दक्षता हासिल करने का अवसर मिलेगा।
इस संबंध में सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विनय कुमार मित्तल और विश्वविख्यात सारंगी वादक उस्ताद कमाल साबरी के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज, फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स के डीन प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा, परफॉर्मिंग आर्ट्स विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. भावना ग्रोवर तथा डॉ. श्वेता चौधरी उपस्थित रहीं।
कुलपति प्रो. (डॉ.) विनय कुमार मित्तल ने नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत और उस्ताद कमाल साबरी के साथ हुए समझौते पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने पाठ्यक्रमों से जुड़ने वाले देश-विदेश के विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस तरह की पहल भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साथ ही, विद्यार्थियों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण संगीत प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
वही मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज ने कहा कि स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय कला, संस्कृति और भारतीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है। उस्ताद कमाल साबरी के साथ यह समझौता इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है। साबरी अकादमी ऑफ सारंगी के माध्यम से पारंपरिक संगीत ज्ञान को औपचारिक शिक्षा से जोड़ने के साथ ही भावी संगीत साधकों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलेगा।
उस्ताद कमाल साबरी भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के प्रतिष्ठित सारंगी वादक और प्रसिद्ध साबरी घराने की संगीत परंपरा के प्रतिनिधि हैं। वह स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के पद पर भी कार्यरत हैं। उनके अनुभव और विशेषज्ञता के माध्यम से विद्यार्थियों को सारंगी वादन की तकनीकों, उसकी बारीकियों और व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण में पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को भी प्रमुखता दी जाएगी।
फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स के डीन प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा और परफॉर्मिंग आर्ट्स विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. भावना ग्रोवर ने इस पहल को भारतीय संगीत विरासत के संरक्षण तथा उच्च शिक्षा में पारंपरिक वाद्ययंत्रों के अध्ययन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
साबरी अकादमी ऑफ सारंगी के अंतर्गत शुरू किए जा रहे डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रवेश प्रक्रिया, पात्रता और पाठ्यक्रम से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
सुभारती विश्वविद्यालय की यह पहल सारंगी वादन को अकादमिक पहचान दिलाने, भारतीय शास्त्रीय संगीत की अमूल्य धरोहर को सहेजने और पारंपरिक संगीत शिक्षा को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे देश-विदेश के विद्यार्थियों को भारतीय संगीत परंपरा से जुड़ने और अपनी संगीत प्रतिभा को निखारने का नया अवसर मिलेगा।


